आदिवासी महिला राजकली उरांव की PM रिपोर्ट सार्वजनिक कर दुष्कर्मियों को कठोर सजा देने के लिए CM नीतीश कुमार के नाम पत्र

राजकली उरांव के हत्यारोपी और दुष्कर्मी वन विभाग के सिपाहियों, वनरक्षियों को बचाने के लिए पुलिस प्रशासन व सरकार द्वारा जिस तरह का षडयंत्र किया गया तथा जांच के नाम पर दोषियों को बचाने के लिए जिस तरह की लीपापोती की गई, उससे यह साफ पता चलता है कि वन विभाग, पुलिस प्रशासन और राज्यसत्ता की नजर में महिलाओं, आदिवासियों और गरीबों की कोई इज्जत नहीं है...

Update: 2023-03-24 12:02 GMT

Rajkali Uranv Murder case : राजकली उराँव के बलात्कारियों को कठोर से कठोर सजा देने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने, कैमूर पठार से वन्यजीव अभ्यारण्य और बाघ अभ्यारण्य को तत्काल प्रभाव से खत्म करने के लिए कैमूर मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि पिछले 4 जनवरी 2023 को नागाटोली, रोहतास में एक गरीब उरांव आदिवासी महिला की वन विभाग के सिपाहियों द्वारा बलात्कार के बाद हत्या कर दी गयी थी, जिसके बाद वन विभाग के सिपाहियों, वनरक्षियों को बचाने के लिए पुलिस प्रशासन व सरकार द्वारा जिस तरह का षडयंत्र किया गया तथा जांच के नाम पर दोषियों को बचाने के लिए जिस तरह की लीपापोती की गई, उससे यह साफ पता चलता है कि वन विभाग, पुलिस प्रशासन और राज्यसत्ता की नजर में महिलाओं, आदिवासियों और गरीबों की कोई इज्जत नहीं है।

दरअसल बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे के लिए केंद्र और राज्य की सरकारें प्राकृतिक संपदा से भरपूर आदिवासी इलाकों के जल-जंगल-जमीन को हथियाने पर उतारू हैं। इसके खिलाफ संघर्ष करने वाली जनता को डराने व उसके मनोबल को तोड़ने के लिए शासक वर्ग सबसे पहला निशाना महिलाओं को ही बनाता है। जैसा कि हम राजकली उरांव के मामले में भी देख सकते हैं। हमारा यह स्पष्ट मानना है कि आदिवासी जनता के अंदर दहशत पैदा करने के लिए राजकली उरांव के साथ बलात्कार और उनकी हत्या की गई, ताकि अपनी जीविका के परंपरागत साधनों लकड़ीए महुआ, पियार आदि के लिए लोग जंगल में न जाएं।

कैमूर पठार अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। क्षेत्रफल के हिसाब से कैमूर पठार बिहार राज्य का सबसे बड़ा जंगली और पहाड़ी इलाका है। बिहार में कैमूर पठार के अर्न्तगत दो जिले आते हैंए कैमूर और रोहतास। यहां का कुल क्षेत्रफल 1800 वर्ग किलोमीटर है। यह आदिवासी बाहुल्य इलाका है। यहां खरवार, उरांव, चेरो, अगरिया, कोरबा आदिवासी समुदाय के लोग ज्यादा संख्या में निवास करते हैं। इसके अलावा यहां गैर परम्परागत वन निवासी यानी अन्य जाति के लोग भी रहते हैं। भारत या पूरी दुनिया में जहां भी आदिवासी नहीं हैं या जबरन विस्थापित कर दिये गये वहां आज ज्यादातर जंगल, पहाड़, पशु-पक्षी नहीं बचे हैं। भारत में कथित आजादी से लेकर आज तक कभी बांध के नाम पर तो कभी खान-खदान के नाम पर तो कभी वन्यजीव अभ्यारण्य और वन संरक्षण तथा कभी और किसी बहाने से पूंजीपतियों के फायदे के लिए अब तक 3.4 करोड़ आदिवासियों को विस्थापित किया जा चुका है।

