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एक्सक्लूसिव : गढ़चिरौली फर्जी एनकाउंटर के बाद परिजनों ने कहा, हमारे बच्चे जा रहे थे शादी में, लेकिन पुलिस ने मार दिया रास्ते में

Janjwar Team
29 April 2018 11:03 AM GMT
एक्सक्लूसिव : गढ़चिरौली फर्जी एनकाउंटर के बाद परिजनों ने कहा, हमारे बच्चे जा रहे थे शादी में, लेकिन पुलिस ने मार दिया रास्ते में
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सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने की इस इनकाउंटर की जांच की मांग

मारे गए युवाओं के गांव से लौटी फैक्ट फाइंडिंग टीम ने दी जनज्वार को विस्तृत जानकारी, बताया कि जिन आदिवासियों की नदी में लाश मिली उनकी नहीं हो पा रही है पहचान, सड़ चुकी हैं लाशें, अभी तक सिर्फ 18 की हुई पहचान, ग्रामीणों का आरोप पुलिस ने मारकर फेंक दिया था इंद्रावती में कि सड़ जाएं लाशें और नहीं हो सके पहचान

सुशील मानव की रिपोर्ट

जनज्वार, गढ़चिरौली। 21 अप्रैल को गढ़चिरौली के जंगलों में हुए तथाकथित 40 आदिवासियों के एनकाउंटर के बाद से आसपास के गाँवों के कुछ गांवों के कई युवा लापता हैं। इस इनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के बीच परिजनों ने आशंका जताई है कि हमारे बच्चों को माओवादी बताकर पुलिस ने मार डाला होगा। हालांकि पुलिस सड़ी हुई लाशों का डीएनए टेस्ट करने का कोरम पूरा कर रही है।

गढ़चिरौली जिले की एटापल्ली तहसील के डट्टेपल्ली गाँव के परिजनों का आरोप है कि एनकाउंटर वाले दिन हमारे 8 बच्चे शादी में गए थे, उसके बाद से वह सभी लापता हैं। परिजनों को उन सभी के मार दिए जाने की आशंका है, क्योंकि इन्हीं 8 युवाओं के साथ गयी एक लड़की की लाश गांव वालों ने पहचान कर ली, जिसे पुलिस ने इनकाउंटर में मारकर फोटो जारी की है। पुलिस के मुताबिक मारी गयी लड़की माओवादी थी।

27 अप्रैल को स्थानीन वकील लालसू नागोटी और सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पुगाटी ने गट्टेपल्ली और कसानूर गांवों को दौरा किया। गट्टेपल्ली वह गांव है जहां के 8 अविवाहित लड़के—लड़कियां गायब हैं और कसानूर वह गांव है, जहां वे शादी में गए थे और शादी के दिन यानी 21 अप्रैल से ही गायब हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस ने खोजबीन के नाम पर मारे गए सभी आठ मृतकों के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड ले लिये हैं। मारे गये युवाओं की उम्र 14—16 साल के बीच है, सभी अविवाहित हैं।

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गांव का दौरा कर लौटे लालसू नागोटी ने बताया जब कहीं यहां आदिवासी गांवों में शादी होती है तो आसपास के अविवाहित युवा शादियों में जाते हैं और रातभर नाचते हैं। उसी परंपरा के अनुसार वे भामरागढ़ तहसील के कसानूर गांव में जा रहे थे। गट्टेपल्ली से कसानूर 10—12 किलोमीटर है। पर ये 8 युवा कसानूर गांव शादी में नहीं पहुंचे, उससे पहले ही 21 अप्रैल को गायब हो गए और जब 22 अप्रैल को पुलिस ने मारे गए 16 माओवादियों की पहली सूची जारी की तो उसमें उस लड़की की फोटो है, जो इन 8 युवाओं के साथ थी।

गट्टेपल्ली गांव के युवा आदिवासी जिनका कोई नक्सली रिकॉर्ड नहीं रहा है और वे गायब हैं

1. MangeshbukaluAtram (मंगेश बुकालू अटराम)2. RasopochaMadavi (रासो पोचा मडावी)3.Anita DevuGawde (अनीता देवू गावड़े)4.BujjikarweUsendi (बुज्जी कारवे उसेंडी)5.IrpawatteMadavi (इरपा वाट्टे मडावी)6. MangeshChunduMadavi (मंगेश चुंदू मडावी)7.Rasochukkumadavi (रासो चुक्कू मडावी)8.NussePeduMadavi (नुस्से पेदु मडावी)।

वकील लालसू नागोटी के अनुसार, 'जिस गांव कसानूर में शादी थी, वहां के लोगों से हमने जानना चाहा कि क्या गट्टेपल्ली गांव के युवा शादी में आए थे, तो सबने इनकार किया, जबकि गट्टेपल्ली के युवा गांव से शादी के लिए निकले थे। कसानूर गांव महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़ा गांव है। यहां बगल में इ्ंद्रावती नदी बहती है। मारे गए 40 आदिवासियों में से 16 लाशों के अलावा जो सड़ी लाशें मिली हैं, वह सभी इंद्रावती नदी में मिली हैं। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि पुलिस ने इन 8 युवाओं को भी वहीं मार दिया होगा।'

