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उत्तर प्रदेश

CM योगी आदित्यनाथ पर लगे गम्भीर मुकदमों से समझिए कि मुसलमानों पर क्या कहती है उनकी राय?

Janjwar Desk
13 Oct 2020 12:09 PM GMT
CM योगी आदित्यनाथ पर लगे गम्भीर मुकदमों से समझिए कि मुसलमानों पर क्या कहती है उनकी राय?
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योगी आदित्यनाथ के पूरे जीवन पर नजर डालें तो वह विवादों से ही भरा रहा है, योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पहला मामला साल 1999 में दर्ज हुआ था जो पंचरूखिया कांड में महाराजगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था....

मनीष दुबे की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ धाम से निकलकर सांसद फिर देश के बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बीच योगी आदित्यनाथ पर कई मुकदमें लगे हैं। 7 सितंबर 2008 को जेल भी काट आए है। यही मुकदमें यदि आम जनता पर लगे हों तो वह चुनाव तक लड़ सकने में अक्षम हो जाता है। आम जनता पर लगे मुकदमें में वह अपराधी कहलाता है और नेता का मुकदमा राजनैतिक दुर्भावना। योगी आदित्यनाथ को कट्टर हिंदूवादी छवि का नेता माना जाता है। तो कुछ कहते हैं कि मुसलमानो के प्रति उनका नजरिया पक्षपातपूर्ण रहता है।

दरअसल सोमवार 12 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता व समाजसेवी नूतन ठाकुर ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट के जरिए योगी आदित्यनाथ पर लगे मुकदमों में अनियमित हीलाहवाली पर सवाल किया था। उन्होने लिखा 'इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया द्वारा, एक आरटीआई में दी गयी सूचना के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लोकसभा और विधानसभा के विभिन्न शपथपत्र से सामने आता है कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने तक उनके खिलाफ हत्या सहित 2 मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगी जो कोर्ट में लंबित थी।'

नूतन ठाकुर ने आगे कहा 'जबकि कोतवाली गोरखपुर में आईपीसी की धारा 295 (उपासना स्थल नष्ट करना), 297 (अंत्येष्टि/कब्रिस्तान/मानव शव अपमान करना), 435 (अग्नि/विस्फोटक द्वारा कुचेष्टा) आदि व थाना इटवा, सिद्धार्थनगर में 188 आईपीसी (विधिक आदेशों का उल्लंघन) जैसे अत्यंत गम्भीर मामलों में पुलिस ने विवेचना के बाद उन पर लगाये गए आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजी थी, जो उस समय अलग-अलग कोर्ट में विचाराधीन थे।'

उत्तराखण्ड के पौढ़ी गढ़वाल स्थित यमकेश्वर तहसील के गाँव पंचुर के रहने वाले आनन्द सिंह बिष्ट को 5 जून 1972 को अजय सिंह बिष्ट की प्राप्ति हुई। अजय सिंह गढ़वाली क्षत्रीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं, पिता फॉरेस्ट रेंजर थे। जिनकी मृत्यु 20 अप्रैल 2020 को हुई थी। अजय सिंह ने 1987 में दसवीं, 1989 में इण्टरमीडिएट तथा 1992 में श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी किया। कोटद्वार में जहाँ रहते थे, चोरी हो गई जिसमें पढ़ाई के सारे दस्तावेज भी थे चोरी चले गए। जिसके चलते स्नातकोत्तर का प्रयास असफल हो गया।

अपनी माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़ी बहनों व एक बड़े भाई के बाद पांचवें नम्बर पर अजय कुमार बिष्ट थे। इनसे और दो छोटे भाई हैं। 1993 में गुरू गोरखनाथ पर शोध करने गोरखपुर आ गए। वहां चाचा महंत अवैद्यनाथ की शरण में चले गए। यहीं पर बाद में दीक्षा ले ली। 1994 में पूर्ण सन्यासी बन गए। और अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बन गए।

