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शिक्षा

यूपी में अराजकता, हिंसा और गुंडागर्दी से पूरा शैक्षणिक माहौल खराब

Prema Negi
4 March 2019 3:57 AM GMT
यूपी में अराजकता, हिंसा और गुंडागर्दी से पूरा शैक्षणिक माहौल खराब

हाईकोर्ट ने दिया निर्देश राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बनाने के लिए कानून बनाए सरकार, किसी भी राजनीतिक दल के बैनर के अंतर्गत परिसर में प्रवेश की नहीं दी जाए अनुमति

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले सरकारी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य संस्थाओं में कुछ छात्रों की अराजकता, हिंसा और गुंडागर्दी से पूरा शैक्षणिक माहौल खराब होने पर गंभीर नाराजगी जताई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को 6 माह में कानून बनाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों की गरिमा को बचाने व वहां पढ़ाई का माहौल दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं। बीते वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय में 4 जुलाई को हुई गुंडागर्दी इसकी बानगी है। कोर्ट ने तब तक सुनवाई के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से आए सुझावों के अनुरूप दिशा निर्देश भी जारी किये हैं और उन पर अमल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस राजेश सिंह चौहान की पीठ ने लखनऊ विश्वविद्यालय में 4 जुलाई 2018 को हुई गुंडागर्दी के बाद घटना का स्वतः संज्ञान लेकर योजित की गई जनहित याचिका संख्या-19390/2018 को निस्तारित करते हुए पारित किया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन को निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों को अध्ययन के अनुकूल एवं स्वतंत्र वातावरण मुहैया कराने के लिए किसी भी राजनीतिक दल के बैनर के अन्तर्गत परिसर में प्रवेश की अनुमति किसी छात्र तथा छात्रसमूह को बिल्कुल भी न दी जाए। अनाधिकृत धरना-प्रदर्शन धारा-144 के अन्तर्गत प्रतिबन्धित किए जाए।

विश्वविद्यालयों को अकादमिक/शान्ति क्षेत्र घोषित किए जाए। किसी के भी द्वारा व्यावधान उत्पन्न किए जाने की स्थिति में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश शासन राज्य विश्वविद्यालयों के कुलानुशासक को दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यपालक मजिस्टेट की शक्तियां स्थायी रूप से दे। अब तक यह शक्तियां कुलानुशासक को अस्थायी रूप से परीक्षा कार्य के संचालन के दौरान ही सीमित अवधि के लिए उपलब्ध होती है।

पीठ ने उत्तर प्रदेश शासन/जिला प्रशासन स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही के सम्बंध में निर्देश दिया है कि राज्य स्तर पर गठित समन्वय समिति की नियमित बैठक सुनिश्चित किया जाए, जिससे विश्वविद्यालयों के सुरक्षा मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित हो सके। छात्रों द्वारा किए जाने वाले धरना-प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय/जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक बनायी जाए तथा ऐसे धरना-प्रदर्शन जिला प्रशासन द्वारा यथा चिन्हित स्थानों पर ही किए जाएं।

विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन प्रतिबंधित किया जाए। बाहरी और निष्कासित छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में अनधिकृत प्रवेश को आपराधिक/अतिचार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम / गुंडा अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाय। जिला प्रशासन, विश्वविद्यालय प्रशासन के समन्वय से परिसर का सिक्योरिटी आडिट कर सुरक्षा मानकनिर्धारित करें.धारा-144 का प्रारूप पुलिस प्रशासन द्वारा तैयार किया जाए तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से विचार विमर्श कर लागू किए जाने के सन्दर्भ में दिशा-निर्देश निर्धारित किए जाए।

पीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही के सम्बंध में कहा है कि कुलानुशासन अपनी टीम के साथ समय-समय पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागों में भ्रमण कर सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम करें तथा औचक निरीक्षण कर विश्वविद्यालय परिसर में शान्ति व्यवस्था स्थापित करें। विभागवार सम्बन्धित विभागाध्यक्षों के समन्वय से प्राक्टोरियल टीम के प्रत्येक सदस्यों को आवंटित प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी तय की जाए।

विश्वविद्यालय में ऐसी घटनाओं को नियन्त्रित करने के सम्बन्ध में मूलभूत सुरक्षा मानक निर्धारित किए जाए। साथ ही साथ छात्र-छात्राओं, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों के प्रवेश के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश एवं मानक तैयार किए जाए।

पीठ ने कहा है कि छात्र-छात्राओं एवं अन्य कर्मचारियों के शिकायतों का तात्कालिक निवारण किए जाने हेतु शिकायत निवारण प्रणाली लागू किया जाय। विश्वविद्यालय द्वारा आन्तरिक सुरक्षा व्यवस्था के समस्त मानकों का निर्धारण पुलिस प्रशासन के साथ सिक्योरिटी आडिट कराकर किए जाए। विश्वविद्यालय के केन्द्रीय मेस एवं अन्य मेस जो विश्वविद्यालय में संचालित है, के सफल संचालन हेतु एक समिति का गठन किया जाए जिससे छात्रावासों में होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं का समय रहते उचित समाधान किया जा सके।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय के कुलानुशासक विश्वविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रोटोकाल बनाए तथा उनका अनुपालन सुनिश्चित करें। शिकायत निवारण तंत्र को छात्रों और कर्मचारियों की शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए बाध्यकारी बनाया जाय।

सरकार उच्च शिक्षा के लिए भारी भरकम बजट आवंटित करती है, लेकिन उच्च शैक्षिक संस्थानों में माहौल अच्छा न होने के कारण मेरिटोरियस छात्र इन संस्थानों की ओर आकर्षित नहीं होते और निजी संस्थानों में प्रवेश ले लेते हैं, इसलिए पीठ की चिंता थी कि इस संस्थानों में पढ़ाई का माहौल बने, न कि ये मात्र कुछ छात्रों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का अड्डा मात्र बनकर रह जाएं।

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