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ddu exam news today: सीबीसीएस पैटर्न में पाठ्यक्रम से लेकर परीक्षा प्रणाली पर शिक्षक ही उठा रहे सवाल तो कैसे होगी पढ़ाई

Janjwar Desk
24 Nov 2021 3:09 PM GMT
ddu exam news today:  सीबीसीएस पैटर्न में पाठ्यक्रम से लेकर परीक्षा प्रणाली पर शिक्षक ही उठा रहे सवाल तो कैसे होगी पढ़ाई
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ddu exam news today: यूजीसी के आदेश पर सीबीसीएस पैटर्न को यूपी के गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय से लेकर उसके अंगीभूत कालेजों में मौजूदा सत्र से लागू कर दिया गया है।

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट

ddu exam news today: यूजीसी के आदेश पर सीबीसीएस पैटर्न को यूपी के गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय से लेकर उसके अंगीभूत कालेजों में मौजूदा सत्र से लागू कर दिया गया है। अधूरी तैयारी के बीच नई प्रक्रिया लागू हो जाने के बाद जहां पाठृयक्रम में बदलाव किया गया है,वहीं परीक्षा प्रणाली भी बदल गई है।खास बात यह है कि नई प्रक्रिया से विश्वविद्यालय के शिक्षक तक पूरी तरह परिचीत नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कोरोना के चलते सत्र प्रारंभ होने में विलंब हुआ है,तो वैसे में पाठयक्रम कैसे पूर्ण हो पाएगा। इसको लेकर शिक्षकों सहित छात्रों में भी अशमंजश बना हुआ है।

शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर उठते रहे हैं सवाल

भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर हमेशा सवाल उठते रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय उच्च शिक्षा मूल्यांकन परिषद द्वारा जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में 68 प्रतिशत विश्वविद्यालयों और 90 प्रतिशत कॉलेजों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता या तो मध्यम दर्जे की है या फिर दोषपूर्ण पाई गई है। क्योंकि इन संस्थानों के लगभग 75 प्रतिशत डिग्रीधारी छात्र बेरोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं। अगर हम भारत के अतरिक्त दुनिया के अन्य विकसित देशों की बात करे तो वह देश अपनी उच्च शिक्षा पर कुल बजट का नौ से दस प्रतिशत तक व्यय कर रहे हैं, और भारत में राष्ट्रीय आय का महज एक प्रतिशत से भी कम उच्च शिक्षा पर खर्च हो रहा है। इस सबको देखते हुए सरकार ने "सीबीसीएस सिस्टम" लागू किया है, जिससे देश में शिक्षा व्यवस्था को ठीक किया जा सके।

ऐसे संचालित होता है सीबीसीएस सिस्टम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अर्थात यूजीसी के द्वारा सभी विश्वविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू कर दिया गया है, सभी विश्वविद्यालय इसे लागू करते जा रहे है। यूजीसी द्वारा माना गया है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की परफारमेंस सुधार आयेगा। विदेशों में सीबीसीएस सिस्टम पहले से ही लागू है। इस सिस्टम के अंतर्गत छात्रों के पास निर्धारित पाठ्यक्रमों को चयन करने के विकल्प मौजूद होते है, जिसको मूल, निर्वाचित या मामूली या मृदु कौशल पाठ्यक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है और जिसे वह अपने मन मुताबिक सीख सकते हैं।

यह पूरी प्रक्रिया मूल्यांकन क्रेडिट आधारित प्रणाली पर यानि कि सीबीसीएस सिस्टम पर आधारित है। सीबीसीएस सिस्टम का उद्देश्य शिक्षा में उदारीकरण और वैश्वीकरण को एक साथ बनाए रखने हेतु, पाठ्यक्रम को भी पुनः परिभाषित किया गया है। जिसे विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली या सीबीसीएस सिस्टम कहा जाता है।

