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पारिवारिक कलह के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे की पोती डॉ. शीतल ने किया सुसाइड

Janjwar Desk
1 Dec 2020 7:44 AM GMT
पारिवारिक कलह के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे की पोती डॉ. शीतल ने किया सुसाइड
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पुलिस ने उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है जिनमें कहा गया था कि शीतल ने खुद को घातक खुराक का एक इंजेक्शन दिया था, उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए चंद्रपुर के वरोरा से पचास किलोमीटर दूर ले जाया गया.....

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी और सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय बाबा आम्टे की पोती और महारोगी सेवा समिति की सीईओ डॉ. शीतल आम्टे कराजगी ने महाराष्ट्र के वरोरा में कथित तौर पर खुदकुशी कर ली।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 39 वर्षीय शीतल ने महारोगी सेवा समिति के प्रबंधन को लेकर आम्टे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हुए विवाद के बाद यह आत्मघाती कदम उठाया है। महारोगी सेवा समिति को बाबा आम्टे के द्वारा एक सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया था। उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। बाबा आम्टे का वर्ष 2008 में निधन हो गया था।

पुलिस ने उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है जिनमें कहा गया था कि शीतल ने खुद को घातक खुराक का एक इंजेक्शन दिया था। उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए चंद्रपुर के वरोरा से पचास किलोमीटर दूर ले जाया गया। नागपुर से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम वारोरा गई है और आनंदवन में जिस कमरे में शीतल का शव मिला था उसे सील कर दिया गया था।

बाबा आमटे के पुत्रों विकास और प्रकाश और उनकी पत्नियों भारती और मंदाकिनी ने हाल ही में शीतल (विकास आमटे की बेटी) द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए कई आरोपों पर स्पष्टीकरण जारी किया था। वह समिति की सीईओ थीं।

बयान में उन्होंने कहा था, 'महारोगी सेवा समिति, वरोरा देश का एक प्रमुख सामाजिक सेवा संगठन है। इसने वंचितों के विकास के लिए दिशा और प्रेरणा प्रदान की। लाखों सामाजिक कार्यकर्ताओं को यहां प्रशिक्षित किया गया। आमेट की तीन पीढ़ियां इस काम में गहराई से शामिल हैं। शीतल गौतम करजगी, शीतल विकास आमटे ने हमारे संगठन में योगदान दिया है। हालांकि वह मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रही हैं।

'अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने महारोगी सेवा समिति के काम, ट्रस्टियों और श्रमिकों के बारे में अनुचित बयान दिए। उनकी सभी टिप्पणियां बेबुनियाद हैं। शीतल के आरोपों के कारण होने वाली किसी भी गलतफहमी को रोकने के लिए आमटे परिवार आपसी चर्चा के बाद यह बयान जारी कर रहा है।'

शीतल आम्टे पूरे आनंदवन की प्रभारी मंत्री थीं और वह बाबा आम्टे की तीसरी पीढ़ी का नेतृत्व कर रही थीं। वह विकास और भारती आम्टे की बेटी और राष्ट्रपिता गांधी के अनुयायी बाबा आम्टे की पोती हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र राज्य के आनंदवन में कुष्ठरोगियों के लिए एक पुनवार्स घर की स्थापना की थी। बाबा आमटे को उनके सामाजिक कार्यों के लिए भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण मिला था।

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