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यूपी : अदालती आदेश के बावजूद दलित छात्र को परीक्षा से किया वंचित, अब प्राचार्य को मिला HC का नोटिस

Janjwar Desk
16 Sep 2021 3:29 PM GMT
यूपी : अदालती आदेश के बावजूद दलित छात्र को परीक्षा से किया वंचित, अब प्राचार्य को मिला HC का नोटिस
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इलाहाबाद हाइकोर्ट (file photo)

उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद महाविद्यालय ने सुरेन्द्र कुमार को द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट नहीं किया। कोराना के कारण दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हुई थी और सभी छात्रों को तीसरे सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया गया...

जनज्वार, गोरखपुर। हाईकोर्ट इलाहाबाद (Allahabad Highcourt) ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध दिग्विजय नाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना पर कार्यवाही की जाए। आरोप है कि आदेश के बावजूद दलित छात्र को एमएड की परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया

हाईकोर्ट ने यह नोटिस 13 सितम्बर को दलित छात्र सुरेन्द्र कुमार (Surendra Kumar) की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। जंगल धूषण निवासी दलित सुरेन्द्र कुमार ने दिग्विजय नाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय में वर्ष 2019-20 में एमएड में एडमिशन लिया। यह पाठ्यक्रम स्ववितपोषित है। सुरेन्द्र कुमार ने छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया जिसे महाविद्यालय ने समाज कल्याण विभाग को अग्रसारित किया।

समाज कल्याण विभाग द्वारा शुल्क प्रतिपूर्ति दिए जाने के पहले से ही महाविद्यालय प्रशासन उन पर पूरा शुल्क जमा किए जाने का दबाव बनाने लगा। सुरेन्द्र कुमार ने शुल्क प्रतिपूर्ति होने की आशा में तीन अक्टूबर 2019 को शुल्क के रूप में 20 हजार रुपए जमा कर दिया और शेष धनराशि शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने पर जमा करने की बात कही हालांकि महाविद्यालय ने उनसे एक शपथपत्र लिया जिसमें कहा गया था कि उनसे प्रवेश के समय किसी तरह का शुल्क नहीं लिया गया है।

समाज कल्याण विभाग ने शुल्क प्रतिपूर्ति देने में काफी देर लगायी और 31 जनवरी 2020 को 51,250 रूपए के बजाय सिर्फ 3790 रूपए ही शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में सुरेन्द्र कुमार को दिया। काफी दौड़भाग करने के बाद भी समाज कल्याण विभाग ने इसका कारण नहीं बताया तो सुरेन्द्र कुमार ने 19 फरवरी 2020 को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी।

उनकी आरटीआई (RTI) के जवाब में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 13 मार्च 2020 को जवाब दिया कि शिक्षण संस्थान द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के लिए निम्नतम निर्धारित शुल्क 3790 रूपए ही लाक किया गया है जो छात्र के खाते में भेज दिया गया है।

शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में समाज कल्याण विभाग द्वारा 51,250 रूपए के बजाय 3790 रूपए ही शुल्क प्रतिपूर्ति करने पर सुरेन्द्र कुमार संकट में आ गए। महाविद्यालय द्वारा लगातार उन पर शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। सुरेन्द्र कुमार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे शुल्क की शेष धनराशि जमा कर सकें। शुल्क नहीं जमा होने पर महाविद्यालय ने उनसे कहा कि उनकी पढ़ाई जारी नहीं रह पाएगी और उन्हें सेकेंड सेमेस्टर में प्रमोट भी नहीं किया जाएगा।

परेशान सुरेन्द्र कुमार हाईकोर्ट चले गए और उन्होंने रिट दाखिल किया। उच्च न्यायालय ने सभी सम्बन्धित पक्षों को नोटिस जारी किया। इसी बीच सुरेन्द्र कुमार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय से प्रार्थना की कि उन्हें शिक्षण कार्य व परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दिया जाए।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अजीत कुमार ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 मार्च 2021 को आदेश दिया कि सुरेन्द्र कुमार को अंतरिम रूप से शिक्षण कार्य जारी रखने और दूसरे से तीसरे सेमेस्टर में प्रमोट करने से न रोका जाए।

उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद महाविद्यालय ने सुरेन्द्र कुमार को द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट नहीं किया। कोराना के कारण दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हुई थी और सभी छात्रों को तीसरे सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया गया। महाविद्यालय ने तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में भी सुरेन्द्र को शामिल नहीं होने दिया। यही नहीं उनकी प्रथम सेमेस्टर की मार्कशीट भी रोक ली।

इस पर सुरेन्द्र कुमार ने उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका दायर की जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अजित कुमार ने दिग्विजय नाथ एलटी प्रशिक्षण महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य शिव प्रताप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश को जानबूझ कर पालन नहीं करने पर क्यों न उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए। इस केस की अगली सुनवाई 12 नवम्बर को होगी।

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