मंदी की मार झेल रही इंफोसिस 12 हजार कर्मचारियों को दिखायेगी बाहर का रास्ता

Update: 2019-11-07 08:19 GMT

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर बढ़कर पहुंच गई है 6.1 फीसदी, मोदी राज में देश में बेरोजगारी की दर 45 साल में सबसे भयानक स्तर पर पहुंच चुकी है...

जनज्वार,दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था में छा रही मंदी का असर चौतरफा छाया हुआ है। मारुति, टाटा मोटर्स, हीरो कॉर्प, अ​शोक लीलैंड समेत सभी आटो सेक्टर की तमाम कंपनियों पर भयानक मंदी के बाद जहां लाखों लोग बेरोजगार हुए, वहीं बिस्टिक कंपनी पारलेजी ने हजारों कर्मचारियों को बाहर का ​रास्ता दिखाया। अब इस मंदी की जद में देश की ख्यात आईटी कंपनी इंफोसिस भी आ गयी है। जल्द ही कंपनी से तकरीबन 12 हजार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा।

यह भी पढ़ें : अब मंदी का साया पारले बिस्किट कंपनी पर, जायेगी 10 हजार श्रमिकों की नौकरी

जिस तरह की खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक इंफोसिस ऐसे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखायेगी, जिनका वेतन ज्यादा है। गौरतलब है कि इससे पहले विश्व की ख्यात आईटी कंपनी कोग्निजेंट ने भी 13 हजार कर्मचारियों को बाहर करने की घोषणा की थी। कोग्निजेंट को भी ज्यादातर उन्हीं कर्मचारियों को बाहर किया गया था जो ज्यादा पे स्केल में आते हैं।

मेरिकी कंपनी कॉग्निजेंट आने वाली तिमाहियों में वरिष्ठ स्तर पर काम करने वाले लगभग सात हजार कर्मचारियों को और निकालेगी। कॉग्निजेंट मैनेजमेंट की तरफ से जारी बयान के मुताबिक कंपनी कंटेट ऑपरेशंस कारोबार को भी बंद कर रही है, जिससे छह हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे।

यह भी पढ़ें : 41 हजार होमगार्डों को बेरोजगार करने वाली योगी सरकार अयोध्या में दीपोत्सव पर खर्च करेगी 10 करोड़

मीडिया को इंफोसिस मैनेजमेंट ने बताया कि कम्पटीशन अधिक होने के कारण हमारे प्रबंधन ने कंपनी के रूल रेगुलेशन में कुछ बदलाव किये हैं। इसी बदलाव के तहत कंपनी को कम कर्मचारियों और बहुत ही मल्टी टास्किंग, और स्किलफुल लोगों की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : मोदी शासन में मंदी की खबरें विज्ञापन के बतौर छपवाने को मजबूर पूंजीपति!

गौरतलब है कि मंदी के दौर में जहां देश में लाखोंलाख लोग बेरोजगार हो रहे हैं या हो चुके हैं, वही दूसरी तरफ सरकारों की तरफ से तमाम दावों—वादों में किसी तरह की कमी नहीं आ रही। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर बढ़कर 6.1 फीसदी पहुंच गई है। यानी देश में बेरोजगारी की दर 45 साल में सबसे भयानक स्तर पर पहुंच चुकी है।

जिसे लीड खबर होना चाहिए था, वह कुछ यूं छपा है विज्ञापन के तौर पर

इंफोसिस में जेएल 6 बैंड में 2200 कर्मचारी हैं जोकि कुल कर्मचारियों का तकरीबन 10 फीसदी है। इस बैंड में ज्यादातर सीनियर लेवल के अधिकारी आते हैं। इसी तरह इंफोसिस में मीडियम लेवल यानी एल6, जेएल7 और जेएल8 बैंड में कुल 3092 लोग काम करते हैं।

यह भी पढ़ें : जोमैटो पर मंदी की मार, 541 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता

कंपनी सूत्रों के अनुसार ही मुताबिक कंपनी जेएल3, जेएल4 और जेएल5 बैंड में कार्यरत दो से पांच फीसदी कर्मचारियों को बाहर करेगी। इस हिसाब से देखें तो इन बैंडों में काम करने वाले चार हजार से लेकर के 10 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

यह भी पढ़ें : ऑटोमोबाइल कंपनियों को मंदी से उबारने का पीएम मोदी ने किया सराहनीय प्रयास, सभी कर रहे हैं उन्हें दोनों हाथों से सैल्यूट

इंफोसिस के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि इतनी बड़ी तादाद में यानी 12200 लोगों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखा रही है। पिछली दो तिमाही में भी कंपनी अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी है। टेक सर्विस में कार्यरत 18 फीसदी कर्मचारी खुद से और 19.4 फीसदी को कंपनी बाहर निकाल चुकी है।

यह भी पढ़ें : भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी मंदी की भयंकर चपेट में, लाखों मजदूर पहुंचे भुखमरी के कगार पर

मंदी का यह दौर न केवल सुरक्षा क्षेत्र में भी असर डाल चुका है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी मंदी के कारण अब तक 41 हजार होमगार्डों को नौकरी से बाहर करने का फरमान सुना चुकी है। विभाग में काम करने वाले 76 हजार 500 जवानों के मुकाबले अब सिर्फ 35 हजार होमगार्डों की नौकरी बची हैं।

जीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में नोटबदी के कारण 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गई थीं और तब से लेकर अब तक रोजगार के साधन बहुत कम हुए हैं और अब तक लाखोंलाख अन्य लोग नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं।

इंफोसिस से इतने बड़े पैमाने पर छंटनी को लेकर मजदूर नेता मुकूल कहते हैं, 'कंपनियां मंदी की मार झेल रही हैं, लेकिन इसे खुलकर नहीं बतातीं बल्कि घुमा—फिरा के जाहिर हैं। इस तरह की हालत केवल इंफोसिस में ही नहीं है, हर सेक्टर मंदी से जूझ रहा है। आटो सेक्टर कंपनियों ने तो एक झटके में 5 से 10 लाख कर्मचारियों को निकाल दिया है। सरकार की नीतियों के कारण कंपनियों को कम समय में ज्यादा काम चाहिए, इसीलिए कोई ना कोई बहाना देकर कंपनियों ने कर्मचारियों को कम करने का फैसला लिया है। ये आकड़ा अब लगातार बढ़ता जायेगा।'

Tags:    

Similar News