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आंदोलन

गोरखालैण्ड की मांग को नेपाल में स​मर्थन

Janjwar Team
23 Jun 2017 3:49 PM GMT
गोरखालैण्ड की मांग को नेपाल में स​मर्थन
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गोरखा भारतीय सेना में आए दिन शहीद होकर भारत की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में गोरखाओं के खिलाफ प्रायोजित कुप्रचार बंद होना चाहिए...

जनज्वार, दिल्ली। दार्जिलिंग में पृथक गोरखालैण्ड की मांग को लेकर गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के अनिश्चितकालीन बंद का आज 11वां दिन है। क्षेत्र में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। सरकार ने इंटरनेट सेवाओं को स्थगित कर दिया है। दवा दुकानों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की दुकानें, होटल और रेस्त्रां भी बंद हैं। अब तक इस आंदोलन में मरने वालों की संख्या तीन पहुंच चुकी है।

गोरखालैण्ड आंदोलन की आंच अब नेपाल में भी महसूस होने लगी है। नेपाल के विभिन्न दलों और संगठनों ने गोरखा लोगों के आंदोलन को समर्थन की घोषणा की है। साथ ही भारत में प्रवासी नेपालियों के बीच काम करने वाले संगठनों भी गोरखाओं के आंदोलन पर अपना समर्थन जता रहे हैं।

प्रवासी नेपाली जन समाज भारत के अध्यक्ष आजाद सेन थापा ने एक विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार द्वारा आंदोलनकारियों के दमक की निंदा की है। गोरखा जनता पर जबरन बंगाली भाषा थोपे जाने का विरोध करते हुए थापा ने कहा है कि दार्जिलिंग में रहने वाले नेपाली भाषी लोग भारतीय नागरिक हैं और अपनी भाषायी पहचान और संस्कृति की रक्षा के लिए अलग राष्ट्र की मांग कर रहे है जो संविधान सम्मत है।

प्रवासी नेपालियों के एक दूसरे संगठन नेपाली एकता समाज भारत ने भी गोरखालैण्ड आंदोलन के प्रति अपने समर्थन की घोषणा की है। एकता समाज के अध्यक्ष आनंद थापा ने कहा है कि भाषा का अधिकारा नैसर्गिक है और दूसरी राष्ट्रीयताओं पर बलपूर्वक बहुसंख्यक समुदाय की भाषा और संस्कृति को थोपना लोकतंत्र की मान्यताओं के विपरीत बात है। आनंद थापा ने माग की है कि पश्चिम बंगाल को तुरत भाषा संबंधी अपने फैसले को वापस लेकर आंदोलनरत पक्ष के साथ वार्ता करनी चाहिए।

साथ ही आनंद थापा ने गोरखा जनता को आतंकवादी या उपद्रवी कह कर बदनाम करने को भी निंदनीय बताया और कहा गोरखा जनता ने पिछले 200 सालों से अपनी जान देकर इस देश की सीमाओं की रक्षा की है। आज भी दर्जिंलिंग, धर्मशाला, असम और अन्य स्थानों में रहने वाले गोरखा भारतीय सेना में आए दिन शहीद होकर भारत की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। ऐसे में गोरखाओं के खिलाफ प्रायोजित कुप्रचार बंद होना चाहिए।

उधर नेपाल में मोहन वैद्य किरण के नेतृत्व वाली नेपाल की कम्युनिष्ट पार्टी (क्रान्तिकारी माओवादी) ने गोरखालैण्ड आंदोलन का समर्थन किया है। काठमाण्डू से जारी एक विज्ञप्ति ने पार्टी के अध्यक्ष मोहन वैद्य किरण ने गोरखा आंदोलनकारियों पर पुलिस दमन की घोर निंदा की है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल सरकार और केन्द्र सरकार से नेपाली भाषी भारतीय जनता की मांगों को संबोधित करने की अपील की है। साथ ही पार्टी ने आंदोलन के दौरान मरने वालों को शहीद घोषणा करने की भी मांग राज्य सरकार से की है।

इस बीच पुलिस ने हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में गोरखा जन मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष बिमल गुरूंग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मोर्चा के तीन समर्थकों की मौत को लेकर ये आरोप लगाये गये हैं। गोरखा मुक्ति मोर्चा ने दावा किया है कि मोर्चा समर्थक पुलिस गोलीबारी में ही मारे गये थे, लेकिन राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस बात से इंकार किया है।

दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में अनिश्चितकालीन बंद के कारण वहां के मशहूर चाय उद्योग के साथ चाय बागान मालिकों को भारी नुकसान हो रहा है। बंद के कारण दो लाख से ज्यादा बागानकर्मियों की जीविका पर बुरा असर पड़ा है।

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