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नये साल के पहले दिन देशभर में संविधान की प्रस्तावना दुहराएंगे किसान, आंदोलन करेंगे और तेज

Janjwar Desk
31 Dec 2020 2:51 PM GMT
नये साल के पहले दिन देशभर में संविधान की प्रस्तावना दुहराएंगे किसान, आंदोलन करेंगे और तेज
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(File photo)

किसान नेता रामजीवन सिंह ने पटना में कहा कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने अपनी वर्किंग कमिटी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया है...

जनज्वार। आंग्ल नववर्ष की शुरुआत किसान पूरे देश में संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर करेंगे। इसके साथ ही आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की वर्किंग कमिटी ने 1 जनवरी को साल 2021 के प्रथम दिन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आन्दोलन तेज करने के लिए संकल्प का आह्वान किया है।

अखिल भारतीय स्वामी सहजानन्द सरस्वती विचार मंच के सचिव रामजीवन प्रसाद सिंह ने पटना में कहा 'इस दिन भारत के तमाम पंचायतों, अंचलों, जिलों एवं राज्य स्तर पर एकजुट होकर संविधान के प्रस्तावना को पढ़कर दुहराया जाएगा। साथ ही संविधान और किसानों को बचाने के लिए आन्दोलन - संघर्ष का संकल्प लेकर किसान आन्दोलन को तेज कर सरकार को मांगे मानने के लिए वाध्य करेंगे।'

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने अपनी वर्किंग कमिटी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया है।

रामजीवन प्रसाद सिंह ने कहा 'पटना में संकल्प सभा 1 जनवरी 2021 को अपराह्न 2.30 बजे से अदालत गंज अमरनाथ रोड स्थित जनशक्ति कार्यालय में किया जाएगा।'

उन्होंने किसानों और जनता से भविदारी का आह्वान करते हुए कहा 'आप सभी किसानों, किसान कार्यकर्ताओं एवं किसानों से सहानुभूति रखने वाले भाईयों एवं बहनों से अनुरोध है कि उपरोक्त संकल्प सभा में अवश्य भाग लेकर किसान आन्दोलन को आगे बढ़ाएं।'

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में विभिन्न राज्यों से लगी दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 36 दिनों से किसान आंदोलन कर रहे हैं। हजारों-लाखों की संख्या में किसान दिन-रात यहां जमे हुए हैं।

किसान संगठनों की केंद्र सरकार के साथ अबतक छह दौर की वार्ता हो चुकी है। छठे दौर की वार्ता में 30 दिसंबर को पराली जलाने को लेकर कानून और बिजली बिल को लेकर संभावित कानून में किसानों की मांग पर विचार करने पर सरकार सहमत हो गई है।

हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि एमएसपी को लेकर कानून बनाने और कृषि कानून वापस लेने की मांग पर केंद्र सरकार का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है। वैसे आगामी 4 जुलाई को सातवें दौर की वार्ता भी प्रस्तावित है, पर किसान नेता इसके परिणाम को लेकर कुछ खास उत्साहित नहीं दिख रहे।

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