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Bike Boat Scam : 15000 करोड़ के बाइक बोट फ्रॉड को लेकर CBI ने दर्ज की FIR, जानें कितना नायाब तरीका था इनकी ठगी का

Janjwar Desk
1 Nov 2021 2:17 PM GMT
Bike Boat Scam : 15000 करोड़ के बाइक बोट फ्रॉड को लेकर CBI ने दर्ज की FIR, जानें कितना नायाब तरीका था इनकी ठगी का
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(15000 करोड़ के बाइक बोट फ्रॉड केस में CBI ने FIR दर्ज की है, देशभर में लाखों लोगों से की गई थी अनूठी ठगी)

Bike Boat Scam : देश के लाखों लोगों से 15000 करोड़ रुपयों से ज्यादा की ठगी करने के लिए निवेशकों को सुनहरे सपने दिखा कर सपने बेचने के गोरखधंधे का इनका तरीका भी नायाब था।

Bike Boat Scam : नीरव मोदी (Neerav Modi scam) और राहुल चौकसी (Rahul Chaurasi fraud case) के फ्रॉड से भी बड़ी धोखाधड़ी कहे जाने वाले बाइक बोट घोटाले (Bike boat fraud case) में सीबीआई ने एफआईआर (CBI registered FIR) दर्ज कर ली है। देश के लाखों लोगों से 15000 करोड़ रुपयों से ज्यादा की ठगी करने के लिए निवेशकों को सुनहरे सपने दिखा कर सपने बेचने के गोरखधंधे का इनका तरीका भी नायाब था।

उत्तर प्रदेश (Uttarpradesh news) की कंपनी बाइक बोट की ओर से किए गए 15,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले के मामले में सीबीआई ने यह केस दर्ज किया है। सीबीआई ने इस मामले में कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर संजय भाटी (Sanjay Bhati) और 14 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने देश भर में लाखों लोगों से ठगी की है।

बाइक बोट कंपनी (Bike Boat Company) के नाम पर लोगों को बाइक टैक्सी में निवेश का ऑफर दिया गया था। इसके तहत 15,000 करोड़ रुपये की ठगी की गई और फिर प्रोमोटर चंपत हो गए। यह घोटाला हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की ओर से किए गए फ्रॉड से भी बड़ा माना जा रहा है।

क्या थी स्कीम और ठगी का तरीका

इस ठगी की स्कीम के तहत लोगों को ऑफर दिया गया था कि वे बाइकों को खरीदने के लिए जो निवेश करेंगे, उसके बदले में उन्हें हर महीने रिटर्न हासिल होगा। इसके अलावा अन्य लोगों को जोड़ने पर कुछ अलग इंसेंटिव देने की भी बात कही गई थी। इसके अलावा कंपनी ने देश के कई शहरों में अपनी फ्रेंचाइजी (Franchise of Bike Boat Company) शुरू करने की भी बात कही। हालांकि यह स्कीम कहीं भी जमीन पर नहीं उतरी और लोगों से फ्रॉड जारी रहा।

इस स्कीम को कंपनी ने 2017 में लॉन्च किया था और 2019 के शुरुआती दिनों तक यह घोटाला लगातार जारी रहा। इस दौरान देश भर से लाखों लोगों ने कंपनी में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया था।

संजय भाटी ने गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाई थी। इसके बाद बाइक बोट नाम से स्कीम की शुरुआत की गई। इसके तहत संजय भाटी और उसके साथियों ने निवेशकों को 1,3,5 या फिर 7 बाइकों में निवेश के बाद आकर्षक रिटर्न का ऑफर दिया गया।

यह कहा गया कि यह बाइक टैक्सी स्कीम है और इसमें पैसे लगाने पर लोगों को बड़ा रिटर्न मिलेगा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और हजारों करोड़ की ठगी करने के बाद संजय भाटी और उसके साथी चंपत हो गए। कहा जा रहा है कि संजय भाटी फिलहाल देश में ही नहीं है।

अभी ईडी कर रही थी जांच

सीबीआई से पहले इस केस में ईडी ने जांच शुरू की थी। एजेंसी की ओर से कंपनी के प्रमोटरों की 216 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की थी। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में लिखा है कि 2 लाख लोगों से ठगी का यह मामला है।

इसके तहत कंपनी ने विज्ञापन जारी करके लोगों से स्कीम में निवेश की अपील की थी। इसके अलावा सीबीआई ने अपनी एजेंसी में पुलिस की ढिलाई पर भी सवाल उठाया है।

पुलिस पर भी उठे हैं सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक एसएसपी और एसपी क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपनी शिकायतों को वापस लेने के लिए दबाव बनाया था। केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के बाइक बोट घोटाले (Bike Boat Scam) की जांच के लिए एफआईआर दर्ज (FIR Register ) कर ली है।

नवंबर 2018 में, कंपनी ने ई-बाइक के लिए इसी तरह की योजनाएं जारी कीं, जिसमें कहा गया था कि पेट्रोल बाइक पंजीकरण और संचालन के मुद्दों का सामना कर रही थीं। ई-बाइक की सदस्यता राशि नियमित पेट्रोल बाइक के लिए निवेश राशि से लगभग दोगुनी थी।

निवेशकों की शिकायतें नोएडा एडमिनिस्ट्रेशन के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों के सज्ञान में थी, जिन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि एसएसपी और एसपी क्राइम ने शिकायतकर्ताओं पर अपनी शिकायतें वापस लेने का दबाव डाला।

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