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एससी/एसटी और ओबीसी के सांसद सदन में उठाएं UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग, शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ़ पूर्व छात्र नेताओं ने कसी कमर

Janjwar Desk
7 March 2026 2:34 PM IST
एससी/एसटी और ओबीसी के सांसद सदन में उठाएं UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग, शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेदभाव के खिलाफ़ पूर्व छात्र नेताओं ने कसी कमर
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देश का सबसे कमजोर तबका अपने बच्चों को विश्वविद्यालय पढ़ने के लिए भेजता है और अगर वहां उसे मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है तो समाज चुप नहीं रहेगा। जाति जनगणना की घोषणा के बाद अभी जारी जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है...

सरायमीर, आजमगढ़। शैक्षणिक संस्थानों में जातीय भेद-भाव के खिलाफ़ सशक्त यूजीसी रेगुलेशन को लेकर पूर्व छात्र नेताओं ने शालीमार रेस्टोरेंट, सरायमीर आजमगढ़ में पत्रकार वार्ता की। पूर्व छात्र नेताओं ने यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने की मांग को आगामी संसद सत्र में धर्मेंद्र यादव से उठाने की मांग की। पत्रकार वार्ता को जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के कलीम ज़माई, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजीव यादव, बीएचयू के वीरेंद्र यादव, यूपी कॉलेज के डॉक्टर राजेंद्र यादव और सत्यम प्रजापति पूर्व छात्र नेताओं ने सम्बोधित किया।

पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने के लिए आजमगढ़ समेत प्रदेश और देश में छात्र-युवा सड़कों पर है। आजमगढ़ सामाजिक न्याय की धरती है। राम बचन यादव, चंद्रजीत यादव, रामधन राम, राम नरेश यादव, मौलवी मसूद खान, राम कृष्ण यादव ने हर दौर में वंचितों की आवाज़ बुलंद की। विश्वविद्यालयों में जातीय भेद-भाव को जब यूजीसी ने माना है तब हम इलाहाबाद विश्विद्यालय के छात्र रहे आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव से मांग करते हैं कि आगामी संसद सत्र के दौरान वह यूजीसी के समर्थन में संसद में आवाज उठाएं। सामाजिक न्याय के सवालों को संसद में धर्मेंद्र यादव उठाते रहे हैं, पर यूजीसी के मुद्दे पर उनकी और समाजवादी पार्टी की चुप्पी पीडीए की अवधारणा पर सवाल है।

यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ सदन में आवाज उठाएं। इंडिया गठबंधन को भी यूजीसी के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ेगी। यूजीसी के मुद्दे पर राजनीतिक दल अगर इस मुगालते हैं कि वे नहीं बोलेंगे और इस बात को एससी/एसटी और ओबीसी नहीं समझेगा तो उनको यह भ्रम दूर कर लेना चाहिए। देश का सबसे कमजोर तबका अपने बच्चों को विश्वविद्यालय पढ़ने के लिए भेजता है और अगर वहां उसे मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है तो समाज चुप नहीं रहेगा। जाति जनगणना की घोषणा के बाद अभी जारी जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है, जाति जनगणना करवाने के लिए मजबूती से आवाज उठानी ही होगी।

विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के पूर्व छात्र नेताओं ने कहा कि आगामी सत्र में सदन में सवाल नहीं उठा तो सांसदों को घेरा जाएगा। एससी/एसटी और ओबीसी के सांसदों को इस बात को जान लेना चाहिए कि वे सदन में हमारे प्रतिनिधि हैं और हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़े सवाल पर अगर चुप रहे तो समाज उनको माफ नहीं करेगा। आगामी दिनों में यूजीसी रेगुलेशन लागू करने के लिए आंदोलन और तेज होगा।

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