पर्यावरण

Best Ways to Reduce Air Pollution: वायु प्रदूषण कम ना हो तो मौसम बदल दीजिये

Janjwar Desk
11 Dec 2021 1:11 PM GMT
Best Ways to Reduce Air Pollution: वायु प्रदूषण कम ना हो तो मौसम बदल दीजिये
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5 ways to control air pollution: भारत समेत दुनिया भर की सरकारें प्रदूषण को नियंत्रित करने के नाम पर प्रदूषण को छोड़कर बाकी सभी चीजें नियंत्रित करते हैं....

वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र पाण्डेय का विश्लेषण

5 ways to control air pollution: एनवायर्नमेंटल साइंस जर्नल (Environmental Science Journal) के हाल के एक अंक में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार चीन (China) में सरकारी बड़े आयोजनों के समय यदि तमाम प्रयासों के बाद भी वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर कम नहीं होता है, तो फिर मौसम को बदल दिया जाता है, कुछ कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) करा दी जाती है। बीजिंग में 1 जुलाई को तियानमेन स्क्वायर (Tiananmen Square) पर चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह (Centenary Celebration of Chinese Communist Party) आयोजित किया गया था।

जाहिर है यह समारोह भव्यतम रहा होगा और उस समय पूरी दुनिया की निगाहें चीन पर टिकी होंगी। इस समारोह के बहुत पहले से आसपास के उद्योग और वायु प्रदूषण के दूसरे स्त्रोतों को बंद कर दिया गया था और वाहनों पर पाबंदी लगाई गयी थी। इन सबके बाद भी धीमी हवा के कारण वायु प्रदूषण के स्तर में वांछनीय कमी नहीं हो रही थी।

बीजिंग स्थित सिंगहुआ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वांग कैन (Wang Can of Tsinghua University) की अगुवाई में किये गए अध्ययन के अनुसार तमाम प्रयासों के बाद भी जब वायु प्रदूषण का स्तर कम नहीं किया जा सका तब आयोजन के दो दिन पहले से इस इलाके में क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) के सहारे कुछ अंतराल पर कृत्रिम वर्षा कराई गयी। इससे आयोजन के समय तक वायु प्रदूषण के स्तर में दो-तिहाई कमी लाई गयी।

इस तरह के प्रयासों से वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाने को 'ब्लूस्काइंग' (Blueskying) कहा जाता है, और चीन दुनिया में इसका अग्रणी देश है। ऐसी प्रोद्योगिकी का उपयोग 2008 के बीजिंग ओलिंपिक के समय से किया जा रहा है। चीन अब तक क्लाउड सीडिंग में अत्यधिक निवेश कर चुका है और इसका उपयोग केवल बड़े आयोजनों के समय वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए ही नहीं बल्कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि के लिए बारिश कराने में भी किया जाता है। यही कारण है कि चीन के किसी भी क्षेत्र से लम्बे समय तक सूखे की खबरें नहीं आती।

क्लाउड सीडिंग में आकाश के बादलों पर सिल्वर आयोडाइड (Silver Lodide) का छिडकाव किया जाता है, जिसपर बूंदें जमा होती हैं और फिर बारिश होती है। वर्ष 2017 तक चीन इसके लिए 1.3 अरब डॉलर खर्च कर चुका था। इस तरह की कृत्रिम बारिश से वर्ष 2017 तक चीन में 233.5 अरब घन मीटर अतिरिक्त बारिश कराई गयी थी। पिछले वर्ष चीन ने इस कार्यक्रम के विस्तार की घोषण की थी, जिसके अनुसार इसके दायरे में लगभग 55 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र होगा। यह पूरे क्षेत्र भारत के कुल क्षेत्र की तुलना में लगभग डेढ़-गुना है।

चीन में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के नाम पर मौसम को ही बदल डालने से इतना तो स्पष्ट है कि भारत समेत दुनिया भर की सरकारें प्रदूषण को नियंत्रित करने के नाम पर प्रदूषण को छोड़कर बाकी सभी चीजें नियंत्रित करते हैं। हमारे देश में भी वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के नाम पर दिल्ली में स्मोग टावर और वाटर गन का बड़े गर्व से इस्तेमाल किया जाता है, पर इनके प्रभाव और दक्षता के बारे में किसी को नहीं पता।

अभी तक इसका कोई अध्ययन नहीं किया गया है कि एक जगह कृत्रिम मौसम का दूसरे जगहों पर क्या असर पड़ता है, पर चीन में जिस व्यापक तरीके से मौसम में बदलाव का खेल चल रहा है, उसमें इस बारे में अनुसंधान जरूरी हो गया है।

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