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निठारी कांड: 12वें मामले में भी कोली को फांसी की सजा मिलने पर बोला 'यही मेरे नसीब में', मगर पंढेर हुआ बरी

Janjwar Desk
16 Jan 2021 1:30 PM GMT
निठारी कांड: 12वें मामले में भी कोली को फांसी की सजा मिलने पर बोला यही मेरे नसीब में, मगर पंढेर हुआ बरी
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मोनिंदर सिंह पंढेर सबूतों को अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि जुर्म में वह भी कोली के बराबर का भागीदार था। यूं कहें कि कोली ने उसी के इशारे पर बड़ी संख्या में बच्चों का कत्ल किया था और युवती के बलात्कार के बाद हत्या में भी उसकी संलिप्तता की बात सामने आयी थी....

जनज्वार। नोएडा का निठारी कांड सुनकर आज भी कंपकंपी आने लगती है। यह कांड वर्ष 2006 में हुआ था।यह तब एक्सपोज हुआ था जब नोएडा के निठारी गांव की कोठी नंबर डी-5 से नरकंकाल मिलने शुरू हुये थे।

इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सीबीआई को जांच पड़ताल के दौरान मानव अंगों से भरे कई थैले बरामद हुए थे। इस भयावह और दिल दहलाने वाले कांड की 319 दिनों तक सुनवाई के बाद गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने युवती से दुष्कर्म और हत्या के 12वें मामले में दोषी करार दिए गए कोठी मालिक पंधेर के नौकर सुरेंद्र कोली को आज शनिवार 16 जनवरी को फांसी की सजा सुना दी है।

इस कांड के बाद 29 दिसंबर 2006 को सीबीआई ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार करके इनकी निशानदेही पर सेक्टर-31 स्थित कोठी 5 के नाले से बच्चों के अंग बरामद किए थे। इसके बाद पुलिस ने कोली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।

सुरेंद्र कोली ने सीबीआई के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया था कि उसने बच्चों की हत्या करके शव नाले में फेंक दिए थे। साथ ही उसने कोठी में काम करने वाली युवती के साथ बलात्कार करके हत्या का जुर्म भी कबूल किया था। गवाहों के बयान के आधार पर सीबीआई कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर को भी आरोपी बनाया था, मगर वह फांसी की सजा से आज भी बच गया।

कोर्ट ने दोष सिद्ध होने के बाद सुरेंद्र कोली पर 1 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। सजा के ऐलान के बाद सुरेंद्र कोली को वापस जेल ले जाया गया। उसने मीडिया से कहा, 'मेरे नसीब में तो फांसी ही है।'

गौरतलब है कि निठारी मामले में कुल 17 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें से 12 मामलों में फैसला सुनाया गया और सभी में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा दी गई है।

मगर ताज्जुब यह है कि मोनिंदर सिंह पंढेर सबूतों को अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि जुर्म में वह भी कोली के बराबर का भागीदार था। यूं कहें कि कोली ने उसी के इशारे पर बड़ी संख्या में बच्चों का कत्ल किया था और युवती के बलात्कार के बाद हत्या में भी उसकी संलिप्तता की बात सामने आयी थी।

निठारी कांड का खुलासा 7 मई 2006 को लापता हुई घरेलू काम करने वाली लड़की पायल की वजह से हुआ था।

गौरतलब है कि पहले 9 सितंबर 2014 को कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी और इससे पहले कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्यॉरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं, मगर इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को सुबह तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला और तब उसकी फांसी टल गयी।

निठारी कांड में सीबीआई ने दोनों आरोपियों कोली और पंढेर के खिलाफ अपहरण, हत्या और रेप के आरोप में आरोपपत्र पेश किया था, मगर पुख्ता सबूतों के अभाव में विशेष अदालत ने मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया।

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