सीबीसीएस का कुछ ऐसा है ढांचा

सभी परास्नातक पाठ्यक्रम कुल 100 क्रेडिट के होंगे, जो चार सेमेस्टर में समान रूप से विभाजित होकर 25 क्रेडिट प्रति सेमेस्टर होंगे। प्रत्येक सेमेस्टर में 5-5 प्रश्नपत्र, प्रत्येक कोर्स में 5 क्रेडिट होंगे। प्रश्नपत्र के लिए 50-50 मिनट के पीरियड रखकर यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार अधिकतम 90 घंटे में कुल क्रेडिट का लक्ष्य रखा जाएगा। मौखिकी का अलग से कोई प्रश्नपत्र नहीं होगा। इसकी जगह प्रत्येक प्रश्नपत्र में अभ्यास कार्य, सेमिनार, फील्ड वर्क, प्रोजेक्ट व आंतरिक मूल्यांकन और मौखिकी का प्रावधान होगा।

प्रत्येक प्रश्नपत्र 100 अंकों का होगा, जो 70ः30 के अनुपात में लिखित व आंतरिक परीक्षा में विभाजित होगा। लिखित परीक्षा 50 से 100 अंकों के स्थान पर 70 अंकों की व आंतरिक परीक्षा 30 अंकों की हो सकती है। लिखित परीक्षा वर्तमान प्रश्नपत्र प्रणाली के ही अनुसार 20 अंकों के प्रति प्रश्न के स्थान पर 14 अंकों के प्रति प्रश्न होकर कुल पूर्णांक 70 में से और कुल नौ प्रश्नों में से पहले की ही तरह केवल पांच प्रश्न हल करके प्राप्त किए जा सकेंगे। मासिक आधार पर होने वाली आंतरिक परीक्षा 30 अंक की होगी।

रुचि के आधार पर कोर्स चुनने का दावा

नियम के अुनसा रुचि के अनुरूप पढ़ाई नई प्रणाली में मुख्य कोर्स के अलावा विद्यार्थी के पास अपनी रुचि के आधार पर कोर्स चुनने का भी विकल्प होगा। यह तीन श्रेणियों में होगा। पहला कोर इलेक्टिव, यानी मुख्य कोर्स तथा सब इलेक्टिव यानी मुख्य कोर्स के वैकल्पिक प्रश्नपत्र। उसके अलावा तीसरा ओपन इलेक्टिव कोर्स खास है। मसलन, कला संकाय का छात्र विज्ञान अथवा वाणिज्य संकाय का एक विषय भी पढ़ाई के लिए चुन सकता है। पूरा कोर्स अलग अलग यूनिट में बंटा होगा। यह सारा आदेश इस बार धरातल पर लागू होते नहीं दिखा। विश्वविद्यालय से लेकर महाविद्यालयों तक कोई इंतजाम नहीं रहा। छात्र भी कोर्स चयन की आजादी को लेकर अपरिचित रहे। नामांकन के समय सब कुछ पूर्व की तरह ही रहा।

गोरखपुर विश्वविद्यालय कार्यपरिषद लगा चूकी है मोहर

मौजूदा सत्र से चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पाठ्यक्रम लागू करने को लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद पहले ही मोहर लगा चूकी है। इस पाठ्यक्रम के लागू होने से पारंपरिक सेमेस्टर पद्धति, जिसमें कक्षा कार्य, प्रयोगात्मक कार्य और छह-छह माह के अंतराल पर लिखित परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थी का मूल्यांकन होगा। अंकों के स्थान पर ग्रेड मिलेंगे और कोर्स का विभाजन क्रेेडिट के आधार पर होगा। इसके अलावा आंतरिक परीक्षा में होने वाले अभ्यास कार्य, सेमिनार, फील्ड एवं प्रोजेक्ट वर्क भी करने होंगे। रिजल्ट में इसे भी आधार बनाया जाएगा।

शिक्षकों के आशंकाओं का नहीं हो सका है समाधान

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में 22 नवंबर को सीबीसीएस पैटर्न को लेकर मंथन किया गया। इस दौरान शिक्षकों के सवालों पर विवि प्रशासन कोई जवाब नहीं दे सका। दर्जनों शिक्षकों ने 'सीबीसीएस पैटर्न की खामियों पर मुखरता से अपनी बात रखी। हालांकि उनकी बातों का कोई समाधान नहीं' निकला। सीबीसीएस पैटर्न में 'तीन मेजर कोर्स में से अंतिम वर्ष में एक मेजर कोर्स छोड़ने पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कोई भी विद्यार्थी यह पहले ही कैसे तय कर सकता है कि उसे तृतीय वर्ष में कौन सा कोर्स छोड़ना है। सीबीसीएस सिस्टम को लेकर विद्यार्थियों में कंफ्यूजन की स्थिति' बनी हुई है। कोर्स कोड बदले जाने का शिक्षकों ने इस दौरान विरोध किया। शिक्षक बार-बार यह बात कहते रहे कि जब शिक्षकों के मन में ही इस पैटर्न को लेकर कंफ्यूजन है तो वे विद्यार्थियों को कैसे समझा पाएंगे।

