लाडले के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई सवर्ण ससुरालियों द्वारा मौत के घाट उतारे गये दलित युवा जगदीश की अभागी मां, आनन-फानन में पुलिस पहरे में किया गया अंतिम संस्कार

Almora Kand : सौतेले पिता जोगा सिंह और सगे भाइयों ने वैसे तो गीता पर जुल्म ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब गीता ने इनके जुल्मों से निजात पाने के लिए एक होनहार दलित युवक जगदीश से विवाह कर लिया तो इनके भीतर छिपा बैठा जातीय शैतान जिंदा हो गया था...

Update: 2022-09-03 04:28 GMT

लाडले के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाई सवर्ण ससुरालियों द्वारा मौत के घाट उतारे गये दलित युवा जगदीश की अभागी मां, आनन-फानन में पुलिस पहरे में किया गया अंतिम संस्कार

ग्राउंड जीरो से सलीम मलिक की रिपोर्ट

Almora Kand :  जातीय कोढ़ से उबल रहे उत्तराखंड के दलित जगदीश को जीते जी चैन की जिंदगी नसीब हुई तो मरने के बाद उसकी लाश को भी कई दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। मौत के बाद जगदीश की मां सहित परिवार व समाज वाले उसके अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। हत्यारों ने उसका चेहरा हथौड़ा मार-मारकर इतना वीभत्स कर दिया था कि जगदीश के शव को पोस्टमार्टम हाउस से सामाजिक अंतिम क्रियाओं के लिए उसके घर न ले जाकर पुलिस के पहरे में सीधे श्मशान घाट ले जाया गया। शुक्रवार 2 सितंबर को संध्या के झुरमुट में पानी एक गधेरे के किनारे गांव के श्मशान पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के वक्त दो जिलों के तीन थानों की पुलिस और एसडीएम मौजूद रहे।

जगदीश के गांव अंबेडकर गांव पनवाद्योखन का मुख्य द्वार

इस वजह से जान गई थी जगदीश की

मालूम हो कि अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र के अंबेडकर गांव पनुवाद्योखन में रहने वाले जगदीश की बृहस्पतिवार को उसके सौतेले श्वसुर, सगे साले व सास ने अल्मोड़ा जिले के ही भिक्यासैंण इलाके से अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। जगदीश की हत्या की वजह एक सप्ताह पूर्व ही इस सवर्ण परिवार की ऐसी लड़की गीता उर्फ़ गुड्डी से शादी करना था जिसकी सगी मां भावना देवी अपने पति नंदन सिंह निवासी उपथरा गांव भिक्यासैंण द्वारा खुद को छोड़ने के बाद अपने दो पुत्रों ललित, कैलाश और पुत्री गीता के साथ इसी इलाके के सिनार गांव के जोगा सिंह नाम के सवर्ण आदमी के साथ रहने लगी थी।

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अल्मोड़ा के दलित युवा की सवर्ण लड़की से शादी के एक हफ्ते बाद ही ससुरालियों ने कर दी हत्या, नवविवाहिता ने पहले ही पुलिस अधीक्षक के पास जान बचाने की लगायी थी गुहार

शमशान घाट पर मौजूद लोग

सौतेले पिता जोगा सिंह और सगे भाइयों ने वैसे तो अपने लिए सौतेली पुत्री और बहन गीता पर जुल्म ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब गीता ने इनके जुल्मों से निजात पाने के लिए एक होनहार दलित युवक जगदीश से विवाह कर लिया तो इनके भीतर छिपा बैठा जातीय शैतान जिंदा हो गया था। सरेबाजार जगदीश का अपहरण कर उसे निर्दयता के साथ मौत के घाट उतारने वाले इन हत्यारों की मंशा अपनी सौतेली बेटी को भी मौत के घाट उतारने की थी। उसकी टोह में यह लोग अल्मोड़ा के एडवोकेट नारायण राम के घर का भी फेरा लगा चुके थे, लेकिन सौभाग्य से इस समय गीता पड़ोस के घर में थी, जिससे उसकी जान पर आया यह संकट वक्ती तौर पर टला हुआ महसूस किया जा रहा है।

पुलिस हिरासत में हत्यारोपी

जगदीश का कत्ल करने वाले इन हत्यारों को पुलिस ने उस समय पकड़ा जब जगदीश के अपहरण की खबर पर पुलिस गाड़ियों की ट्रेसिंग और चेकिंग में लगी थी। जगदीश को मौत के घाट उतारकर उसकी लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे इन लोगों को जगदीश की लहूलुहान लाश के साथ ही एक गाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया था।

मौके पर मौजूद पुलिस से हत्या का आक्रोश व्यक्त करते लोग 

अंतिम दर्शन भी न कर सकी जगदीश की बेबस मां

शुक्रवार को जगदीश के शव का पोस्टमार्टम रानीखेत अस्पताल में किया गया। शव देर से आने की स्थिति में गांव में जगदीश का अंतिम संस्कार शनिवार की सुबह किए जाने की बात हुई। लेकिन शव की स्थिति वाकई बेहद खराब थी या प्रशासन की इस ज्वलंत मामले के जल्द निपटारे की मंशा, जगदीश का अंतिम संस्कार शुक्रवार को ही करने का निर्णय ले लिया गया। इससे पहले की जगदीश का शव गांव आता, प्रशासन ने संभावित अनहोनी की आशंका के चलते एक बस पुलिस के जवान भेजकर रामनगर-रानीखेत रोड से जगदीश के गांव जाने मुख्य रास्ते के बाहर तैनात कर दिया।

