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निजी स्वतंत्रता बहुमूल्य मौलिक अधिकार, आरोपी की गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए : इलाहाबाद हाइकोर्ट

Janjwar Desk
10 Jan 2021 4:00 AM GMT
निजी स्वतंत्रता बहुमूल्य मौलिक अधिकार, आरोपी की गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए : इलाहाबाद हाइकोर्ट
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https://janjwar.com/national/uttar-pradesh/arrest-of-accused-should-be-the-last-option-important-judgment-by-allahabad-high-court-712443?infinitescroll=1

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एफआइआर दर्ज होने पर भी किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आखिरी विकल्प होना चाहिए और ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना आवश्यक हो...

जनज्वार। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी को अंतिम विकल्प बताया है। इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी है, पुलिस के लिए उसकी गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी अनिवार्य है या हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, उन्हीं मामलों में गिरफ्तारी होनी चाहिए।

अदालत ने बुधवार(6-1-2021) को एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने यह टिप्पणी की। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बुलंदशहर के सचिन सैनी नाम के व्यक्ति को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान की। सचिन सैनी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने कहा कि पुलिस एफआइआर दर्ज करने के बाद अपनी इच्छा से गिरफ्तारी कर सकती है। जिस आरोपी के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी है उसे गिरफ्तार करने को लेकर कोई अवधि तय नहीं है।

अदालत ने बार-बार यह कहा है कि गिरफ्तारी असाधरण विकल्प होना चाहिए, जहां आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक हो। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जोगिंदर कुमार के मामले का भी संदर्भ दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग की तीसरी रिपोर्ट का हवाला दिया है।

इस रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पुलिस में भ्रष्टाचार का एक मुख्य स्रोत है। इसमें कहा गया है कि करीब 60 प्रतिशत गिरफ्तारियां या तो अनावश्यक होती हैं या अनुचित होती हैं और ऐसी अनुचित पुलिस कार्रवाई जेल खर्च में 43.2 प्रतिशत का योगदान करती है।

अदालत ने कहा कि खास तथ्यों और खास मामले की परिस्थितियों के मुताबिक आरोपी की गिरफ्तारी होनी चाहिए। निजी स्वतंत्रता बहुमूल्य मौलिक अधिकार है और बहुत आवश्यक होने पर ही इसमें कटौती होनी चाहिए।

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