डेढ़ साल तक जेल की काल कोठरी में आंसू बहाता रहा बेबस बाप, बेटी से रेप के झूठे इल्जाम में फंसाए गए पिता की मार्मिक दास्तां

Merta Nagaur news : 20 महीने जेल में रहा, वहां दूसरे कैदियों ने गालियां दी, बेइज्जत किया, 1 सितंबर 2022 को कोर्ट ने तो मुझे बरी कर दिया, लेकिन इन 20 महीनों में मेरी सारी इज्जत चली गई, अब मैं दुनिया को कैसे समझाऊं कि मैंने अपनी बेटी का रेप नहीं किया...

Update: 2022-09-09 09:24 GMT

Merta Nagaur news : एक मामूली इल्जाम से बेदाग निकलने में जब लोगों की न्यायालय में एडियां घिस जाती हों तो यह कल्पना करना कितना भयावह हो सकता है कि एक व्यक्ति को उसकी सगी बेटी रेप के झूठे इल्जाम के कलंक के साथ डेढ़ साल से भी अधिक जेल में रहना पड़ जाए। जिस बात की कल्पना के लिए कहा गया है, वह राजस्थान के एक व्यक्ति के जीवन में घटी सच घटना की ऐसी दारुण कथा है कि न्यायालय के जज भी हैरान रह गए।

पेशे से किसानी करने वाले अभागे आदमी की इस मार्मिक कहानी को पहली बार दैनिक भास्कर अखबार ने दुनिया के सामने नुमाया किया है। अगर इस व्यक्ति के उन्हीं शब्दों में इस व्यक्ति के दर्द को संक्षेप में समझा जाए जो उसने अखबार के संवाददाता से कहे तो 'मेरा नाम सुरेश (काल्पनिक नाम) है। मुझ पर अपनी ही 12 साल की बेटी के रेप का आरोप था। समाज के लोगों ने ताने दिए। 20 महीने जेल में रहा। वहां दूसरे कैदियों ने गालियां दी, बेइज्जत किया। 1 सितंबर 2022 को कोर्ट ने तो मुझे बरी कर दिया, लेकिन इन 20 महीनों में मेरी सारी इज्जत चली गई। अब मैं दुनिया को कैसे समझाऊं कि मैंने अपनी बेटी का रेप नहीं किया। किस-किस को जाकर बताऊं कि मैं बेगुनाह था।' इन शब्दों से समझ सकते हैं।

राजस्थान के नागौर जिले के मारोठ इलाके के एक गांव में रहकर मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहा यह गरीब इंसान 26 दिसंबर 2020 की तारीख को अपने जीवन में कभी नहीं भूल सकता। यही वह काला दिन था जब उसकी लंबी रुसवाई की पटकथा लिखी गई थी। उसकी पत्नी ने इस व्यक्ति पर अपनी ही 12 साल की बेटी से रेप का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज हुआ तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

नर्क से बदतर हालात में लंबा समय गुजारने के बाद कोर्ट से बाइज्जत बरी इस व्यक्ति ने अब अपने को एक कमरे में कैद कर लिया है। सीलन भरे कमरे की तन्हाई में बैठा यह शख्स जिसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी पत्नी उसके ही खिलाफ ऐसी साजिश रच सकती है ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, "मैं एकदम गरीब आदमी हूं। मजदूरी कर परिवार पालता था। कभी लगा नहीं कि मेरी पत्नी मेरे खिलाफ इतनी बड़ी साजिश कर सकती है। 27 दिसंबर 2020 को मेरा ये भ्रम टूट गया, जब पुलिस मुझे गिरफ्तार करने आई। मैंने वजह पूछी तो उन्होंने कहा- कि 'तूने अपनी बेटी का रेप किया है'। ये सुनकर एक बार तो मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। मैंने लाख मिन्नतें की, लेकिन पुलिसवालों ने एक नहीं सुनी और मुझे गिरफ्तार कर ले गए।

उस दिन से मेरी जिंदगी नरक बन गई। मैं कभी जिस थाने, कोर्ट कचहरी के रास्तों से भी नहीं गुजरा, अब मेरी जिंदगी का अटूट हिस्सा बन चुके थे। पड़ोसियों, रिश्तेदारों को जब मेरे जेल जाने का पता चला तो सबने मुझसे बात करना बंद कर दिया। 20 महीने के दौरान जेल में कोई मिलने तक नहीं आया। गरीबी इतनी थी कि मेरे पास वकील तक के लिए पैसे नहीं थे। कोई मदद के लिए भी आगे नहीं आया। फिर कोर्ट से ही मुझे एक वकील मिला। जब वह मुझसे मिलने आये तब उन्हें मैंने सारी सच्चाई बताई। इसके बाद उन्होंने मेरे गांव के कुछ लोगों को मेरी बेगुनाही के बारे में बताया, तब जाकर गांव से मेरा एक भाई मिलने आया। आज सच्चाई भले ही सामने आ गई हो लेकिन इस स्थिति में मैं किस-किस को जाकर बताऊं कि मैं उस समय भी बेगुनाह था जब लोग मुझे गुनहगार समझ रहे थे।"

