Varanasi : काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे आज, चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा
Varanasi : कोर्ट के आदेश के बाद आज शाम चार बजे ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर की वीडियोग्राफी और सर्वे का काम आज शाम 4 बजे शुरू होगा...
Varanasi : काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे आज, चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा
Varanasi : उत्तर प्रदेश के वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) परिसर की वीडियोग्राफी और सर्वे का काम आज से शुरू हो रहा है। ये काम वाराणसी सिविल कोर्ट (Varanasi Civil Court) के आदेश के बाद किया जा रहा है। मस्जिद परिसर का सर्वे (Gyanvapi Mosque Survey) आज शाम चार बजे बजे से होगा। उससे पहले कड़ी धूम में जुम्मे की नमाज अदा करने वालोों को लाइन में लगाकर चेकिंग के बाद एक-एक कर मस्जिद में एंट्री दी गई है।
दूसरी ओर सड़क पर एक महिला भगवा वस्त्र ओढ़े बैठी हुई थी, उसे पुलिस अपने साथ ले गई है। किसी तरह की घटना न हो इसके लिए चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए हैं। इस पूरे सर्वे में तीन से चार दिन का अनुमान है। इस दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी होगी।
मस्जिद का क्यों हो रहा सर्वे
दरअसल कोर्ट (Varanasi Civil Court) में रेखा पाठक, सीता साहू, लक्ष्मी देवी, मंजू व्यास और राखी सिंह नाम की पांच महिलाओं ने एक याचिका दाखिल की थी। इन याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से ऋंगार गौरी मंदिर (Shringar Gauri Temple) में रोजाना पूजा अर्चना की अनुमति दिए जाने की अपील की थी। कोर्ट से इसके लिए इजाजत की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि शृंगार गौरी का मंदिर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद है और मस्जिद की दीवार से सटा हुआ है।
बीते साल 18 अगस्त को वाराणसी (Varanasi) सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। 26 अप्रैल को कोर्ट का आदेश आया। आदेश में एक कमीशन नियुक्त किया गया और इस कमीशन को 6 और 7 मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए और 10 मई तक अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी है।
दोनों पक्षों में टकराव की नौबत क्यों
वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे तो आज होने जा रहा है लेकिन इनको लेकर मुस्लिम पक्षकार और संत समाज दोनों पक्षों में टकराव की नौबत आ गई है। वाराणसी (Varanasi) की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष की दलील है कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद बनाई गई है, इसलिए उन्हें श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा करने का हक मिलना चाहिए। वहीं मस्जिद प्रबंधन कमेटी इसके खिलाफ खड़ी है।
अंजुमन इंतजामियां मस्जिद के जॉइंट सेक्रेटी एस.एन. यासीन ने कहा कि जब कानून बना है कि इस दायरे के अंदर सिर्फ मुसलमान आ सकते हैं या सुरक्षाकर्मी तो क्या उस कानून को छोड़ दिया जाए। कानून के दायरे में रहकर किसी को अंदर आने नहीं दिया जाएगा।
मस्जिद कमेटी के मुताबिक अगर वीडियोग्राफी करवाई जाएगी तो मस्जिद में सुरक्षा से समझौता होगा और ऐसा वो होने नहीं देंगे जबकि संत समिति इसे जिद बताते हुए कह रही है कि वीडियोग्राफी का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मंदिर के स्पष्ट प्रमाण सामने आ जाएंगे।
(जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुंह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रू-ब-रू कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं।
हमारे द्वारा उद्घाटित रिपोर्ट्स और कहानियां अक्सर बदलाव का सबब बनती रही है। साथ ही सरकार और सरकारी अधिकारियों को मजबूर करती रही हैं कि वे नागरिकों को उन सभी चीजों और सेवाओं को मुहैया करवाएं जिनकी उन्हें दरकार है।
लाजिमी है कि इस तरह की जन-पत्रकारिता को जारी रखने के लिए हमें लगातार आपके मूल्यवान समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है। सहयोग राशि के रूप में आपके द्वारा बढ़ाया गया हर हाथ जनज्वार को अधिक साहस और वित्तीय सामर्थ्य देगा जिसका सीधा परिणाम यह होगा कि आपकी और आपके आस-पास रहने वाले लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाली हर खबर और रिपोर्ट को सामने लाने में जनज्वार कभी पीछे नहीं रहेगा, इसलिए आगे आयें और जनज्वार को आर्थिक सहयोग दें।)