बैठक में कुलपति प्रो. राजेश सिंह ऑनलाइन जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि सभी विभागाध्यक्ष और संकायाध्यक्ष अपने सुझाव दें ताकि उन सुझावों को लागू कर इसका क्रियान्वयन किया जाएगा। विषय संयोजन को तैयार करने के दौरान इस बात का ख्यान रखें कि शासन द्वारा दी गई गाइडलाइंस का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा सके। इसके बाद मंगलवार को महाविद्यालयों के प्राचार्य के साथ बैठक हुई। लेकिन यह बैठक मात्र औपचारिकता तक सिमट कर रह गया। इसमें भाग ले रहे अधिकांश का प्राचार्य वित्तविहीन महाविद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। जिनके लिए धरातल पर पूरी प्रक्रिया को लागू कर पाना आसान नहीं होगा।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई में सीबीसीएस को इसी सत्र से लागू कर दिया गया है। स्नातक के पूरे पाठ्यक्रम को मेजर, माइनर और को-करीकुलम कोर्स में विभाजित किया गया है। इसमें विद्यार्थी मनपसंद कोर्स चुन सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति-2021 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विद्या परिषद के बाद कार्य परिषद की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागूू कर दिया गया है।

इंडटर्म परीक्षाएं 10 दिसम्बर से

विश्वविद्यालय में दाखिला आधिकारिक रूप से 30 अक्तूबर को संपन्न हो चुका है लेकिन चुनिंदा विषयों में प्रवेश कार्य चल रहा है। विवि प्रशासन ने बताया है कि इंडटर्म परीक्षाएं 10 दिसम्बर से प्रस्तावित हैं। जबकि 'अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इंटरनल परीक्षा कितने नंबर की होगी और थ्योरिटिकल परीक्षा कितने नंबर की। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों मंे असमंजश बना हुआ है।

90 फीसद महाविद्यालयों में शिक्षक व संशाधन नहीं

राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों की तरह दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंगीभूत 90 फीसद कालेजों की स्थिति काफी खराब है। वित्तविहीन महाविद्यालयों में शिक्षकों व संसाधनों की भारी कमी है। तैनात शिक्षकों में से अधिकांश महाविद्यालय सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी पर भी भुगतान करने को तैयार नहीं है।ऐसे में नई प्रणाली के तहत छात्रों मनचाहा कोर्स व विषय चयन करने का अवसर कहां से मिल पाएगा। संशाधनों के अभाव में पाठृयक्रम में बदलाव सहित सीबीसीएस प्रणाली प्रभावी तौर पर लागू करने की स्थिति में नहीं है।

शिक्षण केंद्रित नहीं परीक्षा केंद्रित रह जाएगी व्यवस्था

सीबीसीएस प्रणाली पर सवाल उठानेवाले शिक्षकों का कहना है कि ऐसे में शिक्षकों का अधिकांश वक्त परीक्षा संपन्न कराने में ही गुजर जाएगा। संशासनों का इंतजाम किए बिना इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकेगा। असिस्टेंट प्रोफेसर डा अरविंद पाण्डेय का मानना है कि यह प्रक्रिया शिक्षण केंद्रित न होकर परीक्षा केंद्रित रह जाएगी। जिसके चलते गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का हमारा मकसद पूर्ण नहीं हो पाएगा। जबकि पूरे प्रयास का मकसद शिक्षा में सुधार के साथ रूचिकर शिक्षण प्रणाली लागू करना है। इस बीच कुलपति डा राजेश कुमार ने शिक्षकों से इसमें सुधार के सुझाव मांगते हुए मौजूदा सत्र से नई प्रणाली लागू करने के प्रति वचनबद्धता दोहराई है।

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