इस वजह से पत्नी ने फंसा दिया था झूठे मुकदमों में

साल 2020 के वह 26 दिसंबर की तारीख थी, जब एक महिला ने मारोठ थाने में रिपोर्ट दी कि उसके पति ने अपनी 12 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर मारने की धमकी देता है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जांच पड़ताल की, मेडिकल करवाया और कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे 27 दिसंबर 2020 को जेल भेज दिया गया। कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और इस बीच करीब 15 महीने तक वह जेल में रहा। पीड़िता के बयान होते रहे, मां दुष्कर्म की कहानी सुनाती रही। तारीखें मिलती रही, सुनवाई होती रही, सबूत पेश किए जाते रहे। पुलिस ने मौके से जुटाई हर चीज, डीएनए के सैंपल सब कुछ कोर्ट में पेश किए। 5 मई 2022 को कोर्ट में डीएनए व मेडिकल रिपोर्ट पेश हुई, जिसमें पुष्टि हुई कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट में बहस आगे बढ़ी।

इन करीब 15--16 महीनों में पिता टूट चुका था। सदमे में था। इतने पैसे भी नहीं थे कि अपना सच बताने के लिए वकील कर सके। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता सिटी की ओर से उसे वकील मुहैया करवाया गया। वकील कैलाश नारायण दाधीच ने उससे जेल में जाकर तसल्ली से पूछा तो उसने अपनी सच्चाई बताई। यहां से पूरे केस के बदलने की कहानी शुरू हुई। आरोपी की बेटी और पत्नी से कोर्ट में क्रॉस क्वेश्चन हुए तो वह परेशान होने लगे। वकील कैलाश नारायण के सवालों के आगे आरोपी की पत्नी टूट गई तो उसने बताया कि वह पति का मकान अपने नाम कराना चाहती थी, लेकिन वह मान नहीं रहा था। पत्नी ने अपने भाई के साथ मिलकर साजिश रची और मोहरा बनाया अपनी 12 साल की बेटी को। बेटी के जरिए पति पर दुष्कर्म के आरोप लगवाए।

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मां के टूटते ही जिस बेटी ने पहले पुलिस के सामने बयानों में दुष्कर्म होने की बात कही थी, उसी ने पलटी मारते हुए कोर्ट में कहा कि उसने यह सब अपनी मां और मामा के कहने पर किया। पिता ने कभी उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया।

...न्यायालय भी हुआ हैरान

दोनों पक्षों की दलील और बयान सुनने के बाद विशिष्ट पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश रतनलाल मूंड ने फैसला सुनाते हुए पिता को बरी कर दिया। वहीं पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत अब मिलने वाली राशि पर भी रोक लगा दी है। इस केस का फैसला सुनाते हुए विशिष्ट पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश रतनलाल मूंड ने तल्ख मौखिक टिप्पणी के साथ लड़की की मां से पूछा "कैसी कलयुगी मां हो तुम। एक मां अपनी बेटी-बेटे और परिवार का कभी बुरा नहीं सोच सकती, लेकिन तुमने तो पिता और बेटी के पवित्र रिश्ते पर ही कलंक लगाने जैसे घिनौना काम किया है।"

कोर्ट में क्यों होते हैं झूठे केस

झूठा केस कराने वालों की प्रवृत्ति को चिन्हित करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती का कहना है 'पुलिस को झूठी शिकायत देने पर पुलिस झूठी शिकायत देने वाले के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 182 के तहत कार्यवाही कर सकती है। इस धारा में 6 महीने तक सजा व एक हजार रुपए जुर्माना, जबकि इसी मामले में यदि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 211 के तहत कार्यवाही की जाए तो इसमें 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।'

झूठे केस दर्ज करवाने के मामले में कार्रवाई बहुत कमजोर किस्म की है। पुलिस एफआईआर दर्ज कर उसमें तफ्तीश के बाद केस को झूठा मानकर कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करती है। जब तक न्यायालय में पुलिस की इस अंतिम रिपोर्ट को मंजूर नहीं किया जाता तब तक झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कोई ट्रायल शुरू नहीं होता। ऐसे 99 फीसदी मामलों में ट्रायल ही शुरू नहीं होता। गंभीर से गंभीर झूठा आरोप लगाकर संबंधित व्यक्ति की छवि धूमिल की जा सकती है। उसे जेल भिजवाया जा सकता है। उसका मीडिया ट्रायल कर उसके चरित्र को हमेशा के दागदार बनाया जा सकता है। लेकिन झूठी शिकायत करने वाले को उसमें गंभीर सजा नहीं मिलती। जिस वजह से लोग अपने स्वार्थों के चलते जुटे मुकदमें दर्ज करवाने से भी नहीं हिचकते।

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