आज सरकार आदिवासियों को कैमूर से यह कहकर हटाना चाहती है कि आदिवासी जल-जंगल-जमीन और वन्यजीवों के लिए खतरा हैं, इसलिए बिना कैमूर पहाड़ के जनता की अनुमति के पहले कैमूर पठार को वन्यजीव अभ्यारण्य में डाल दिया गया और अब इसे बाघ अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया है। सरकार यह कह रही है कि अब यहां बाघ पाला जायेगा, जिन्हें इंसानों की चिंता नहीं है उन्हें बाघों की भला की कितनी चिंता होगी? जनता यह बात भली भांति समझती है। सरकार विदेशी साम्राज्यवादियों, देशी-विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए किसी भी कीमत पर कैमूर पठार की जनता को उसके जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने पर आमादा है। हमारा यह स्पष्ट मानना है कि बाघों या जंगलों को आदिवासियों से खतरा नहीं है, बल्कि जंगलों को खत्म करने का काम ब्रिटिश शासनकाल से आज तक सरकार और वनविभाग ने कूप कटाई यानी लकड़ी से कोयला बनाने के नाम पर व अन्य नामों पर किया है। बाकी जंगलों की कटाई बाहरी लोगों लकड़ी माफिया ने जब वे पठार पर आये तो वन विभाग की मदद से किया है।

आदिवासी हजारों साल से इन जंगलों में बाघों और अन्य वन्य जीवों के साथ रहते आये हैं। बाघों की हत्या तो शिकारियों ने तथा बाहरी चरवाहों ने वन विभाग की उपस्थिति में की है। आदिवासियों ने तो जंगलों को बचाया है और जानवरों के साथ साहचर्य में अपना जीवन बिताया है। कैमूर पठार को बाघ अभ्यारण्य, बाघों की रक्षा के लिए नहीं बल्कि आदिवासियों को भगाकर उनके जल-जंगल-जमीन पर कब्जा करने के लिए बनाया जा रहा है। आज पूरे देश में 52 बाघ अभ्यारण्य हैं। कैमूर बाघ अभ्यारण्य 53वां और भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है। यह टाइगर रिजर्व 1342 वर्ग किलोमीटर में बनाया जा रहा है। इस अभ्यारण्य को 450 वर्ग किलोमीटर में कोर एरिया तथा 850 वर्ग किलोमीटर बफर एरिया में बांटा गया है। कोर एरिया में सबसे ज्यादा गांवों को विस्थापित होने का खतरा है। बाकी बफर एरिया के भी धीरे-धीरे जो गांव प्रभावित होंगे उन्हें बाद में हटाया जायेगा। कैमूर पठार की आदिवासी और गैर आदिवासी जनता यह ऐलान कर चुकी है कि वह बाघ अभ्यारण्य और वन्य जीव अभ्यारण्य को किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं देगी, चाहे इसके लिए उसे अपना खून ही क्यों न बहाना पड़े।

कैमूर मुक्ति मोर्चा ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री बिहार से अपील की है कि वो हमारी निम्नलिखित माँगों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें। वरना आगे हम और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे-

कैमूर मुक्ति मोर्चा की मांगें

1. राजकली उरांव के बलात्कारियों को तत्काल गिरफ्तार करके कठोर से कठोर सजा दो।

2. राजकली उरांव के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा दो।

3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक करो।

4. कैमूर पठार से वन जीव अभ्यारण्य और बाघ अभ्यारण्य को तत्काल खत्म करो।

5. वनाधिकार कानून 2006 को तत्काल प्रभाव से लागू करो।

6. कैमूर पहाड़ का प्रशासनिक पुनर्गठन करते हुए पांचवीं अनुसूची क्षेत्र घोषित करो।

7. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम को लागू करो।

8. पेशा कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करो।

9. बिना ग्राम सभा की अनुमति के गांव के सिवान में घुसना बंद करो।

10. वन विभाग द्वारा आदिवासियों से जंगल में टांगी (कुल्हाड़ी) और सूखी लकड़ी छीनना बंद करो।

11. खेती की जमीन से लोगों को उजाड़ना और उसमें वृक्ष रोपना बंद करो।

12. हमारे जीविका के परंपरागत स्रोत वन उत्पाद पर रोक लगाना बंद करो।

13. जनता को फर्जी मुकदमे में फसाना बंद करो और जनता पर लादे गए सारे फ़र्ज़ी मुकदमें वापस लो।

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