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अब मंदी का साया पारले बिस्किट कंपनी पर, जायेगी 10 हजार श्रमिकों की नौकरी

Prema Negi
21 Aug 2019 1:44 PM GMT
अब मंदी का साया पारले बिस्किट कंपनी पर, जायेगी 10 हजार श्रमिकों की नौकरी
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बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनी पारले प्रोडक्ट्स पर भी आर्थिक मंदी का प्रकोप, पारले कंपनी से जुड़े 8 से 10 हजार श्रमिकों की नौकरी पर मंडराने लगा है संकट...

मुकुल, वरिष्ठ मजदूर नेता

टोमोबाइल, खुदरा उत्पादन, हीरा व्यापार, गारमेंट सेक्टर में मंदी के बाद अब खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर भी मंदी का साया मंडराने लगा है।

बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनी पारले प्रोडक्ट्स पर भी आर्थिक मंदी का प्रकोप दिखने लगा है। ऐसे में पारले कंपनी से जुड़े 8 से 10 हजार श्रमिकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। कंपनी के अनुसार अगर आर्थिक हालातों पर भविष्य में बुरा प्रभाव पड़ता है तो उन्हें कड़े फैसले लेने होंगे।

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मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक पारले बिस्किट की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे बिस्किट कंपनियां स्लोडाउन की स्थिति में हैं। पारले प्रोडक्ट्स के कैटेगरी हेड मयंक शाह का कहना है, 'हमारी सरकार से मांग है कि 100 रुपये प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्किट पर जीएसटी घटा दिया जाये। ये बिस्किट आमतौर पर 5 रुपये या उससे भी कम के पैक में बिकते हैं। अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को न चाहते हुए भी निकालना पड़ेगा। सेल्स घटने से हमें भारी नुकसान हो रहा है।'

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गौरतलब है कि पिछले हफ्ते बिस्किट निर्माता ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण वैरी ने भी इसी तरह की बात कही थी और आर्थिक हालातों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि वर्तमान हालात में उपभोक्ता को 5 रुपये का बिस्कुट खरीदने में भी कई बार सोचना पड़ता है। नुस्ली वाडिया की कंपनी ब्रिटानिया का साल-दर-साल का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 3.5 पर्सेंट घटकर 249 करोड़ रुपये रहा गया है। कहा जा रहा है कि ब्रिटानिया में भी बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी की जायेगी।

पारले कंपनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट पारले जी, मोनेको और मैरी ब्रांड है। कंपनी की बिक्री 10,000 करोड़ से ज्यादा है। इसके सीधे तौर पर 10 प्लांट है जहां 1 लाख श्रमिक काम करते हैं। पारले के पास 125 थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है।

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मोदी सरकार द्वारा देशभर में जीएसटी लागू करने से पहले 100 रुपये प्रति किलो से कम कीमत वाले बिस्किट पर 12 पर्सेंट टैक्स लगाया जाता था। जीएसटी लागू करते समय कंपनियों को उम्मीद थी कि प्रीमियम बिस्किट के लिए 12 पर्सेंट और सस्ते बिस्किट के लिए 5 पर्सेंट का जीएसटी रेट मोदी सरकार द्वारा तय किया जायेगा, मगर सरकार ने दो साल पहले जब GST को लागू किया तो सभी बिस्किटों को 18 पर्सेंट के स्लैब में डाल दिया। जैसे ही जीएसटी बढ़ी, वैसे ही कंपनियों को भीह इनके दाम बढ़ाने पड़े, जिसका सीधा असर सेल्स पर पड़ा।

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जिस तरह से हर सेक्टर मंदी की गिरफ्त में आ रहा है और लाखों-लाख लोग बेरोजगार होने जा रहे हैं, उससे लग रहा है कि देश महामंदी की कगार पर पर न पहुंच जाये, क्योंकि मंदी की बयार अब आंधी का रूप लेती नज़र आ रही है।

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