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Unnao वाले बदनाम IAS दिव्यांशु पटेल और उनके परिवार की दबंगई से ब्राह्मण परिवार गांव से पलायन को मजबूर

Janjwar Desk
2 Oct 2021 3:33 AM GMT
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(IAS दिव्यांशु पटेल और बगल में अवैध निर्माण की तस्वीर)

आरोपियों ने पहले दिसंबर 2020 मे उनकी आबादी की जमीन और रास्ते पर कब्जा कर लिया और अब मात्र 2 फिट के रास्ते को भी अपने IAS पुत्र के प्रभाव का प्रयोग कर बंद करने का प्रयास 27 सितंबर को किया...

जनज्वार। 2017 में सत्ता संभालने के बाद प्रदेश के मुखिया बने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा था कि गुंडे अपराधी भाग गये हैं। उन्होने माफियाओं की संपत्ती और अवैध निर्माण के लिए जेसीबी जैसी व्यवस्था होने की बात कही थी। लेकिन उनकी कही बात के बाद प्रदेश में गुडों और माफियाओं की कमी उनका प्रशासन पूरी कर रहा है। प्रशासन लगातार दबंगई, गुंडई जैसे शब्दों को खुद में समेट रहा है।

जिला अम्बेडकर नगर की तहसिल जलालपुर के गांव अजईपुर निवासी आईएएस अधिकारी दिव्यांशु पटेल (Divyanshu Patel) और उनके पिता की दबंगई से भयभीत परिवार गांव से पलायन को मजबूर हो रहा है। सूचना है कि आईएएस व उसके परिवार ने पड़ोस के एक ब्राहमण परिवार की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। कब्जा करने के बाद परिवार को आईएएस के ओहदे का रूतबा दिखाकर धमकाया जा रहा है।

इस मामले में पीड़ित 92 वर्षीय उदय राज दुबे का कहना है की पड़ोसी अवधेश वर्मा ने पहले दिसंबर 2020 मे उनकी आबादी की जमीन और रास्ते पर कब्जा कर लिया और अब मात्र 2 फिट के रास्ते को भी अपने IAS पुत्र के प्रभाव का प्रयोग कर बंद करने का प्रयास 27 सितंबर को किया। इतना ही नहीं पुलिस की मौजूदगी में रास्ता बंद करना शुरू किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

इस दौरान मौके पर मौजूद एसआई शिवांगी त्रिपाठी ने पीड़ित परिवार को धमकाया और जबरन मोबाइल छीन कर घटना से संबंधित फोटो और वीडियो delete कर परिवार की महिलाओ तक को जेल भेजने की धमकी दी। पीड़ित परिवार द्वारा उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई गई। जिसके बाद मौके पर पहुँचे तहसीलदार जलालपुर और कोतवाल जलालपुर ने मौके पर निर्माण को रुकवा दिया।

रास्ते का मुकदमा न्यायालय मे होने और हाई कोर्ट के निर्देश की जानकारी होने पर विपक्षी अवधेश वर्मा को निर्णय होने तक निर्माण ना करने की चेतावनी दी गई है। पीड़ित वृद्ध ने बताया की पड़ोसी आईएएस दिव्यांशु पटेल अधिकारियों पर दबाव बनाकर लगातार शोषण कर रहा है। ऐसी दशा मे जान माल की कोई गारंटी नही है और विरोधी लगातार गांव छोड़ कर पलायन करने के लिए मजबूर कर रहे है।

दर्जनों प्रार्थना पत्र के बाद भी तहसील प्रसाशन महज मूक दर्शक बना हुआ है, वहीं पीड़ित किसी अप्रिय घटना की आशंका से भयभीत है। वृद्ध ने बताया की उम्र के इस पड़ाव पर मातृ भूमि छोड़ कर जाने के बजाय जीवन समाप्त होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है। पीड़ित का कहना है की विरोधी लगातार परिवार को परेशान कर गांव छोड़ने की धमकी दे रहे हैं और परिवार की सारी जमीन पर गिद्ध दृष्टि लगा रखी है।

पीड़ित परिवार के जयप्रकाश, रेखा, कुणाल व अमिता ने बताया की विरोधी लगातार झूठे मुकदमे मे फंसाकर जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं। लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होने कहा कि सरकार कहती है दबंगों भूमाफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन यहां खुद प्रशासन ही भूमाफिया बन गया है, और लगातार दबंगई पर उतारू है।

पीड़ित ब्राहमण परिवार के सदस्य राहुल द्विवेदी ने जनज्वार से बात करते हुए बताया की गांव में एक घर ही ब्राहमण का है। इसके बावजूद हमारे द्वारा की गई शिकायतों पर आईएएस व उसका परिवार उल्टा हमें दबंग बताकर कार्रवाई घुमाने की कोशिश करता है। हम लोग इन लोगों की गुंडई से आजिज आ चुके हैं। ऐसे ही अगर चलता रहा तो हम मजबूरी में कोई गलत कदम उठा लेने पर मजबूर होंगे। प्रशासन से कोई कहां तक लड़ेगा।

कौन है दिव्याशु पटेल?

पत्रकार को पीटकर काजू कतली खिलाता दिव्यांशु पटेल

उन्नाव में पंचायत चुनाव के दौरान एक पत्रकार की पिटाई के बाद चर्चा में आए दिव्याशु पटेल सूबे के चर्चित आईएएस हैं। पत्रकार की पिटाई के बाद फजीहत हुई तो पटेल ने उसे काजू कतली खिलाते हुए फोटो खिंचाकर लीपापोती कर ली थी। दिव्यांशु पटेल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अकबरपुर जिले के रहने वाले हैं। हालांकि ज्यादातर वक्त बलरामपुर में बीता है। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई से लेकर ग्रेजुएशन तक यहीं से किया है। उनके पिता बलरामपुर के एमएलके महाविद्यालय में संस्कृत के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। बलरामपुर से ग्रेजुएशन करने के बाद दिव्यांशु दिल्ली आ गए थे। यहां दिल्ली यूनिवर्सिटी से B.Ed और M.Ed करने के बाद जेएनयू में एमए में एडमिशन लिया। यहीं से पीएचडी भी की।

साल 2012 में दिव्यांशु सीआरपीएफ में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट चुने गए थे। हालांकि उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाना था और तैयारी में जुटे रहे। साल 2017 में वे यूपीएससी में सफल हुए और 204वीं रैंक हासिल की। दिव्यांशु को यूपी कैडर मिला।

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