पुरोला में नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाने के आरोपी हिंदू और मुस्लिम दोनों, मगर धामी राज में पहाड़ से मुस्लिमों को खदेड़ने की मुहिम शुरू

Uttarkashi news : आरोपियों का किसी तरह का बचाव न किए जाने के बावजूद निरंतर उग्र माहौल बनाए रखना और इसके लिए विभिन्न बाज़ारों को बंद रखना एक सुनियोजित कार्यवाही प्रतीत होती है, जिसके निशाने पर अल्पसंख्यक समाज के वे लोग हैं, जिनका कोई अपराध नहीं है....

Update: 2023-06-09 17:02 GMT

Uttarkashi news : उत्तरकाशी के पुरोला में कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसकी शादी कराने की साजिश में एक हिंदू युवक के साथ मुस्लिम लड़के के शामिल होने की घटना के बाद मुस्लिमों के खिलाफ पूरा उत्तराखण्ड एकजुट हो गया है और मुस्लिममुक्त उत्तराखण्ड की मुहिम तेज हो गयी है। लैंड जिहाद वाले मुख्यमंत्री धामी के शासन में दक्षिणपंथी संगठनों की शह पर इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में मुस्लिमों के खिलाफ जगह जगह लोगों का गुस्सा फूट रहा है, मुस्लिम दुकानदार प्रदेश छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

इस घटना के बाद निर्दोष अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए तत्काल ठोस उपाय किए जाने, किसी को भी भीड़ हिंसा और नफरत फैलाने की अनुमति न दिये जाने व उच्चतम न्यायालय द्वारा भीड़ हिंसा रोकने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त करने आदि मांगों को लेकर रामनगर एसडीएम के माध्यम से विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज 9 जून को राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया है।

ज्ञापन में पुरोला के घटनाक्रम चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि पुरोला में दो व्यक्तियों पर नाबालिग को भगाकर ले जाने का आरोप है। आरोपियों में एक मुस्लिम और एक हिंदू हैं। दोनों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों को मौका मिल गया कि वे खुलकर उन्माद फैलाने की राजनीति कर रहे हैं। घटना और उसमें कार्यवाही हुए आधा महीना हो चुका है, लेकिन उसके बावजूद पुरोला और पूरी यमुना घाटी में तनाव का माहौल बनाए रखने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

आरोपियों का किसी तरह का बचाव न किए जाने के बावजूद निरंतर उग्र माहौल बनाए रखना और इसके लिए विभिन्न बाज़ारों को बंद रखना एक सुनियोजित कार्यवाही प्रतीत होती है, जिसके निशाने पर अल्पसंख्यक समाज के वे लोग हैं, जिनका कोई अपराध नहीं है। सभी अल्पसंख्यकों की दुकानों पर दुकान खाली करने का पोस्टर चस्पां करना असंवैधानिक, गैरकानूनी और आपराधिक कृत्य है। इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।

ज्ञापन प्रेषित करने वालों में समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, मनमोहन अग्रवाल किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, सोवन सिंह तड़ियाल, महिला एकता मंच की कौशल्या चुनियाल व खुर्शीद आलम आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।

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