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बिहार के विश्वविद्यालयों में अचानक बदल दी गई परीक्षा पद्धति, विद्यार्थियों को सता रहा कैरियर बिगड़ने का भय

Janjwar Desk
29 Nov 2020 1:04 PM GMT
बिहार के विश्वविद्यालयों में अचानक बदल दी गई परीक्षा पद्धति, विद्यार्थियों को सता रहा कैरियर बिगड़ने का भय
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File photo

बिहार के विश्वविद्यालयों में पुरानी परीक्षा पद्धति को बदल कर नई परीक्षा पद्धति लागू कर दी गई है, जिससे राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं और उन्हें कैरियर बिगड़ने का भय सता रहा है...

हर्ष झा की रिपोर्ट

दरभंगा। बिहार के विश्वविद्यालयों में स्नातक तृतीय खंड की परीक्षा पैटर्न बदल जाने से विद्यार्थियों को अपना कैरियर प्रभावित होने की चिंता सता रही है। यह सब कोरोना संकट की आड़ में अचानक कर दिया गया है, जिससे छात्र-छात्राओं में रोष है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करने के लिए न्यूनतम मार्क्स की शर्त होती है, तो लेक्चरर और शिक्षक आदि बनने के लिए मार्क्स काफी अहम होते है, चूंकि एकेडमिक मार्क्स के आधार पर इनमें बहाली होती है।

बिहार के विश्वविद्यालयों में पुरानी परीक्षा पद्धति को बदल कर नई परीक्षा पद्धति लागू कर दी गई है। परीक्षा पद्धति बदलने से राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं। बता दें कि कोरोना संकट के कारण शिक्षा सर्वाधिक प्रभावित हुई है। अब कोरोना की आड़ में ही विश्वविद्यालयों की परीक्षा पद्धति में बदलाव कर दिया गया है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा एवं पटना विश्वविद्यालय, पटना द्वारा पहले से पूरे राज्य में लागू समान पद्धति के आधार पर स्नातक तृतीय खंड 2017-20 की परीक्षा आयोजित आयोजित कर परिणाम भी घोषित कर दिया गया है।

वहीं मगध विश्वविद्यालय, बोधगया समेत राज्य के कई विश्वविद्यालयों द्वारा सत्र 2017-20 की स्नातक प्रतिष्ठा की परीक्षा वास्तुनिष्ठ पैटर्न पर ओएमआर शीट पर आयोजित की जा रही है। मगध विश्वविद्यालय की परीक्षा 1 दिसंबर से आयोजित होने वाली है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है की विषय निष्ठ पर आधारित छात्रों के प्राप्तांक और वस्तुनिष्ठ पर आधारित प्राप्तांक में व्यापक भिन्नता की संभावना रहेगी। वस्तुनिष्ठ और विषयनिष्ठ दोनों परीक्षाओं के प्राप्तांक भिन्न होने लाजिमी हैं। वस्तुनिष्ठ प्रणाली में उच्च प्राप्तांक हासिल होते हैं, जबकि विषयनिष्ठ प्रणाली में ऐसा नहीं हो पाता।

बता दें कि स्नातक प्रतिष्ठा के प्राप्तांक का छात्रों के कैरियर में बड़ा महत्व है। यहाँ तक कि कई नियुक्तियों का आधार प्राप्तांक ही बनता है। वैसे मैं विषयनिष्ठ परीक्षा पद्धति में शामिल छात्रों के बीच इस विषमता ने चिंता बढ़ा दी है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ एसएन राय के अनुसार स्नातक तृतीय खंड की परीक्षा में 63107 छात्रों ने परीक्षा फॉर्म भरा था। परीक्षा में 62941 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 1116 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे इस परीक्षा में 45911 परीक्षार्थी सफल रहे।

प्रथम श्रेणी में 27.85% द्वितीय श्रेणी में 45.08% छात्र-छात्राओं ने सफलता प्राप्त की। फेल छात्रों का प्रतिशत 7.42% था। उधर इस विश्वविद्यालय की स्नातक द्वितीय खंड की प्रतिष्ठा परीक्षा 25 नवंबर से प्रारंभ हुई है। यह परीक्षा 18 दिसंबर तक आयोजित होने वाली है।

जबकि प्रतिष्ठा विषयो की परीक्षा विषयनिष्ठ पर ही आधारित है। स्नातक प्रथम खंड की प्रतिष्ठा परीक्षा 20 दिसंबर से संभावित है। विश्वविद्यालय की यह परीक्षा भी विषयनिष्ठ आधारित होगी।

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