अंधविश्वास

अब चर्चा में केरल का गुरुवायुर मंदिर, 260 किलो सोने और 2000 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस वाले इस मंदिर में मिलता है सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश

Janjwar Desk
23 Jan 2023 12:18 PM GMT
अब चर्चा में केरल का गुरुवायुर मंदिर, 260 किलो सोने और 2000 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस वाले इस मंदिर में मिलता है सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश
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अब चर्चा में केरल का गुरुवायुर मंदिर, 260 किलो सोने और 2000 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस वाले इस मंदिर में मिलता है सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश (photo : social media)

Guruvayur Mandir : गुरु और वायु के नाम पर केरल में मौजूद श्रीकृष्ण के इस मंदिर का नाम गुरुवायुर पड़ा था, इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश मिलता है, दूसरे धर्म वालों का यहां प्रवेश वर्जित है...

Guruvayur Mandir : धार्मिक मठों-मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारों के पास अक्सर बेशुमार दौलत होने की चर्चा आये दिन होती रहती है। भारत में पद्मनाभस्वामी मंदिर और तिरुपति बालाजी सबसे ज्यादा संपत्ति वाले मंदिरों में गिने जाते रहे हैं। पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने से अब तक 22 बिलियन डॉलर से ज्यादा का खजाने की जानकारी मिलती हैं, वहीं तिरुपति बालाजी की संपत्ति का अंदाजा तक नहीं लगाया गया है। हालांकि पद्मनाभस्वामी मंदिर कितनी लागत से बना है, इसके बारे में भी सिर्फ कयास ही लगाये जाते रहे हैं। वहीं अब चर्चा में आया गुरुवायुर मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है। मंदिर ने खुद खुलासा किया है कि उसके पास 1,700 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि है और मंदिर के पास स्टॉक में 260 किलोग्राम से अधिक सोना मौजूद है।

गौरतलब है कि गुरुवायुर मंदिर द्वारा अपनी संपत्ति का खुलासा एक आरटीआई के जवाब में किया। आरटीआई में यह जानकारी नहीं दी गयी है कि मंदिर के पास जितना सोना मौजूद है उसका असल मूल्य कितना है। दिसंबर में एक आरटीआई के जवाब में गुरुरवायु मंदिर प्रबंधन ने बताया कि उसके पास बैंक जमा राशि 1,737.04 करोड़ रुपये और 271.05 एकड़ की भूमि है। जमीन और सोना कितनी कीमत का है, यह अभी पता लगाया जाना बाकी है।

आरटीआई का जवाब देते हुए गुरुवायुर मंदिर के अधिकारियों ने जानकारी साझा की है कि उसके पास 263.637 किलोग्राम सोना है, जिसमें कीमती पत्थर और सिक्के मौजूद हैं। आश्चर्य की बात है कि मंदिर के पास लगभग 20,000 सोने के लॉकेट हैं। यहां एक बात और भी ज्ञातव्य है कि पहले मंदिर प्रबंधन ने संपत्ति की संपत्ति का यह कहते हुए ब्यौरा देने से मना कर दिया था कि इससे सुरक्षा को खतरा है। आरटीआई के मुताबिक गुरुवायुर मंदिर के पास 6,605 किलो चांदी, 19,981 सोने के लॉकेट और 5,359 चांदी के लॉकेट संपत्ति के बतौर मौजूद हैं।

गुरुवायुर मंदिर हिंदुओं का ऐतिहासिक तीर्थ है, जहां भगवान विष्णु की कृष्ण के रूप में पूजा की जाती है। यहां हर साल देश—विदेश के लाखों हिंदू श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब सवाल है कि अचानक गुरुवायुर मंदिर की संपत्ति का ब्यौरा कैसे सामने आया। एमके हरिदास और प्रॉपर चैनल नाम की संस्था के अध्यक्ष ने तमाम आरोपों के साथ आरटीआई लगायी थी। उनका कहना है कि गुरुरवायु मंदिर के विकास और इसके भक्तों के कल्याण के संबंध में मंदिर देवस्वोम की उपेक्षा और निष्क्रियता के बाद वह आरटीआई लगाने के लिए मजबूर हुए।

केरल में मौजूद गुरुवायुर मंदिर के पास जहां सैकड़ों किलो सोना-चांदी खजाने में मौजूद है, वहीं बैंक खाते में भी करोड़ों रुपये जमा हैं। साथ ही मंदिर प्रबंधन के पास सैकड़ों एकड़ जमीन भी है। गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर के बैंक खाते में 1,737.04 करोड़ रुपये जमा हैं, और 271.05 एकड़ जमीन भी है।

आरटीआई द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवायुर मंदिर के बैंक खाते में 17,37,04,90,961 रुपये जमा हैं। हालांकि मंदिर प्रबंधन आरटीआई के जवाब में यह बताना नहीं भूला कि 2016 में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से सरकार की तरफ से अभी तक कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है।

गुरुवायुर मंदिर के बारे में प्रसिद्ध है कि यहां की मूर्ति द्वारिका की है। कहा जाता है कि एक बार द्वारिका में भयंकर बाढ़ आ गयी थी और यह मूर्ति बहती हुई गुरु बृहस्पति को मिली थी। वायु और बृहस्पति जब इस मूर्ति की स्थापना के लिये जगह ढूंढ रहे थे तो वह केरल पहुंचे। यहां भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शनों के पश्चात शिव के कहने पर यहां मूर्ति स्थापित की गई। गुरु और वायु के नाम पर ही इस मंदिर का नाम गुरुवायुर पड़ा था। इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश मिलता है, दूसरे धर्म वालों का यहां प्रवेश वर्जित है।

गुरुवायुरप्पन मंदिर में भगवान कृष्ण की चार हाथों वाली मूर्ति स्थापित की गयी है। इसमें कृष्ण ने एक हाथ में शंख, दूसरे में सुदर्शन चक्र और तीसरे हाथ में कमल पुष्प और चौथे हाथ में गदा धारण किया हुआ है। ये मूर्ति की पूजा भगवान कृष्ण के बाल रुप यानी बचपन के रूप में की जाती है। इस मंदिर में शानदार चित्रकारी की गयी है, जो कृष्ण की बाल लीलाओं को प्रस्तुत करती हैं | इस मंदिर को भूलोक वैकुंठम के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है धरती पर वैकुण्ठ लोक।

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