फसल को आग लगा एक और किसान ने की आत्महत्या

Update: 2017-11-04 09:26 GMT

एक आंकड़े के मुताबिक 2001—2010 के बीच ओडिशा में 2,600 से अधिक किसानों ने तबाह होती फसलों और कर्ज के चलते आत्महत्या की थी...

ओडिशा के बरगढ़ जिले के कालापानी के किसान बृंदावन साहू ने पहले अपने 15 एकड़ की फसल को आग लगाई और फिर वहीं खेतों पर कीड़ों पर छिड़कने वाला जहर पी गया।

यह घटना 1 नवंबर की है। जब लोगों ने उसे कीटनाशक के जहर से तड़पते हुए देखा तो अस्पताल ले गए, मगर उसे बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान बरगढ़ जिला अस्पताल में बृंदावन की मौत हो गई। जिस मौत को उसने अपने लिए खुद ही चुना था।

पिछले दस दिनों के दौरान बरगढ़ जिले में यह चौथे किसान की आत्महत्या है या कहें कि उन्हें मौत के मुंह में धकेला गया है। पहले भी बरगढ़ में सैकड़ों किसान तबाह होती खेती के चलते आत्महत्या कर चुके हैं, इसीलिए इसे पूर्वी भारत के नये विदर्भ की संज्ञा तक दी जाने लगी थी।

गौरतलब है कि ओडिशा के बरगढ़ जनपद में किसान ब्राउन प्लांट हॉपर कीड़े द्वारा फसलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किए जाने से परेशान हैं, कीटनाशकों का उस कीड़े पर कोई असर नहीं हो रहा है, जिस कारण किसान अपने लिए मौत चुन रहे हैं।

बृंदावन ने भी अपने लिए मौत इसीलिए चुनी क्योंकि अगर वह जिंदा भी रहता तो एक—एक पल में हजारों मौत मरता। 15 एकड़ में बोई गई उसकी धान की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी थी। हताशा—निराशा ने उसे मौत के मुंह में धकेल दिया। बृंदावन साहू के परिजनों के मुताबिक उसने 15 एकड़ के क्षेत्र में खेती करने के लिए करीब 500,000 रुपए का कर्ज लिया था और तबाह हो गई फसल के बाद कर्ज देना नामुमकिन था इसलिए उसने कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली।

कीड़ों से बर्बाद होती फसलों और किसानों द्वारा लगातार की जा रही आत्महत्याओं से प्रभावित किसान रोष में हैं। उनका कहना है कि चूंकि सरकार द्वारा हमें घटिया दर्जे की कीटनाशक उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे कीड़ों पर कोई असर नहीं पड़ रहा। हमारी पूरी फसल बर्बाद हो रही है साथ में हम भी। मौत के सिवाय हमें कुछ नजर नहीं आ रहा।

शासन—प्रशासन ने इस मामले में अपने कर्तव्य की इतिश्री करते हुए जल्द से जल्द मामले की रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। मगर क्या रिपोर्ट से किसान आत्महत्याओं का यह सिलसिला रुकेगा। बृंदावन की मौत के बाद भी प्रशासनिक अमला जांच—पड़ताल कर चुका है, पर क्या शासन—प्रशासन यह सुनिश्चित कर पाएगा कि कोई और बृंदावन निराशा—हताशा में बर्बाद होती फसलों को देख अपने लिए मौत नहीं चुनेगा।

पश्चिम ओडिशा के हजारों किसान कीड़ों से तबाह होती अपनी फसल को बर्बाद होते देखने को मजबूर हैं। किसान कह रहे हैं कि हमारे पास फसल को आग के हवाले करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक संबलपुर जिले के कुल नौ ब्लाक में से कीड़े की वजह से 5658 हेक्टर धान की फसल को नुकसान हुआ है। कई जगहों पर किसानों ने अपनी फसल पर आग लगा दी है। प्रभावित किसान कह रहे हैं कि धान की फसल में आग लगने के बाद कीड़े उड़कर आसपास के खेतों में चले जाते हैं और फसल को चौपट कर देते हैं।

कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, संबलपुर जिला के धनकौड़ा ब्लाक अंतर्गत 19 पंचायतों के 83 गांव में चकड़ा कीड़े की वजह से करीब 3468 हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं कुचडा ब्लाक के 17 पंचायतों के 97 गांवों में 1012 हेक्टेयर और बामड़ा ब्लाक के 17 पंचायतों के 135 गांवों में 394 हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। मानेश्वर ब्लाक के 16 पंचायतों के 62 गांवों में 319 हेक्टेयर, ताते जमनकिरा ब्लाक के 21 पंचायत के 83 गांवों के 263 हेक्टेयर और जुजुमुरा ब्लाक अंतर्गत 15 पंचायतों के 37 गांवों के 105 हेक्टेयर की फसल चकड़ा कीड़े की वजह से तबाह हो गई।

एक आंकड़े के मुताबिक 2001—2010 के बीच ओडिशा में 2,600 से अधिक किसानों ने तबाह होती फसलों और कर्ज के चलते आत्महत्या की थी। (बृंदावन साहू की फोटो डाउन टू अर्थ से ली गई है।)

Similar News