नाबालिग दलित बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या के 12 दिन बाद भी दिल्ली पुलिस ने दर्ज नहीं की FIR, परिजनों ने लगाया पिटाई का आरोप

पीड़िता के परिजनों का कहना है कि हम अपनी बच्ची की लाश न देख पायें, उसके शरीर के जख्मों को न देख पायें, इसलिए पुलिस ने हमें गिरफ्तार करके लॉकअप में डाल दिया....

Update: 2020-10-16 10:40 GMT

मॉडल टाउस इलाके के गुड़मंडी में रेप के बाद मार दी गयी दलित नाबालिग पीड़िता की मां, बेटी के लिए मांग रही इंसाफ

दिल्ली, जनज्वार। दिल्ली के दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर क्षेत्र में आने वाले गुड़ मंडी क्षेत्र में एक नाबालिग दलित लड़की के साथ गैंगरेप की जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता का मॉडल टाउन में मकान मालकिन के बेटे और उसके ड्राइवर द्वारा 4 अक्टूबर को बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। जानकारी के ​मुताबिक पीड़िता पिछले 10 दिनों से वहां काम कर रही थी।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक जिस दिन 4 अक्टूबर को उसके साथ गैंगरेप के बाद हत्या की वारदात सामने आयी, वह अपनी मौसी को फोन पर कुछ बताना चाहती थी, लेकिन मकान मालकिन की मौजूदगी के कारण वह नहीं बता पायी। उसी दिन बाद में गैंगरेप के बाद हत्या की घटना सामने आयी तो मकान मालकिन की बेटी खुद पीड़िता की मौसी को अपनी मां के घर ले गई, जहां पुलिस बल मौजूद था। पुलिस से कहासुनी के बाद पीड़िता की मौसी को उसे देखने की अनुमति दी गयी, मगर तब तक मर चुकी थी। पीड़िता का शव ड्राईवर के कमरे में लटकता हुआ बरामद किया गया ​था।

पुलिस ने घटनास्थल से शव को कब्जे में ले लिया। इस मामले में आरोपियों को बचाने में पुलिस की मिलीभगत भी सामने आ रही है। पीड़िता के परिजनों का कहना है कि हम अपनी बच्ची की लाश न देख पायें, उसके शरीर के जख्मों को न देख पायें, इसलिए पुलिस ने हमें गिरफ्तार करके लॉकअप में डाल दिया। अपनी बच्ची को देखने के लिए हम मकान मालकिन के घर गए, जहां से ना केवल पुलिस ने हमारे 12 लोगों को गिरफ्तार किया, बल्कि बेरहमी से पीटा भी। गिरफ्तार की गई महिलाओं से पुरुष पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। हमें जबरन लॉकअप में बंद करके रखा गया।

घटना के अगले दिन पुलिस दलित बच्ची की लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए ले गई, जिसकी अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आयी है। परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद उसी दिन शाम तक पुलिस परिवार के कुछ सदस्यों को जबरन अपने साथ ले गयी और पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पीड़िता के परिवार को उसकी लाश तक घर वापस लाने की अनुमति नहीं दी गयी। यहां तक कि पुलिस ने परिवार को पीड़िता के पूरे शव को देखने तक की अनुमति तक नहीं दी।

नाबालिग दलित बच्ची के परिजनों का आरोप बेटी के बलात्कार के बाद कर दी गयी हत्या

इस मामले में अब तक मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन द्वारा कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पीड़िता के परिजनों का कहना है कि पुलिस आपराधिक आरोपों की धमकी देकर हमको परेशान कर रही है। इस घटना को कवर करने पहुंची मीडिया भी पुलिस अधिकारियों के दबाव के कारण चुप्पी साधे हुए है।

जब पीड़िता के परिवार ने डीसीपी कार्यालय, अशोक विहार से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्हें बताया गया कि, "हम सबकुछ जानते हैं और यहां तक कि हमें पल पल की खबर मिलती हैं, लेकिन फिर भी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया।

एक तरफ जहां हाथरस में दलित लड़की के बलात्कार की घटना में पूरी व्यवस्था का चरित्र सबके सामने खुलकर आया है, वहीं दलित लड़की के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित और विश्वविख्यात शिक्षा संस्थान के पास बिल्कुल वैसी ही घटना का होना और भी भयंकर है।

भगत सिंह छात्र एकता मंच के साथ मिलकर डीयू के छात्र और स्थानीय लोग इस मामले को उठा रहे हैं और अपील कर रहे हैं कि बलात्कार पीड़ित परिवार और इलाके के लोगों के साथ एकता बनाते हुए इंसाफ के लिए खड़े होना होगा।

इस घटना के बाद सवाल उठने शुरू हो गये हैं कि मीडिया हाइलाइट किये गये कुछ मामलों पर ही मोमबत्ती जलाकर अपनी असंवेदशीलता को छुपाते रहेगा? बलात्कार जैसी घटना दलित, मुस्लिम, आदिवासी, मज़दूर महिला के साथ अगर सवर्णों द्वारा की जाती है तो राज्य की पूरी मशीनरी दोषी को बचाने में लग जाती है।

कठुआ, उन्नाव, हाथरस की जघन्य घटनाओं में सरकार, मंत्री, पुलिस और तमाम मीडिया व व्यवस्था बलात्कारियों के पक्ष में डटकर खड़ी नजर आयी। ना जाने ऐसी कितनी घटनाएं हैं जो सामने आने से पहले ही दबा दी जाती हैं। अभी हाल ही में सोनीपत (हरियाणा) में एक लड़के का फर्जी इनकाउंटर किया गया और 2 महिलाओं का पुलिस थाने में 11 पुलिस कर्मियों द्वारा वहशियाना तरीके से बलात्कार किया गया, लड़की के गुप्तांग में कांच की बोतल और लाठी तक डाली गई, जिसमें उल्टा दोनों लड़कियों को ही कत्ल केस में फसा कर जेल भेज दिया गया है, अभी तक वो जेल में हैं।

अब डीयू परिसर के पास स्थित गुड़ मंडी की पीड़ित बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या पर पुलिस द्वारा अभी तक FIR तक दर्ज नहीं की गई है। उल्टा लड़की के परिवार को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। 8 महिला और 4 पुरुषों को बुरी तरह से पीटा गया। परिजन कहते हैं, हमें पुलिस ने इसलिए बुरी तरह से पीटा और लॉकअप में बंद किया क्योंकि हम अपनी बच्ची की लाश मांग रहे थे, उसका पूरा शरीर देखना चाहते थे।

इस घटना के विरोध में भगत सिंह छात्र एकता मंच की अगुवाई में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आज 16 अक्टूबर को मॉडल टाऊन थाना पहुंचकर पीड़िता के परिवार के साथ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान मांग उठी कि जब तक कि पुलिस दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं करती, तब तक यह विरोध जारी रहेगा।

पीड़िता का परिवार मांग कर रहा है कि दोषियों के खिलाफ तुरंत बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उचित कदम उठाए जाएं। लड़की की लाश को जबरन जलाने के दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए। लड़की के परिवार के 12 सदस्यों (8 महिला,4 पुरुष) को थाने के अंदर 8 घंटे तक पीटने और लगातार प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। 

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