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बिहार

कहीं ग्राम सभा के बिना ही करा लिया काम तो कहीं मजदूरों के बदले लगा दिए ट्रैक्टर, CAG ने मनरेगा में भारी गड़बड़ी का किया खुलासा

Janjwar Desk
30 July 2021 4:16 AM GMT
कहीं ग्राम सभा के बिना ही करा लिया काम तो कहीं मजदूरों के बदले लगा दिए ट्रैक्टर, CAG ने मनरेगा में भारी गड़बड़ी का किया खुलासा
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(CAG की रिपोर्ट में बिहार में मनरेगा योजना में गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है)

मनरेगा में गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं, कहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा गड़बड़ी की खबरें सुर्खियां बटोरती हैं तो कभी प्रशासनिक और मनरेगाकर्मियों द्वारा की गई गड़बड़ियां सामने आती रहती हैं..

जनज्वार ब्यूरो, बिहार। मनरेगा की शुरुआत इसलिए की गई थी कि मजदूरों को अपने गांव में ही काम की गारंटी मिले और गांवों में विकास के काम भी हों। लेकिन बिहार में इस योजना में गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। कहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा गड़बड़ी की खबरें सुर्खियां बटोरती हैं तो कभी प्रशासनिक और मनरेगाकर्मियों द्वारा की गई गड़बड़ियां सामने आती रहती हैं।

CAG की जांच में कई गड़बड़ियां आईं पकड़ में

अब सीएजी यानि महालेखाकार की रिपोर्ट में ऐसी ही गड़बड़ी उजागर हुई है, जो ऑडिट के दौरान सामने आई है। सीएजी की रिपोर्ट में मनरेगा में कहीं बगैर ग्राम सभा की अनुशंसा के ही कार्य कराये जाने का जिक्र है तो कहीं नियमों से परे जाकर मजदूरों के बदले ट्रैक्टर से ही काम ले लिया गया है।

CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना के गाइड लाइन में प्रावधान था कि ग्राम सभा से पारित कार्यों को वार्षिक योजना में शामिल करें। हालांकि ऑडिट रिपोर्ट में ज्ञात हुआ कि नमूना जांचित 12 पंचायत में 1 करोड़ 49 लाख के बजट वाले 111 कार्यों को अनुमोदित वार्षिक योजना में शामिल किये बिना ही कार्यान्वित करा लिया गया।

अधिनियम के प्रावधानों का किया गया उल्लंघन

रिपोर्ट में कहा गया है कि नमूना जांचित पंचायतों के पंचायत रोजगार सेवक द्वारा बताया गया कि विभाग एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों के निर्देश के आलोक में कुछ नये प्रकार के कार्यों को लिया गया था। सीएजी ने कहा है कि यह पूरी तरह से अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन था क्योंकि इसमें भागीदारीपूर्ण योजना के सिद्घांत का उल्लंधन किया गया।

इसके अलावा कई मामलों में बिना ग्राम सभा के अनुमोदन के ही काम करा लिए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिनियम में प्रावधान था कि कार्यों की पर्याप्त सूची को अनुमोदित किया जायेगा और प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर समय उपलब्ध कराया जायेगा ताकि कार्य मांगने वालों की मांग को पूरा किया जा सके तथा कार्य निरंतर उपलब्ध रहे। हालांकि राज्य स्तर पर पाया गया कि वर्ष 2014-18 की अवधि में चार पंचायत, 2017-18 में 1030 पंचायत और 2015-16 में भी कई पंचायत में कार्यों का निष्पादन नहीं कराया गया।

कार्यस्थल पर श्रमिकों के लिए नहीं थीं सुविधाएं

वहीं मनरेगा में श्रमिकों के लिए कार्यस्थल पर पर्याप्त सुविधाओं का कोई प्रावधान ही नहीं था। मजदूरी एवं सामग्री अनुपात कायम नहीं रखा गया। कार्यों में ट्रैक्टर का उपयोग किया जो कि प्रावधान के बिलकुल ही विपरीत था। सडक़ों और घरों में मिट्टी भराई के 84 कार्यों में ट्रैक्टर के उपयोग पर एक करोड़ चार लाख की राशि का भुगतान किया गया था। जिसमें कार्यक्रम पदाधिकारी पदाधिकारी द्वारा कार्य की प्रशासनिक अनुमोदन दी गयी थी, जबकि इन कार्यों में मशीन का प्रयोग न कर मजदूरों से कराए जाने का प्रावधान है।

मस्टर रोल बनाने में अनियमितता

इतना ही नहीं मनरेगा में मस्टर रोल में भारी अनियमितता का जिक्र भी रिपोर्ट में किया गया है। मस्टर रोल को कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा निर्गत और प्राधिकृत किया जाना था एवं इसका एक रिकार्ड पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित किया जाना था। नमूना जांचित इकाईयों के ऑडिट रिपोर्ट में निर्गत एमआर को कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा प्राधिकृत नहीं किये जाने से 24.47 लाख, कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा भरे हुए एमआर को अस्वीकृति किये जाने से भी राजस्व की क्षति हुई है।

2014-19 में शुरू हुए कार्य मार्च 2020 तक नहीं हुए पूर्ण

उधर आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए प्राप्त निधियों के गैर उपयोग का मामला भी पकड़ में आया है। इतना ही नहीं, बल्कि मजदूरी भी कम दर पर भुगतान किया गया। कुल मिलाकर 2014-19 के दौरान शुरू किये गये 14 प्रतिशत कार्य मार्च 2020 तक भी अपूर्ण थे।

सीएजी रिपोर्ट के आधार पर अनुशंसा की गयी है कि योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी स्तरों पर पर्याप्त और समर्पित मानवबल प्रदान कर सकती है और योजना पदाधिकारियों को उन्हें नियत कार्य कुशलतापूर्वक करने के लिए विशेष रुप से ग्राम स्तर पर आवश्यक आधारभूत संरचनायें जैसे इंटरनेट सुविधा प्रदान किया जाना चाहिए।

CAG ने क्या की है अनुशंसा

सीएजी ने अपनी अनुशंसा में कहा है कि प्रभावी आइइसी गतिविधियों और नागरिक समाज संस्था इत्यादि को शामिल कर कार्य करने के लिए श्रमिकों को प्रेरित करने एवं गृह स्वामियों को न्यूनतम 100 दिन का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार प्रदान करने के लिए अपेक्षित प्रयास किया जा सकता है।

CAG ने अनुशंसा की है कि प्रभावी रुप से आधार समर्थित भुगतान प्रणाली को सरल बनाने एवं समय पर एफटीओ के सृजन के द्वारा सही लाभार्थियों के खातों में मजदूरी एवं सामग्री अव्यवों में समायोजित भुगतान सुनिश्चित की जा सकती है।

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