जलती चिता की वीडियोग्राफी में मुस्तैद पुलिस

इसके बाद रानीखेत पोस्टमार्टम हाउस में पुलिस सुरक्षा और पुलिस वाहन के एस्कॉर्ट में जगदीश का वाहन में रखा शव गांव के मुख्य द्वार से होते हुए शव को सीधा गांव से बीस किमी. दूर (पैदल दूरी करीब चार किमी.) पानी के एक गधेरे स्थित शमशान घाट ले जाया गया। शव के साथ जगदीश के भाई और भतीजे रानीखेत से ही साथ में थे। घाट पर शव ले जाने की खबर मिलने पर ग्रामीण भी सीधे घाट पर पहुंच गए, जबकि घर पर मौजूद जगदीश की मां सहित अन्य परिजन शव के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके।

पुलिस एस्कॉर्ट में पोस्टमार्टम हाउस रानीखेत से गांव को पहरे में शव ले जाती पुलिस

श्मशान पर भी गुस्सा फूटा लोगों का

जगदीश की निर्मम हत्या के बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से घटा कि लोग इसकी गंभीरता को कुछ समझ ही नहीं पाए। शव गांव में जाकर हत्याकांड पर लोग कुछ चर्चा करते, इसकी नौबत पुलिस ने आने नहीं दी। लेकिन इसके बाद भी जब जगदीश की चिता सज गई तो कुछ युवाओं का आक्रोश मौके पर फट पड़ा। गुस्साए युवकों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दलितों की सुरक्षा में हीलाहवाली का इल्जाम लगाया। हालांकि लोगों के समझाने पर युवक शांत तो हुए, लेकिन उनका गुस्सा कम नहीं हुआ।

गांव को जाने वाले रास्ते पर पुलिस का पहरा 

पोस्टमार्टम में खामी की सूचना पर रुका रहा अंतिम संस्कार

घाट पर चिता सजाई जा चुकी थी। चिता में आग लगने ही वाली थी कि पता चला विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए जाने वाले मृतक शव के कुछ नमूने पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक द्वारा लिए ही नहीं गए हैं। इसलिए एक सर्जन डॉक्टर की इस प्रक्रिया के लिए श्मशान घाट ही आना पड़ेगा। इस प्रक्रिया के लिए रानीखेत से आने वाले डॉक्टर की प्रतिक्षा में शव घंटों तक चिता पर ही रखा रहा, लेकिन बाद में यह वांछित नमूने मोर्चरी से ही उपलब्ध होने की जानकारी मिलने के बाद जगदीश का विधिवत दाह संस्कार संपन्न किया गया।

चिता जलाने का विरोध करते शमशान घाट पर मौजूद लोग

पीसी ने जगदीश को इंसाफ दिलाने का लिया संकल्प

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने अपनी पार्टी से दो बार चुनाव लड़ चुके जगदीश की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके हत्यारों को उनके सही अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। पनुवाद्योखन गांव को शोकग्रस्त महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस घिनौनी जातिवादी हत्या के खिलाफ गांववालों को भी पूरी ताकत के साथ खड़ा होना। बाद में शमशान घाट पहुंचकर तिवारी ने जगदीश को श्रद्धांजलि देते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए कहा कि इस जघन्य हत्याकांड के आरोपियों के साथ कोई रियायत न हो।

एसडीएम से मुआवजे की बाबत बात करते उपपा नेता पीसी तिवारी व मुनीष कुमार

समाजवादी लोकमंच के मुनीष ने उठाया मुआवजे पर सवाल

जगदीश की हत्या के बाद उसके परिजनों को राज्य सरकार द्वारा किसी प्रकार का मुआवजा अथवा सरकारी नौकरी दिए जाने की घोषणा न किए जाने पर समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार ने इस मामले को मौके पर मौजूद सल्ट एसडीएम गौरव पाण्डे के सामने उठाया। मुनीष ने कहा कि राजस्थान में हुई हत्या के बाद वहां की कांग्रेस सरकार ने मृतक के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की थी, लेकिन उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए अभी तक किसी प्रकार के मुआवजे की घोषणा नहीं की है।

दलित युवा जगदीश की चिता न जलाने देने पर अडिग लोग 

उपपा ने मांगा एक करोड़ का मुआवजा

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने जगदीश की हौलनाक हत्या की निंदा करते हुए उसके हत्यारों को कड़ी सजा दिलाए जाने के साथ ही जगदीश के परिजनों को एक करोड़ रुपए मुआवजे व परिजन को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की है। शमशान घाट पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे उपपा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने कहा कि जगदीश की हत्या के खिलाफ पार्टी उनके परिजनों के साथ खड़ी है। पीड़ित परिवार को समुचित मुआवजा दिलाए जाने की लड़ाई सरकार से लड़ी जाएगी।

शमशान घाट पर मौजूद पुलिस वाहन 

ध्यानी ने रविवार 4 सितंबर को जगदीश को श्रद्धांजलि देने के लिए गांव में ही एक शोकसभा आयोजित करने का ऐलान करते हुए कहा कि हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पार्टी लगातार संघर्ष करेगी।

दलित युवा जगदीश का पुलिस के कड़े पहरे में किया गया अतिम संस्कार

केसर ने पुलिस कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

समाजवादी लोकमंच के सह संयोजक केसर राणा ने शुक्रवार को पुलिस द्वारा मुस्तैदी से मृतक का अंतिम संस्कार कराए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जितनी मुस्तैदी पुलिस जगदीश की हत्या के बाद लोगों के उपजे आक्रोश को शांत करवाने के नियत से जल्द से जल्द मृतक का अंतिम संस्कार करवाने की कोशिश कर रही है, उतनी मुस्तैदी उसने यदि जगदीश की पत्नी की शिकायत पर दिखाई होती तो जगदीश आज हमारे बीच जिंदा होता।

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