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आंदोलन

अंतरराष्ट्रीय महिला ​दिवस स्त्रियों के शोषण, अत्याचार, पुरुष वर्चस्ववाद के तमाम रूपों से मुक्ति और जीवन के हर पहलू में पूर्ण समानता के लिए महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक !

Janjwar Desk
8 March 2026 5:21 PM IST
अंतरराष्ट्रीय महिला ​दिवस स्त्रियों के शोषण, अत्याचार, पुरुष वर्चस्ववाद के तमाम रूपों से मुक्ति और जीवन के हर पहलू में पूर्ण समानता के लिए महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक !
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Rupdrapur news : वर्तमान दौर में सामंती मूल्य-मान्यताओं, पूंजीवादी-साम्राज्यवादी लूट और फासीवादी हमले से एकसाथ निपटने की तैयारी ही महिला मुक्ति का रास्ता बनता है। महिला मुक्ति आन्दोलन को मेहनतकशों के मुक्ति आन्दोलन से जोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है...

रुद्रपुर। आज 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक महिला दिवस पर शहीद भगत सिंह पुस्तकालय में कार्यक्रम आयोजित हुआ। सेन्टर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (सीएसटीयू) द्वारा आयोजित चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि यह वह ऐतिहासिक दिन है जो स्त्रियों के शोषण, अत्याचार, पुरुष वर्चस्ववाद के तमाम रूपों से मुक्ति और जीवन के हर पहलू में पूर्ण समानता के लिए महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक है।

आधार वक्तव्य में बताया गया कि आज देश में पूँजीवाद और फ़ासीवादी शक्तियों के गठजोड़ द्वारा महिलाओं के लम्बे संघर्षों से हासिल अधिकारों को छीन लेने के साथ उनकी स्वतन्त्रता, सम्मान और सुरक्षा पर चौतरफा हमले और भी तेज़ हो गये हैं। ऑनर किलिंग और मज़दूर विरोधी श्रम कोड उसकी खुली मिसाल है।

वशिष्ट वक्ता शिक्षिका प्रीति मौर्य ने घर से लेकर समाज मे असमानताओं के विविध रूपों पर चर्चा की। उन्होंने आज समानता के हो रहे शोर पर चर्चा करते हुए सवाल पूछा कि क्या पिता किसी लड़की को वास्तविक संपत्ति का अधिकार देगा, अपने मनमुताबिक कैरियर चुनने का अधिकार देगा, अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार देगा? फिर बराबरी का मतलब क्या है?

वशिष्ट वक्ता प्राध्यापक कमला बिष्ट ने कहा कि जो क़ानून बराबरी की बात करता है, वह कहीं लागू नहीं है। असल में सामाजिक व मानसिक स्तर पर जब तक बराबरी नहीं मिलती तब तक बराबरी की बात बेईमानी है।

सावित्री देवी ने कहा कि वर्तमान दौर में सामंती मूल्य-मान्यताओं, पूंजीवादी-साम्राज्यवादी लूट और फासीवादी हमले से एकसाथ निपटने की तैयारी ही महिला मुक्ति का रास्ता बनता है। महिला मुक्ति आन्दोलन को मेहनतकशों के मुक्ति आन्दोलन से जोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है।

कार्यक्रम और चर्चा में मुकुल, धीरज जोशी, अंजार अहमद, विकल, हरपाल, लोकेश पाठक, अतुल त्रिपाठी, संदीप कुमार, विजय, देवेन्द्र, के एन झा, महेन्द्र सिंह, उमेश आदि ने भागीदारी की।

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