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उत्तर प्रदेश

ग्राउंड रिपोर्ट : असल जिंदगी के मुसद्दीलाल, खुद को जिंदा साबित करने के लिए 10 साल से खा रहे दर-दर की ठोकरें

Janjwar Desk
18 Jan 2021 7:33 AM GMT
ग्राउंड रिपोर्ट : असल जिंदगी के मुसद्दीलाल, खुद को जिंदा साबित करने के लिए 10 साल से खा रहे दर-दर की ठोकरें
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[ तस्वीर में भोला सिंह (बांए) और रघुनाथ प्रसाद (दांए) ]

पेंशन लेने के लिए पिछले दिनों जब रघुनाथ प्रसाद गुप्त मिर्जापुर के इंडियन बैंक की चील्ह शाखा पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया,आप तो मर चुके हो, इसलिए आपका खाता बंद कर दिया गया है......


मिर्जापुर से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। समस्याओं के त्वरित निस्तारण की बातें तो सरकारें खूब करती हैं, तहसील और थाना समाधान दिवसों के माध्यम से भी गरीब आम जनोंं के समस्याओं के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया जाता है, लेकिन इसकी असल हकीकत यह है कि छोटी-छोटी समस्याओंं के लिए लोगों को वर्षों से न केवल अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि उनकी पैरों की जूतियां घिस जाने के साथ ही वह भी दौड़ते दौड़ते थक जा रहे हैं, मगर तो उनकी फरियाद सुनी जा रही है और ना ही कोई प्रशासनिक अमला उनके दर्द को समझने की जहमत मत उठाना चाह रहा है।

राजस्व विभाग की लालफीताशाही, अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही से वर्षों से लंबित खतौनी संबंधित मामलों का त्वरित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। बिचौलिए दलाल और राजस्व विभाग के कर्मी निस्तारण में बाधक बने हुए हैं।

राजस्व विभाग की लालफीताशाही का शिकार होकर कोई एक-दो साल नहीं, बल्कि एक दशक से भी ज्यादा समय से कागजों में मृत घोषित कर दिए गए 2 बुजुर्ग खुद को जीवित साबित करने के लिए अधिकारियों की चौखट पर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन इन "जीवित" आत्माओं को ना तो न्याय मिल पा रहा है और ना ही अंधा बना राजस्व विभाग इन्हें "जीवित" देख पा रहा है। ऐसे में इनके समक्ष कहीं तहसील तो कहीं कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठने के सिवा और कोई विकल्प नहीं दिखाई दे रहा है।

हद की बात यह है कि खुद के जीवित होने की न्यायालय में लगाए गए दरकार को भी अधिकारी नजरअंदाज करते आ रहे हैं, जिन्हें ना तो शासन सत्ता का भय है और ना ही न्यायपालिका का?

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के अमोई गांव निवासी भोला सिंह उर्फ श्याम नारायण सिंह पुत्र बसंत सिंह की, जिन्हें राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने उनके भाई राज नारायण की मिलीभगत से राजस्व विभाग के कागजातों में मृत घोषित कर उनके समूचे संपत्ति को उनके भाई के नाम कर दिया है। इसके लिए भोला पिछले 15 वर्षों से अपने को जीवित दिखाकर कागजों में भी जीवित दर्ज करने के लिए दर दर की ठोकर खाते फिर रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है। थाना दिवस तहसील दिवस से लगाए वह मुख्यालय पर अधिकारियों के भी चक्कर काट चुके हैं पर अभी तक किसी का भी दिल नहीं पसीजा है।


दुखी होकर भोला सिंह जनज्वार से हुई बातचीत में कहते हैं, सदर तहसील के ग्राम अमोई की खतौनी सन 1403-1408 फसली के खाता संख्या 166 में कुल 6 गाटा कुल रकबा 1 बीघा 15 बिस्वा 12 धुर पर उनका वह उनके भाई राज नारायण का नाम दर्ज है। इसी खतौनी में राजस्व निरीक्षक शहर का पक-11 का आदेश अंकित है।

