और भाजपा के देवेंद्र फडनवीस ने भी दे दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

Update: 2019-11-26 10:18 GMT

महाराष्ट्र में 10 हजार करोड़ रुपए के जलग्रहण मिशन घोटाले की आंच पहुंची पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस तक

जनज्वार। महाराष्ट्र राजनीति में चले चरम नाटक की अगली कड़ी में अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसकी संभावना जनज्वार अपनी पहली रिपोर्ट में जाहिर भी कर चुका था।

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गौरतलब है कि अजित पवार के इस्‍तीफे के बाद से महाराष्‍ट्र की सियासत में एक और नाटक जुड़ गया। कल 25 नवंबर की शाम एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में 162 विधायकों ने एकता बनाए रखने की शपथ ली थी। इसके बाद भाजपा में हड़कंप मच गया था। उसके बाद जब आज सुबह सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि कल 27 नवंबर की शाम 5 बजे तक देवेंद्र फडनवीस सरकार सदन में बहुमत साबित करे, जिसका प्रसारण लाइव हो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाए, उसके बाद से आशंकायें प्रबल होने लगी थी कि फडनवीस इस्तीफा देंगे। कोर्ट ने राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्यारी को निर्देशित किया था कि वो प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्‍ति करें।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहले अजीत पवार का इस्तीफा और अब 3.30 बजे प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का इस्तीफा बता रहा है कि महाराष्र्ट के समीकरण बदलने जा रहे हैं। बहुमत साबित करने से पहले ही देवेंद्र फडनवीस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि मीडिया में खबरें यह भी आ रही हैं कि भाजपा नेताओं की दिल्‍ली में एक उच्‍च स्‍तरीय बैठक आयोजित हुई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शामिल हुए हैं।

डणवीस ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'हमने जो पाँच सालों में काम किया वो ईमानदारी से किया है। काम की वजह से ही महाराष्ट्र की जनता ने फिर से सत्ता सौंपी थी। हम माननीय नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहते हैं जो चट्टान की तरह महाराष्ट्र के साथ खड़े रहे।

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हीं अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए फडणवीस ने कहा कि 'शिव सेना के लोग सोनिया गांधी के चरणों में नतमस्तक हैं। मंगलवार को शिव सेना के नेता सोनिया गांधी के नाम पर शपथ ले रहे थे।'

डनवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट जनादेश दिया था, मगर शिव सेना ने नंबर देख मोलतोल करना शुरू कर दिया। हमारी शिव सेना से मुख्यमंत्री पद बाँटने की कभी बात हुई ही नहीं थी।'

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