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पारंपरिक तरीके से ऊर्जा आपूर्ति असम्भव

Janjwar Team
17 Feb 2018 3:34 PM GMT
पारंपरिक तरीके से ऊर्जा आपूर्ति असम्भव
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'भविष्य में क्या हो ऊर्जा का नया स्रोत' पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, बिजली के न होने से आर्थिक रूप से पिछड़ रहे लोग...

रीवा, मध्यप्रदेश। बिजली आज की जरूरत है और यह हमारे जीवन का अहम हिस्सा है और वर्तमान में बिना बिजली के हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं।

भविष्य में बिजली उत्पादन के नये स्रोत क्या हो सकते हैं और किस प्रकार से देश की जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध हो। इस उद्देश्य से न्यूक्लियर पाॅवर काॅर्पोरेशन आॅफ इण्डिया (एनपीसीआईएल) द्वारा भविष्य में ऊर्जा का नया स्रोत क्या हो सकता है? जन जागरूकता कार्यक्रम रेवा में चलाया गया।

जन जागरूकता कार्यक्रम के तहत रेवा स्थिति पेंटियम प्वाइंट टेक्निकल काॅलेज कराहिया व गीतांजली पब्लिक स्कूल के छात्रा-छात्राओं व टीचर्स को 'एक था बुधिया' काॅमिक प्रदान की गई। रीवा मध्यप्रदेश में आयोजित जन जागरूकता कार्यक्रम का संचालन संदीप पाल द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में कहा गया कि आजादी के इतने सालों बाद भी देश में 20 से 25 फीसदी लोगों को अपना जीवन अंधकार में व्यतीत करना पड़ा रहा है। वहां की शिक्षा, चिकित्सा सेवा खस्ताहाल है, उद्योग-धंधे प्रभावित हो रहे हैं, इस कारण वहां के लोग आर्थिक रूप से भी पिछडे़ हुये हैं।

वर्तमान समय में बिजली हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना चुकी है, लेकिन इस समय पारंपरिक तरीके से ऊर्जा की आपूर्ति सम्भव नहीं है। देश में कोयले और गैस के भंडार सीमित हैं तथा जीवाश्म ईंधन प्रचलित बिजलीघरों से उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों के प्रति विश्व की बढ़ती चिन्ताओं के कारण आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा को प्रोत्साहित करना तथा प्रयोग में लाना अति आवश्यक है।

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दुनिया में सबसे आधुनिक तथा सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता है। भारत का दीर्घकालीन परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन कार्यक्रम देश में उपलब्ध विशाल थोरियम भंडार पर आधारित है तथा देश में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लगभग 50 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। देश की वर्तमान न्यूक्लियर विद्युत क्षमता 5780 मेगावाट है, जिसे बढ़ाकर 23000 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है।

साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में छात्रों को बिजली उत्पादन करने के नए तरीकों को अपनाना चाहिए। तभी हमारी तरक्की होगी और देश भी आगे बढ़ेगा। जिस प्रकार दुनिया के दूसरे देशों ने परमाणु ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर खूब तरक्की की है।

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