योगी आदित्यनाथ के पूरे जीवन पर नजर डालें तो वह विवादों से ही भरा रहा है। योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पहला मामला साल 1999 में दर्ज हुआ था। जो पंचरूखिया कांड में महाराजगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था। पंचरूखिया महाराजगंज जिले में भिटौली कस्बे के पास का एक गांव है, जहां कब्रिस्तान व तालाब की जमीन को लेकर हिंदू मुस्लिम में विवाद चल रहा था। इस विवाद में आदित्यनाथ ने तलत अजीज नाम के मुस्लिम पर जान से मारने की नियत से गोली चलाने का आरोप लगाया था। तब की कल्याण सिंह सरकार ने आनन-फानन सीबीसीआईडी को जाँच सौंप दी थी।

सीबीसीआईडी ने 27 जून 2000 को 16 महिने बाद अदालत में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी। जाँच में यह पता ही नहीं चला कि गोली चली तो कहां से। तलत अजीज ने आरोप लगाया था कि सीबीसीआईडी ने घटना की पूरी तरह से लीपापोती कर दी। आदित्यनाथ के खिलाफ दूसरा मामला 2007 में दर्ज हुआ। मसला था गोरखपुर में मुहर्रम जुलूस में शामिल हुए कुछ लोगों का झगड़ा। इस झगड़े में देशी कट्टे से चली गोली मुशीर और शानू नाम के दो मुस्लिम युवकों को लगी थी। गोली चलने के बाद राजकुमार अग्रहरि नाम के लड़के की पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इस हत्या में योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी ने आरोप लगाया कि मुसलमानो ने राजकुमार अग्रहरि की पीट-पीटकर हत्या की थी। आरोपों बयानो के बाद घटना के अगले ही दिन मुहल्ला इस्माईलपुर में जबरदस्त बवाल हुआ और एक मजार को आग के हवाले कर दिया गया। पथराव सहित हवाई फायरिंग भी हुई। राजकुमार अग्रहरि को न्याय दिलाने के लिए योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक सभा की। सभा के बीच ही मुस्लिमों की पाँच दुकाने फूँक दी गईं। इसके अगले ही दिन योगी कुशीनगर एक हिंदू रैली को सम्बोधित करने गए जहाँ से लौटते वक्त उन्हें गोरखपुर में ही गिरफ्तार कर लिया गया।

योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी के विरोध में आधे पूर्वांचल में तमाम हिंसक प्रदर्शन हुए। मुस्लिमों के घरों और दुकानो पर हमले किए गए। जिसपर हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2008 में मुकदमा लिखा गया। राज्य सरकार ने मामला फिर से सीबीसीाईडी को सौंप दिया। सीबीसीआईडी ने जाँच पूरी करके रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। जिसका फैसला अदालत ने सुरक्षित रखा हुआ है। साल 2008 में योगी आदित्यनाथ पर हेट स्पीच, हिंसा फैलाने सहित दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने के कई मुकदमें चल रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ साल 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन उनकी छवि एक कट्टर प्रशासक की रही है। कुछ कार्यकर्ता दबे स्वर इस बात को स्वीकारते भी हैं कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद एक खास समुदाय दहशत में है। दरअसल गोरखनाथ मंदिर न केवल हिंदुओ के एक वर्ग की आस्था का बड़ा मठ है बल्कि कट्टर हिंदूवादी सोंच के लोगों के लिए शक्ति के केन्द्र के तौर पर पहचाना जाता है। यहाँ के पूर्व प्रमुख महंतों ने इसी शक्ति के जरिए राजनितिक ताकतें भी हासिल की थीं। आदित्यनाथ से पहले उनके ही गुरू महंत अवैद्यनाथ तथा उनसे पहले दिग्विजय नाथ विधानसभा और लोकसभा पहुँचते रहे हैं।

पॉलिटिकल और आर्थिक ताकत के साथ योगी आदित्यनाथ को इस मठ की कट्टर हिंदूवादी छवि विरासत में मिली है। बाहर उनकी यह छवि भले ही कैसी भी रहती हो, भले ही उनपर मुस्लिम विरोधी अथवा ठाकुर प्रेमी नाम की उंगलिया उठती हों लेकिन गोरखपुर, खासकर उनके अपने इलाके के मुसलमान कहते हैं कि वह हमारे यहां कभी वोट मांगने तक नहीं आते। बावजूद इसके वो इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द का नमूने पेश करते रहते हैं।

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