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आंदोलन

बहुत होते हैं 75 साल, करो या मरो

Janjwar Team
10 Aug 2017 8:58 AM GMT
बहुत होते हैं 75 साल, करो या मरो
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अगस्त क्रान्ति की याद में श्रमिक संयुक्त मोर्चा की सभा व रैली

रुद्रपुर, 9 अगस्त। अगस्त क्रान्ति की 75वीं सालगिरह को श्रमिक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में मजदूरों ने याद किया, शहीदों से प्रेरणा ली और अपने हक के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यह दिन 1925 में काकोरी काण्ड का भी प्रतीक दिवस था। इस अवसर पर स्थानीय रोडवेज स्थित शुक्ला पार्क में सभा हुई और मुख्य बाजार में जुलूस निकला।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1942 के इस महान दिवस को 75 साल बीत गये लेकिन आम जन के दुख तकलीफ आज पहले से ज्यादा बढ़ गये हैं। तब अंग्रेजों भारत छोड़ों का नारा था। गोरे अंग्रेज तो चले गये, लेकिन काले अंग्रजों का लूट दमन आज भी जारी है। आज मेहनतकशों के लिए 'करो या मरो' का नारा पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।

वक्ताओं ने कहा कि आज मजदूरों का चौतरफा दमन बढ़ रहा है। डेढ़ माह से एरा कम्पनी के परिवार की महिलाएं बच्चे तक कलेक्ट्रेट में धरनारत हैं लेकिन श्रमिकों का वेतन दिलाने की जगह प्रशासन की मिली भगत से मालिक ने कम्पनी की अवैध बन्दी कर दी। महिन्द्रा श्रमिक यूनियन की मान्यता के लिए संघर्षरत हैं, हक के लिए संघर्षरत महिन्द्रा सीआईई के 10 प्रतिनिधि निलम्बित हो गये। एलजीबी, आटोलाइल, मन्त्रीमेटेलिक्स, आईपी शाफ्टकॉम, टीवीएस से लेकर पारले, ब्रिटानिया, शिरडी तक श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं, लेकिन शासन—प्रशासन—श्रम अधिकारी प्रबन्धकों की ही भाषा बोल रहे हैं, पुलिसिया दमन का सहारा ले रहे हैं। इसलिए मेहनतकश के लिए संघर्ष ही रास्ता है।

वक्ताओं ने कहा कि जब मजदूरों के श्रम अधिकार तेजी से छीने जा रहे हों, महंगाई बेलगाम हो, रोजगार तेजी से छिन रहे हों, किसान आत्महत्याएं करने को मजबूर हो, उसी समय जनता में तरह—तरह से भ्रम फैलाया जा रहा है, जाति व धर्म के नाम पर समाज में बंटवारे तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं, लोगों की मानसिकता को दूषित किया जा रहा है। यह 1942 से भी खतरनाक दौर है। ऐसे में मेहनतकश को अपनी मुक्ति के लिए ज्यादा कठिनाई भरे रास्ते पर चलना होगा।

आज के कार्यक्रम में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी व कोषाध्यक्ष प्रमेद तिवारी के नेतृत्व में महिन्द्रा सीआईई (लालपुर व पंतनगर), महिंद्रा & महिंद्रा, एरा, राने मद्रास, आटोलाइन, थाई सुमित नील आटो, नैस्ले कर्मचारी संगठन, पारले, परफेटी, वोल्टास, डेल्टा, इंट्रार्क, यूनियनें तथा इंकलाबी मजदूर केन्द्र, मजदूर सहयोग केन्द्र, सीटू, सीपीआई, भूमिहीन संगठन, यूकेडी आदि संगठन शामिल रहे।

सभा को पुर्णिमा, मुकुल, राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, मणिन्द्र मण्डल, भरत जोशी, संजीत विश्वास, उत्तम बिष्ट, धनवीर, पुरुषोत्तम, अर्जुन, ऋसिपाल आदि ने सम्बोधित किया। संचालन दिनेश तिवारी ने किया।⁠⁠⁠⁠

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