लालू ने रघुवंश को लिखी इमोशनल चिट्ठी, कहा-आप पारिवारिक सदस्य जैसे और आप कहीं नहीं जा रहे

इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा है 'प्रिय रघुवंश बाबू, आपके द्वारा कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है, मुझे तो विश्वास नहीं होता। अभी मैं और राजद परिवार भी आपको स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है....

Update: 2020-09-10 15:15 GMT

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने 'ब्रह्म बाबा' रघुवंश प्रसाद सिंह को मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। लालू प्रसाद ने एक चिट्ठी लिखी है और कहा है कि आप हमारे 40 वर्ष पुराने साथी और पारिवारिक सदस्य की तरह हैं और आप कहीं नहीं जा रहे।

रघुवंश प्रसाद को संबोधित इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा है 'प्रिय रघुवंश बाबू, आपके द्वारा कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है। मुझे तो विश्वास नहीं होता। अभी मैं और राजद परिवार भी आपको स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है।'

इस चिट्ठी में लालू प्रसाद यादव ने रघुवंश सिंह के साथ अपने पुराने संबन्ध और पारिवारिक रिश्तों की भी चर्चा की है। उन्होंने लिखा है 'चार दशकों में हमने हर राजनीतिक, सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक बातों पर भी मिल-बैठकर विचार किया है। आप जल्द स्वस्थ हों, फिर बैठकर बात करेंगे। आप कहीं नहीं जा रहे हैं। समझ लीजिए।'



 उल्लेखनीय है कि आज ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने राजद छोड़ने की घोषणा की थी। इससे पहले उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। आज नई दिल्ली के एम्स अस्पताल से ही उन्होंने हस्तलिखित पत्र द्वारा लालू प्रसाद को इस्तीफा भेजा था।

लालू प्रसाद को भेजे अपने संक्षिप्त हस्तलिखित इस्तीफे में उन्होंने लालू प्रसाद के साथ 32 वर्षों तक खड़े रहने की चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था 'जननायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद आपके पीठ पीछे 32 वर्षों तक खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी नेता, कार्यकर्ता तथा आमजन ने मुझे बड़ा स्नेह दिया, मुझे क्षमा करें।'

रघुवंश प्रसाद वैशाली संसदीय क्षेत्र में अपने चिरप्रतिद्वंद्वी रामा सिंह की पार्टी में इंट्री की खबर से नाराज चल रहे थे। पिछले कुछ दिनों से रामा सिंह के राजद में शामिल होने की खबरें आ रहीं थीं। राम किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह वैशाली लोकसभा क्षेत्र में रघुवंश सिंह के पुराने प्रतिद्वंद्वी हैं और साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने रघुवंश सिंह को 1 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से पराजित किया था।

वैसे रघुवंश सिंह केंद्रीय मंत्री सहित कई बड़े पदों पर रह चुके हैं और निर्वविवाद और साफ-सुथरी छवि के नेता माने जाते हैं, जो बिहार की राजनीति में कम ही देखने को मिलती है।

हालांकि इसकी पटकथा कुछ दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी, जब वे कोरोना से संक्रमित होकर पटना एम्स में भर्ती थे और वहीं से पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे दिया था। कहा जाता है कि जब जगदानन्द सिंह को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी, तभी से वे कुछ नाराज चल रहे थे और उसके बाद से उन्होंने पटना के पार्टी दफ्तर जाना छोड़ दिया था।

उसके बाद से मीटिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि भी वे पटना स्थित अपने आवास से ही करते थे। कहा जा रहा है कि रामा सिंह की एंट्री की खबरों ने इसमें आग में घी का काम कर दिया।

वैसे उनको मनाने की कोशिश भी कम नहीं हुई। चर्चा थी कि तेजस्वी यादव ने पिछले दिनों दिल्ली एम्स जाकर उनसे मुलाकात की थी, पर वे नहीं माने। लालू प्रसाद के स्तर से भी उनको मनाने की कोशिश हुई, पर वे नहीं माने थे।

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