दूसरी तरफ 21 अप्रैल को ही हुए एनकाउंटर में साईंनाथ और सीनू को स्पॉट पर मारे जाने की जो बात पुलिस ने बतायी, वह सरासर झूठ है। जनज्वार को मिली जानकारी के अनुसार इन दोनों ने नंदू नाम के माओवादी समेत अन्य 5 लोगों के साथ आत्मसमर्पण किया और पुलिस ने उन्हें जिंदा पकड़ा। लेकिन जब नंदू के घर वाले पुलिस थाने में पहुंचे तो पुलिस ने दूसरी जगह पे एनकाउंटर हुआ बता दिया।

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गट्टेपल्ली के अलावा राजाराम के अलावा एक और गांव के लोगों ने अपने घरों से युवाओं के लापता होने की बात पुलिस को बताई है। 27 अप्रैल को गट्टेपल्ली गांव के लोग गढ़चिरौली एसपी से मिले तो उन्होंने कह दिया कि सड़ी लाशों को गढ़चिरौली जिला अस्पताल जाकर चेक कर लो। लेकिन लाशें इतनी सड़ चुकी हैं कि पहचान असंभव है। ऐसे में परिजनों ने अपना डीएनए सैंपल के लिए खून दे दिया है।

गौरतलब है कि पुलिस एनकाउंटर में मारे गई 40 लोगों में से कई के चेहरे महाराष्ट्र पुलिस द्वारा इस तरह क्षत-विक्षत कर दिये गए हैं कि वो पहचान में नहीं आ रहे। ग्रामीणों का दावा है कि फर्जी एनकाउंटर में मारे गये 40 लोगो में से कम से कम 30 गाँव के बेकसूर लोग हैं, जिन्हें पुलिस वाले उनके घर से उठाकर ले गई थी।

सारे लोगों को एक ही जगह इकट्ठा करके मारा गया है और बाद में लाश को इधर—उधर फेंककर तीन एनकाउंटर करने जैसा दिखा दिया गया। बाकी लोग गट्टेपल्ली गाँव के हैं जो कसानूर गाँव में एक शादी में आये थे। पुलिस को जानकारी थी कि शादी में कुछ नक्सली में आएंगे।

सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस के लिए आदिवासी सिर्फ एक नंबर हैं। महाराष्ट्र सरकार ने नंबरिंग बढाने पर (ज्यादा हत्याएँ करने पर) ईनाम देने की घोषणा करके आदिवासियों की हत्याओं के लिए पुलिस को प्रोत्साहित करती है।

दरअसल सारी फसाद आयरन माइनिंग को लेकर है। दरअसल गाँव वाले माइनिंग का विरोध करते रहे हैं। गाँव के गाँव खत्म कर दिया जा रहे हैं, लोग डरकर गाँव छोड़कर भाग जाएँ। ताकि माइनिंग के काम में कंपनियों को कोई समस्या न हो। जिस गढ़चिरौली के 348 हेक्टेयर माइनिंग प्रोजेक्टस पर काम चल रहा है उसके आस पास भी मड़िया गोड़ आदिवासियों की छोटी छोटी बस्तियाँ हैं।

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सूरजगढ़ के पहाड़ों पर ठाकुरदेव का मंदिर है जिन्हें मड़िया गोड़ आदिवासी देवताओं का देवता मानते हैं और इन पहाड़ियों में खनन का विरोध करते हैं। जबकि अधिकांश लौह अयस्क इन्हीं सूरजगढ़ की पहाड़ियों में है।

सरकार द्वारा माइनिंग का प्रपोजल लॉयड स्टील आयरन और माइनिंग कंपनी को देन के बाद से ही इन चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों में महाराष्ट्र पुलिस की स्पेशल टीम सी-60 द्वारा फर्जी एनकाउंटर में आदिवासियों की हत्या करने के मामले बढ़े हैं। उसके प्रतिरोध नक्सली हमला भी बढ़ा है। पिछले साल लोगों ने लौह अयस्क वाले 70 ट्रक जला दिए गये थे। तब से खदान एरिया को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उधर पत्रकार या गाँव के लोगो का जाना एलाऊ नहीं है।

फर्जी इनकाउंटर से पहले मिलाया गया खाने में जहर
प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) तेलंगाना स्टेट कमिटी के प्रवक्ता जगन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि पुलिस ने उनके काडर्स और कुछ निर्दोष गांव वालों को मारने से पहले जहर दिया था। इलाके में ऐसी अफवाह जोरों पर है कि पुलिस ने एक पूर्व काडर से होमगार्ड बने व्यक्ति की मदद से शादी समारोह में खाने में जहर मिलाया था। तेलंगाना स्टेट कमिटी के नक्सलियों ने इसे फेक एनकाउंटर कहा और प्रेस रिलीज जारी कर 4 मई इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी बंद का आवाहन करने की घोषणा की।

बताया जा रहा है कि कई नक्सल दूसरे दिन एक और एनकाउंटर में मार दिए थे। वह भी 21 अप्रैल को शादी में गए थे। इसके अलावा इंद्रावती नदी के दूसरी ओर आराम कर रहे नक्सलियों के लिए भी बड़ी मात्रा में खाना भेजा गया था। उस खाने में भी जहर था।

गढ़चिरौली के डॉक्टर एसपी अभिनव देशमुख ने कहा, ‘पहले, डॉक्टरों ने मारे गए नक्सलियों का विसरा प्रिजर्व नहीं किया था, क्योंकि मौत का कारण स्पष्ट था। न ही हमें किसी संदेह के आधार पर विसरा प्रिजर्व करने और केमिकल विश्लेषण के लिए भेजने को कहा गया था।’ (इनपुट गढ़चिरौली से)

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