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बिहार चुनाव 2020

बिहार चुनाव 2020 : कोरोना के मुफ्त टीके पर बोले कुरैशी, यह पार्टी की नैतिकता पर उठाता है सवाल

Janjwar Desk
25 Oct 2020 12:04 PM GMT
बिहार चुनाव 2020 : कोरोना के मुफ्त टीके पर बोले कुरैशी, यह पार्टी की नैतिकता पर उठाता है सवाल
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दलों द्वारा घोषणापत्र में किये जा रहे वादों पर कुरैशी ने कहा कि राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में कुछ भी वादे कर देते हैं और उसे निभाते नहीं हैं। इसका इलाज तो मतदाता ही कर सकते हैं....

नई दिल्ली। कोविड-19 के संक्रमण काल में देश का पहला चुनाव बिहार विधानसभा में हो रहा है, जिसमें कई राजनीतिक दलों द्वारा तमाम लोक-लुभावन वादों वाले घोषणा पत्र पेश किए जा रहे हैं। कोई 10 लाख नौकरी देने की बात कर रहा है तो कोई 19 लाख को रोजगार देगा। भाजपा ने सारी हद एक तरफ रखते हुए हर बिहारी को कोरोना का मुफ्त टीका लगवाने की घोषणा की है।

दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग की ओर से जारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किये जाने की खबरें भी आ रही हैं। इस संबंध में समाचार एजेंसी भाषा ने भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त वाई एस कुरैशी से बात की। भाषा से बातचीत में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बेबाकी से कई एक बातें रखीं।

दलों द्वारा घोषणापत्र में किये जा रहे वादों पर कुरैशी ने कहा कि 'राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में कुछ भी वादे कर देते हैं और उसे निभाते नहीं हैं। इसका इलाज तो मतदाता ही कर सकते हैं। मतदाताओं को यह याद रहना चाहिए, मीडिया को भी इसे याद दिलाते रहना चाहिए कि पिछले चुनाव में फलां पार्टी ने फलां वादा किया था। विपक्षी दलों की भी भूमिका है। इसकी निगरानी करने का काम निर्वाचन आयोग का नहीं है। मतदाता ही इसका जवाब दे सकता है। यह उसी की जिम्मेदारी है।'

वाई एस कुरैशी ने आगे कहा 'यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी गया है। अदालत के आदेश में निर्वाचन आयोग ने सभी दलों से इस संबंध में दिशा-निर्देश को लेकर विचार विमर्श भी किया लेकिन सभी दलों ने इसकी मुखालफत की। उनका तर्क था कि वह मतदाताओं से घोषणापत्र के जरिए ही वादा कर सकते हैं। मेरे हिसाब से घोषणापत्र की घोषणाओं पर लगाम नहीं लगाई जा सकती। यह उचित भी नहीं है। इस बारे में सुधार को लेकर राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग में व्यापक विमर्श होना चाहिए।'

भाषा द्वारा आपराधिक प्रवत्ति के उम्मीदवारों के सवाल पर कुरैशी ने कहा 'यह बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे लोगों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती चली जा रही है। इसमें दो बातें हैं। एक तो राजनीतिक दलों को चाहिए कि वह ऐसे लोगों को अपना उम्मीदवार ना बनाए। लेकिन पार्टियां जीत की संभावना को देखते हुए ऐसे लोगों को टिकट दे देती हैं।'

राजनीति के अपराधीकरण पर उन्होंने कहा 'निर्वाचन आयोग कहता रहा है और विधि आयोग की भी रिपोर्ट है कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले लंबित हैं उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया जाए। लेकिन देश का कानून ये है कि जब तक किसी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हो जाता, आप कुछ नहीं कर सकते। छोटे मोटे आरोपों को तो नजरअंदाज भी किया जा सकता है लेकिन बलात्कार, हत्या और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों या फिर ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर हो चुके हों, कैसे नजरअंदाज किया सकता है। ऐसे लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जानी चाहिए। यह निर्वाचन आयोग की भी लंबे समय से मांग रही है।'

कोरोना का टीका मुफ्त देने के सवाल पर कुरैशी ने कहा 'यदि घोषणापत्र में शामिल किया जाता है तो कानूनी तौर पर कोई उल्लंघन का मामला नहीं बनता, लेकिन नैतिकता का सवाल जरूर है जो इसकी इजाजत नहीं देता। क्योंकि दूर-दूर तक अभी टीके की कोई संभावना नजर नहीं आती। इसका मकसद साफ है-वोटरों को लुभाना। नैतिकता के लिहाज से सवाल उठना लाजिमी है लेकिन कानूनी तौर पर कोई दिक्कत नहीं है, कोई आपत्ति नहीं की जा सकती है।'

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