अफगानिस्तान : पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी को बड़ा झटका, भाई हशमत गनी ने तालिबान का किया समर्थन

हशमत गनी अहमदजई की तालिबानी नेताओं से मुलाकात की तस्वीर भी सामने आयी है। हशमत गनी अहमदजई ने कथित तौर पर तालिबान को समर्थन देने की घोषणा की है.....

Update: 2021-08-21 11:53 GMT

जनज्वार। अफगानिस्तान राजधानी काबुल पर तालिबानी कब्जे के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया था। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात ने मानवीयता के आधार पर शरण दी है। वहीं इस बीच अशरफ गनी को बड़े झटके की खबर हैं। दरअसल अशरफ गनी के भाई हशमत गनी अहमदजई कथित तौर पर अब तालिबान के साथ जुड़ गए हैं। हशमत गनी ने तालिबान को हर संभव मदद करने का भरोसा दिया है।

हशमत गनी अहमदजई की तालिबानी नेताओं से मुलाकात की तस्वीर भी सामने आयी है। हशमत गनी अहमदजई ने कथित तौर पर तालिबान को समर्थन देने की घोषणा की है। हशमत गनी अहमदजई कुचिस की ग्रैंड काउंसिल के प्रमुख भी है। उन्होंने तालिबानी नेता खलील-उर-रहमान और मुफ्ती महमूद जाकिर की मौजूदगी में तालिबान के समर्थन की घोषणा की है।

बता दें कि इससे पहले अफगानिस्तान ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा था कि उन्हें इच्छा के खिलाफ देश से बेदखल किया गया। भगोड़ा कहने वालों को उनके बारे में जानकारी नहीं है। गनी ने कहा था कि सुरक्षा वजहों से मैं अफगानिस्तान से बाहर हूं। अगर मैं काबुल में रहता तो रक्तपात हो जाता। किसी अनहोनी से बचने के लिए मैंने देश छोड़ा है।

ऐसे समय में जब तालिाबान अपनी सरकार बनाने की तैयारी कर रहा है, अशरफ गनी के भाई का तालिबान के साथ हाथ मिलाना उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बता दें कि तालिबान के कब्जे के बाद से ही देश में लोग तालिबानी आतंकियों के डर से देश छोड़ने के लिए एयरपोर्ट तक पहुंच रहे हैं। कई लोग तो बिना वीजा के ही इस उम्मीद में एयरपोर्ट तक पहुंच रहे हैं कि वह किसी तरह से देश छोड़ सकें। 

इस बीच शनिवार को खबर सामने आयी की काबुल एयरपोर्ट से 150 से लोगों को तालिबान ने अगवा कर लिया है और इनमें अधिकांश भारतीय हैं जिन्हें तालिबानी अपने साथ ले गए हैं। हालांकि कुछ खबरें ऐसी भी हैं कि तालिबानी लड़ाके काबुल एयरपोर्ट से इन भारतीयों से किसी अज्ञात स्थान पूछताछ करने के लिए ले गए। इससे पहले एक सेना का विमान अस्सी अन्य भारतीयों को तजाकिस्तान लेकर पहुंचा। हालांकि तालिबान ने इस बात से इनकार किया है कि भारतीय नागरिकों का अपहरण किया गया है।

बता दें कि अशरफ गनी जब देश छोड़कर भागे थे तब मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा था कि वह अपनी चार कारों और एक हेलीकॉप्टर में धन भरकर विदेश भागे हैं। हालांकि गनी ने देश के नाम संदेश में इसे बकवास करार दिया है और कहा कि वह जूते तक नहीं बदल पाए थे और सैंडल में ही रविवार 15 अगस्त की रात को राष्ट्रपति भवन से निकले। अशरफ गनी ने यह भी कहा कि अगर मैं वहीं रहता तो एक बार फिर अफगानिस्तान के चुने हुए राष्ट्रपति को अफगान नागिरकों के सामने फांसी पर लटका दिया जाता। बता दें कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्ला का शव 27 सितंबर 1996 को काबुल में एक खंभे से लटका मिला था।

अशरफ गनी ने तालिबान पर दोहा समझौता तोड़ने का भी आरोप लगाया और कहा कि तालिबान ने काबुल में न घुसने का समझौता किया था। उन्होने कहा कि वह सत्ता शांतिपूर्ण तरीके से हस्तांतरण चाहते थे लेकिन उन्हें निकाल दिया गया। 

 

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