24 दिसंबर 1999 के एक आदेश के अनुसार मृतक भोला के स्थान पर राज नारायण पुत्र बसंत का नाम बतौर वारिस अंकित किया गया है। जब यह जानकारी मृतक घोषित कर दिये गये पीड़ित भोला को हुई कि उसके जीवित रहते हुए भी उसे राजस्व निरीक्षक शहर व लेखपाल अमोई द्वारा मृत्य दिखाकर उसकी समस्त जमीन को उसके भाई के नाम कर दिया गया है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

पीड़ित भोला ने तहसील दिवस पर स्वयं के जीवित होने के साथ फर्जी तरीके से उसका नाम काटकर हेराफेरी कर भाई का नाम दर्ज करने पर न केवल आपत्ति दर्ज कराई, बल्कि कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई असर ना होता देख थक हारकर न्यायालय सीजीएम मिर्जापुर की अदालत में गुहार लगाई।

इस पर न्यायालय द्वारा तत्काल शहर कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया गया था कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक शहर व लेखपाल अमोई के विरुद्ध शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करे। उक्त मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोप पत्र भी पुलिस द्वारा धारा 420, 467, 468, 471 भारतीय दंड विधान में सीजीएम न्यायालय को प्रेषित कर दिया गया, बावजूद इसके अभी तक उसे खतौनी में जीवित नहीं दर्शाया गया।

मजे की बात है कि भोला यदि मृत हो गया था तो वारिस के तौर पर क्यों नहीं उसकी पत्नी और बेटों का नाम दर्ज किया गया? यह ना केवल एक अहम सवाल है, बल्कि राजस्व विभाग के फर्जीवाड़े को भी उजागर करता है।

जिले में राजस्व विभाग के फर्जीवाड़े की लंबी फेहरिस्त

[ कबीर दास ]

राजस्व विभाग के फर्जीवाड़े का खेल यहीं नहीं थमता है। अब बारी आती है मिर्जापुर जिले के ही कोन विकास खंड अंतर्गत चील्ह गांव निवासी 70 वर्षीय वृद्ध रघुनाथ प्रसाद गुप्त, जिन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। इस बात की जानकारी उन्हें तब हुई जब वह पेंशन लेने के लिए पिछले दिनों इंडियन बैंक की चील्ह शाखा पहुंचे थे, जहां उन्हें जैसे ही बताया गया कि "आप तो मर चुके हो, इसलिए आपका खाता बंद कर दिया गया है।"

इतना सुनना था कि उनके होश उड़ गये। बहरहाल थके-हारे निराश रघुनाथ प्रसाद गुप्त ने उपजिलाधिकारी सदर से गुहार लगाते हुए उसे कागजों में जीवित दिखाने और दोषी जनों पर कार्रवाई मांग की है, चेताया है कि उसे जीवित दिखाते हुए उसका पेंशन दिलायी जाये, अन्यथा वह मुख्यालय पर धरने पर बैठने को बाध्य होंगे।

यह तो रहा भोला और रधुनाथ प्रसाद का दर्द, अब आईये मिलते हैं इसी सदर तहसील के जिगना थाना क्षेत्र के बौता विश्वेवर सिंह गांव निवासी 72 वर्षीय कबीरदास बिंद से,) जिन्हें महज आवास योजना से वंचित करने के लिये मृत दिखा दिया गया है। कबीरदार अब अपने को जीवित साबित करने के लिए पिछले कई वर्षों से दर-दर की ठोकरें खाते फिर हैं, लेकिन अभी तक इन्हें कागजों में जीवित घोषित नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी तथा बीडीओ की हठधर्मिता के कारण कबीर दास जीवित होकर भी कागजों में मृत बने हुए हैं।

हालांकि इन सभी मामलों में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यह कार्यवाही कब की जाएगी? कब तक जांच पूरी होगी? इस पर सभी चुप्पी साध लेते हैं।

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