'सिर्फ माला पहनने से मान्य नहीं होगी शादी, 7 फेरे जरूरी' : लव मैरिज पर मध्य प्रदेश HC का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि सिर्फ माला पहनाने से शादी वैध नहीं हो जाती, बल्कि इसके लिए अग्नि के सात फेरे भी लेने जरूरी हैं....

Update: 2021-09-16 09:48 GMT

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जनज्वार, मुरैना। ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिए, सिर्फ वरमाला पहनने से अब शादी मान्य नहीं होगी,बल्कि सात फेरे अनिवार्य रूप से लेने होंगे। जी हां, लव मैरिज (love marriage) करने वालों के लिए शादी की रस्में अदा करना जरूरी है, तभी उनकी शादी को मान्यता प्राप्त होगी। यह फैसला दिया है मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya pradesh High Court) ने।

दरअसल, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लव मैरिज को लेकर एक बड़ा फ़ैसला सुनाया हैं। इस मामले की सुनवाई कर रही ग्वालियर खंडपीठ ने कहा कि हमारे देश में सिर्फ़ फूलों की माला पहनने से शादी नहीं हो जाती। उसके लिए पूरे विधि-विधान व रीति रिवाज के साथ अग्नि के सामने सात फेरे लेना बेहद जरूरी होता है, तभी शादी पूरी तरह मान्य होती है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी आर्य समाज मंदिर में शादी करने का दावा कर रहे मुरैना के नवविवाहित जोड़े की सुनवाई के दौरान कही, क्योंकि इस जोड़े ने शादी करने के बाद हाईकोर्ट से सुरक्षा मांगी थी।

इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट (court) ने कहा कि इस याचिका को ख़ारिज किया जाता है, क्योंकि इस मामले में अभी एक भी ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे पता लगाया जा सके कि प्रेमी युगल को धमकी मिल रही हैं और वो अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस के पास भी गए हैं।

जोड़े ने शादी के बाद जान को ख़तरा बताते हुए मांगी थी सुरक्षा

दरअसल मुरैना (Morena) के 23 वर्षीय युवक ने अपनी पसंद की 21 वर्षीय युवती के साथ 16 अगस्त को ग्वालियर के लोहा मंडी किलागेट स्थित आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir) में लव मैरिज (Love marriage) की थी और सबूत के आधार पर आर्य समाज ने उन्हें सर्टिफिकेट भी दिया था। शादी के बाद इस जोड़े ने हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा के लिए एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता जोड़े ने कहा कि दोनों ने लव मैरिज की है, इनके परिजन झूठी शिकायतें कर रहे हैं, उनकी जान को खतरा है।

सुनवाई के बाद कोर्ट द्वारा ख़ारिज की गई याचिका

कोर्ट द्वारा सुनवाई के बाद इसलिए याचिका खारिज कर दी गयी, क्योंकि शासकीय अधिवक्ता दीपक खोत (Deepak Khot) ने तर्क दिया था कि याचिककर्ता जोड़े ने अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी थाने में कोई भी आवेदन नहीं दिया, फिर उन्हें किससे ख़तरा हो सकता है और कौन उन्हें धमकी दे सकता है। इस तरह की किसी भी परेशानी के बारे में इस जोड़े ने जिक्र नही किया है, बल्कि सीधे कोर्ट में याचिका दायर की गई हैं। यही कारण हैंकि यह याचिका सुनवाई के लायक नहीं हैं।

शासकीय अधिवक्ता के इसी तर्क के आधार पर कोर्ट ने प्रेम विवाह (Love Marriage) करने वाले जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि सिर्फ माला पहनाने से शादी वैध नहीं हो जाती, बल्कि इसके लिए अग्नि के सात फेरे भी लेने जरूरी हैं और विधिपूर्वक की गयी शादी को ही वैधता दी जायेगी। 

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