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पर्यावरण

इस बार पड़ेगी ज्यादा कड़ाके की ठंड, क्लाइमेट चेंज है कारण, मौसम विभाग का आकलन

Janjwar Desk
15 Oct 2020 1:30 AM GMT
इस बार पड़ेगी ज्यादा कड़ाके की ठंड, क्लाइमेट चेंज है कारण, मौसम विभाग का आकलन
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File photo

मौसम विभाग के डीजी मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि इस बार की सर्दियां पहले के मुकाबले अधिक सर्द होंगी। इसका मुख्य कारण ला नीना कंडिशन हैं, जो सर्दी को कड़ाके की कर देगी...

जनज्वार। पर्यावरण असंतुलन से क्लाइमेंट चेंज का चौतरफा असर पृथ्वी, प्रकृति, वायुमंडल और मौसम पर पड़ रहा है। इस बार मौसम से लोगों की आम शिकायत रही है कि सितंबर और अक्टूबर के महीने में भी गर्मी अधिक है। लेकिन भारतीय मौसम विभाग का मानना है कि इस बार कड़ाके की सर्दी पड़ने वाली है, ऐसे में लोगों को तैयार रहना चाहिए।

मौसम विभाग के डीजी मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि इस बार की सर्दियां पहले के मुकाबले अधिक सर्द होंगी। इसका मुख्य कारण ला नीना कंडिशन हैं, जो सर्दी को कड़ाके की कर देगी। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि क्लाइमेट चेंज के कारण तापमान में सिर्फ वृद्धि ही होती है, बल्कि उससे मौसम में बदलाव होता है।

मौसम विभाग के डीजी के मुताबिक, भारत में मौसम के रुख को तय करने में ला नीना और एल नीनो प्रभाव का काफी अहम रोल है। ला नीना के कारण हम इस बार अधिक ठंड की उम्मीद कर सकते हैं।

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि ला नीना कंडीशन सर्द हवाओं के लिए अनुकूल होती हैं, लेकिन एल नीनो कंडीशन प्रतिकूल होती हैं।

मौसम विभाग के डीजी के मुताबिक, राजस्थान, यूपी और बिहार ऐसे राज्य हैं जहां सर्द हवाओं के कारण अधिक मौतें होती हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मौसम विभाग की ओर से हर साल नवंबर में एक चार्ट जारी किया जाता है, जिसमें दिसंबर से फरवरी तक के मौसम की जानकारी दी जाती है।

गौरतलब है कि ला नीना एक प्रक्रिया है, जिसके तहत समुद्र में पानी ठंडा होना शुरू हो जाता है। समुद्री पानी पहले से ही ठंडा होता है, लेकिन इसके कारण उसमें ठंडक बढ़ती है जिसका असर हवाओं पर पड़ता है। एल निनो में इसके विपरीत होता है, दोनों ही क्रियाओं का असर सीधे तौर पर भारत के मॉनसून और सर्दी के मौसम पर पड़ता है।

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