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पूंजीपतियों को टैक्स में छूट और दूध, दही-खाद्यान्न पदार्थों पर GST लगा आम जनता के मुंह से निवाला छीन रही मोदी सरकार : किसान नेताओं का आरोप

Janjwar Desk
12 Sep 2022 6:07 PM GMT
पूंजीपतियों को टैक्स में छूट और दूध, दही-खाद्यान्न पदार्थों पर GST लगा आम जनता के मुंह से निवाला छीन रही मोदी सरकार :  किसान नेताओं का आरोप
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पूंजीपतियों को टैक्स में छूट और दूध, दही-खाद्यान्न पदार्थों पर जीएसटी लगाकर आम जनता के मुंह से निवाला छीन रही है मोदी सरकार : किसान नेताओं का आरोप

खाद बीज की कीमत बढ़ने से लागत बढ़ रही है और 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री जी के राज में हर आधे घंटे में एक किसान आत्महत्या कर रहा है....

Farmer live matter : मध्य प्रदेश किसान सभा के जिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान सभा के अखिल भारतीय संयुक्त सचिव संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड बादल सरोज ने कहा कि एक और जहां देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा, दूसरी ओर नरेंद्र मोदी सरकार ने दूध, दही और खाद्यान्न पदार्थों पर जीएसटी लगाकर आम जनता के मुंह से निवाला छीना है।

उन्होंने आगे कहा, मोदी सरकार ने यह 5 फीसदी जीएसटी तब लगाई है, जब कारपोरेट घरानों पर लगने वाले टेक्स को 30 फीसदी से घटाकर 28 फीसदी कर दिया गया है, जिससे साफ है कि यह सरकार गरीब जनता की नहीं चंद काॅरपोरेट घरानों की सरकार है।

सम्मेलन की अध्यक्षता संयुक्त रूप से हीरालाल चौधरी, शारदा बहन, कैलाश यादव ने की। इस सभा में गौरी शंकर शर्मा, जैक्सन लाल पारदी और अन्य दिवंगत साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष साथी रामनारायण कुंररिया ने किया।

अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के बाद भी केंद्र सरकार अपने वादों पर अमल नहीं कर रही है। न स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जा रहा है और न ही घोषित एमएसपी पर किसानों की फसल को खरीदा जा रहा है। खाद बीज की कीमत बढ़ने से लागत बढ़ रही है और 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री जी के राज में हर आधे घंटे में एक किसान आत्महत्या कर रहा है।

आदिवासी क्षेत्रों में वन भूमि से आदिवासियों और वनवासियों की बेदखल किया जा रहा है। औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों से जमीन छीनकर पूंजीपतियों और भू माफियाओं के हवाले किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में अरुण चौहान द्वारा एक रिपोर्ट रखी गयाी, जिस पर बहस में कन्हैया लाल भूरिया, काशीराम नायक, शंकरलाल मालवीय, केसर सिंह मालवीय, सुभाष कपूर, शारदा बाई, राकेश नायक और भरत सिंह ने भाग लिया। बहस के उपरांत रिपोर्ट सर्वसम्मति से मंजूर की गई। अंत में नई 21 सदस्यों की जिला कमेटी का गठन सर्वसम्मति से किया गया।

इसमें जिला अध्यक्ष हीरालाल चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष काशीराम नायक, चार उपाध्यक्ष कैलाश यादव, केसर सिंह मालवीय, चुन्नी बहन भूरिया, कन्हैया लाल भूरिया, जिला महामंत्री राजू जरिया, कार्यकारी महामंत्री मदनलाल वसुनिया, चार सह सचिव अर्जुन कोरी, राकेश निनामा, राधेश्याम डाबर, सुभाष कपूर और कोषाध्यक्ष निर्मला मालीवाल को बनाया गया।

23-25 सितंबर 2022 को ग्वालियर में होने वाले राज्य सम्मेलन के प्रतिनिधियों का चयन भी किया गया। आगामी 17 सितंबर को महू में आमसभा कर आदिवासियों पर और किसानों के साथ की जा रही जनजातियों के खिलाफ विरोध स्वरूप आम सभा का आयोजन किया जाएगा। अंत में अध्यक्ष मंडल के आभार प्रदर्शन के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।

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