मध्य प्रदेश

शर्मनाकः MP के गुना में मनुवादियों की गुंडई, श्मशान घाट के प्लेटफॉर्म पर 1 दलित के शव का नहीं होने दिया अंतिम संस्कार

Janjwar Desk
1 May 2022 8:36 AM GMT
शर्मनाकः एमपी के गुना में मनुवादियों का राज, सवर्णों ने प्लेटफॉर्म पर नहीं होने दिया एक दलित के शव का दाह संस्कार
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शर्मनाकः एमपी के गुना में मनुवादियों का राज, सवर्णों ने प्लेटफॉर्म पर नहीं होने दिया एक दलित के शव का दाह संस्कार

Guna News : मनुवादियों ने एमपी के गुना के चांदपुरा गांव में एक दलित व्यक्ति का अंतिम संस्कर श्मशान घाट के प्लेफॉर्म पर नहीं होने दिया।

Guna News : देश की आजादी के 75 साल बाद भी करोड़ों लोगों के दिमाग में जातिवादी व्यवस्था ( Castiesm sysytem ) सिर चढ़कर बोल रहा है। ऐसा ही एक मामला रविवाद को मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh ) के गुना ( Guna ) से सामने आया है। मनुवादियों ने एमपी के गुना के चांदपुरा गांव ( Chandpura Village ) में एक दलित व्यक्ति का अंतिम संस्कार श्मशान घाट ( cremation ground ) के प्लेफॉर्म पर नहीं होने दिया। दलितों को मजबूरन मृतक के शव का दाह संस्कार ( Funeral ) जमीन पर ही करना पड़ा। इस घटना से साफ है कि हिंदू समाज में मर जाने के बाद भी इंसान की जाति नहीं बदलती। यह हाल उस समय है, जब तथाकथित मनुवादी लोग मॉडनिटी स्वांग रचते नहीं थकते।

ट्विटर यूजर राम सुब्रमण्यम ने लिखा है यह बहुत दुखद घटना है, लेकिन क्रिश्चियन जियान और मुसलमान भी जातिवादी व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। उनके पास विभिन्न संप्रदायों के लिए अलग-अलग कब्रिस्तान हैं। दलित और सिख भी ऐसा है। चांदपुरा गांव में स्थिति क्या है, इस बात को भी जानना जरूरी है।

टायर और डीजल से जलाना पड़ा था 1 महिला का शव

अगस्त 21, 2021 को भी मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh News ) के गुना (Guna News) से शर्मनाक मामला सामने आया था। उक्त मामले में आजादी के बाद से लेकर आज तक दलितों को श्मशान घाट तक मुहैया नहीं हुआ। उन्हें परिजनों की मौत के बाद खुद ही सारा इंतजाम करना होता है। ऐसा ही एक मामला गुना जिले के बांसाहैड़ा गांव से सामने आया था। इस मामले में 45 साल की एक महिला की मौत के बाद ग्रामीणों को न केवल चिता के लिए जरूरी चीजों, बल्कि टीन की चादरों से लेकर शेड तक की व्यवस्था खुद करनी पड़ी। महिला के शव को टायर और डीजल से जलाना पड़ा।

बता दें कि दलित बाहुल इलाका है। यहां दलित समुदाय के 1000 से अधिक परिवार निवास करते हैं। लोग कहते हैं कि बारिश में पंचायत की तरफ से भी कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई। इसके चलते डीजल और टायरों से चिता को जलाना पड़ा। य​ह स्थिति पूरी तरह से चिंतित करने वाली है। इंसान किसी भी जाति का क्यों न हो, निधन के बाद उकसी गरिमा का ख्याल सभी को रखना चाहिए।

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