'योगीराज': 15 दिनों तक भूख से तड़पता रहा पूरा परिवार, कभी मां तो कभी बच्चे एक-दूसरे को चुप कराते रहे

गुड्डी देवी कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं, उसे क्या पता था कि ये लॉकडाउन उसके परिवार की जिंदगी की ही तालाबंदी कर देगी। नौकरी छूट गई, बेरोजगार हो गई...

Update: 2021-06-17 08:36 GMT

(पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्‌डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं, उसे क्या पता था कि ये लॉकडाउन उसके परिवार की जिंदगी की ही तालाबंदी कर देगी।)

जनज्वार डेस्क। कोरोना महामारी की पहली लहर में तो कई परिवारों को आर्थिक नुकसान हुआ ही था लेकिन दूसरी लहर के दौरान लगाए गए लॉकडाउन ने कई परिवारों को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा बार-बार कोरोना महामारी के दौरान बेहतरीन प्रबंधन की बात कहकर खुद की पीठ थपथपायी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

अलीगढ़ के नागला मंदिर क्षेत्र में एक छह सदस्यीय परिवार पंद्रह दिनों तक घर में भूख से तड़पता रहा है। घर में तीन साल पहले पिता की मौत हुई तो पूरा परिवार टूट गया। वहीं कोरोना महामारी के दौरान यह परिवार भी अपने ही घर बंद हो गया।

(घरों में बिखरे पड़े बर्तन बता रहे परिवार के लिए कैसे रहे मुश्किल भरे दिन)

पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्‌डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं, उसे क्या पता था कि ये लॉकडाउन उसके परिवार की जिंदगी की ही तालाबंदी कर देगी। नौकरी छूट गई, बेरोजगार हो गई, और दाने-दाने की मोहताज हो गई। अब घर में बर्तन तो थे लेकिन खाने को कुछ भी नहीं था।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा परिवार 15 दिन से घर में पानी के सहारे जिंदा था। रोटी का कोई इंतजाम नहीं। आसपास पड़ोस के लोगों से मदद के सहारे परिवार कुछ दिन चला, लेकिन रोज-रोज भीख मांगने से मां को शर्म भी आने लगी। इस पूरी दास्तां की कहानी का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू ये है कि सरकार के किसी विभाग ने इनकी कोई सुध नहीं ली।

गुड्‌डी के बच्चों ने दुख भरे दिनों के दर्द को अपने घर की दीवारों पर उकेर कर दर्द का इजहार किया। इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि पहले घर से महिला के रोने की और बच्चों की मां को दिलासा दिलाने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। बच्चे फिर भी भूख से लड़ रहे थे पर मां आखिर भूखे बच्चों के दर्द को कैसे सह पाती।

(भूख से बेहाल बच्चों ने घर की दीवारों पर चित्र बनाकर बयां किया अपना दर्द)

इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि घर से महिला के रोने के और बच्चों की मां को दिलासा देने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। जानकारी मिलने के बाद मौके पहुंचे अधिकारियों ने आनन फानन में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया।

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