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दलितों का पहला स्वत:स्फूर्त आंदोलन, देश के हर शहर का आसमां हुआ नीला

Janjwar Team
2 April 2018 6:07 PM GMT
दलितों का पहला स्वत:स्फूर्त आंदोलन, देश के हर शहर का आसमां हुआ नीला
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एससी/एक्ट में हुए बदलाव के खिलाफ उबल पड़ा है देश, पहली बार सड़कों पर स्वतंत्र ढंग से उतरे हैं अपने अधिकारों के लेकर दलित छात्र, युवा, महिलाएं और नौजवान

जनज्वार पर दलित-आदिवासी आंदोलन की सबसे बड़ी कवरेज

देश के हर शहर का आसमां है नीला, बड़ी बात ये कि नहीं दिया था कि किसी संगठन ने आंदोलन की कॉल, सोशल मीडिया की है जुटान

जनज्वार। कानून के बदलाव के खिलाफ आम दलितों—आदिवासियों में गुस्सा व्यापक और गहरा था, पर इसे कोई भी पार्टी या संगठन नहीं पकड़ पाया। वे एक दूसरे का मुंह ताकते रहे और देश के दमितों और गरीबों ने अपनी ताकत दिखा दी। दिखा यह भी दिया कि अब उन्हें अपनी अगली लड़ाई के लिए नया नेतृत्वकारी और नए संगठन चाहिए।

दलित—आदिवासी और शोषित नीले झंडे को सामाजिक बराबरी का सबसे बड़ा चिन्ह मानते हैं। देश के हर कोने में आज भारत बंद के दौरान बाबा साहब आंबेडकर जिंदाबाद, जय भीम के नारों से आकाश गूंज उठा। तमाम हिंसा की घटनाओं के बीच भी आंदोलन सफल रहा।

आंदोलन में हिस्सेदारी करने वाले मुकेश बताते हैं, मध्य प्रदेश में जो हिंसक घटनाएं सामने आईं, उन्हें भाजपा के इशारे पर हिंदू संगठनों ने अंजाम दिया। बदरंग दल, करणी सेना समेत तमाम संगठनों, आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ मिलकर हमारी हिम्मत को तोड़ने के लिए हिंसक वारदातों को अंजाम दिया, मगर यह आंदोलन सफल होकर रहेगा, कोई इसे असफल नहीं कर सकता।

इस आंदोलन ने मोदी सरकार की सांसत जरूर बढ़ा दी है। चुनावी वर्ष और एकजुटता की ताकत को देख दलित नेता एकजुट और मुखर हुए हैं।

जातिमुक्ति संगठन के नेता जेपी नरेला ने जनज्वार से खुद फोन करके जानना चाहा कि आखिर इस आंदोलन की कॉल किसने दी, कैसे इतना बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ। कौन सी ताकत काम कर रही है इसके पीछे।

एससी/एसटी एक्ट में हुए बदलाव के खिलाफ भारत बंद में 1 नवजात शिशु समेत 4 लोगों की मौत

इसी तरह दलितों के मसलों को लेकर सक्रिय रहने वाले पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी का कहना है कि फेसबुक पर कुछ अनजाने लोगों ने एससी/एसटी एक्ट में हुए संशोधन के खिलाफ आंदोलन की अपील की है। किसी पार्टी या संगठन ने कोई कॉल नहीं दी थी इस बार।

इलाहाबाद में डॉ. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा) एवं दर्जनों सहयोगी संगठनों की तरफ से एक मैसेज फैल रहा था जिसने उन्होंने कहा था कि वे एससी/एसटी ऐक्ट मे बदलाव के खिलाफ 2, अप्रैल 2018 को दोपहर 12 बजे इलाहाबाद के सिविल लाईन स्थित सुभाष चौराहे पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर भारत बन्द का समर्थन करेंगे। साथ ही अन्य संगठनों से अनुरोध किया था कि एससी /एसटी ऐक्ट मे बदलाव के खिलाफ भारत बन्द के राष्ट्रव्यापी आन्दोलन मे भारी से भारी संख्या में अपने अपने संगठन के झण्डे बैनर के साथ सुभाष चौराहा सिविल लाईन्स इलाहाबाद पहुंचे।

इसी तरह के हजारों मैसेज सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फैल रहे थे, जिसने इस बंद को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

किसान नेता और स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव कहते हैं, सुप्रीम कोर्ट का हाल ही में एस सी /एस टी (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटी) एक्ट पर आया फैसला इस क़ानून के उद्देश्य के ही विरुद्ध है। इस फैसले से हमेशा अत्याचार का शिकार समाज और भी कमजोर होगा। इस क़ानून के दुरूपयोग को रोकने के लिए समुचित प्रावधान किये जा सकते हैं, परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से इस पूरे क़ानून को ही निष्प्रभावी बना दिया है, इसलिए सरकार को इस फैसले के खिलाफ तुरंत पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर करनी चाहिए और इस बार इस मुक़द्दमे की पैरवी गंभीरता से करनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक दलितों की व्यापक एकता को भांपकर मोदी सरकार फिर कोई चालाकी भरा दांव खेलेगी। वह दलितों को भरमाने का फिर से एक प्रयास करेंगी। क्योंकि भाजपा दलितों से उस तरह का पंगा नहीं ले सकती, जिस तरह वह अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों के खिलाफ रहती है।

अपने हक और अधिकारों को लेकर उपजे इतने बड़े आंदोलन के बाद कुछ आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि इस स्थिति में अगर दलितों के इस आंदोलन को कोई रास्ता नहीं मिला तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। देशभर के प्रदर्शनकारी जय भीम के नारों के साथ एक ही मांग दोहरा रहे हैं कि एससी/एसटी एक्ट जैसा भी था भाजपा सरकार उसे हू—ब—हू उसी स्थिति में दोबारा लागू करे। अगर ऐसा नहीं किया तो उसे इसके खतरनाक परिणाम भुगतने होंगे।

आज गुरुग्राम में भी दलितों की मांगों के खिलाफ पूरा गुरुग्राम जाम रहा और NH8 बंद कर दिया। इस दौरान मंडलायुक्त व उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन व ज्ञापन दिया गया। सभी गुरुग्राम वासियों ने अपना रोष प्रदर्शित करते हुए मांग दोहराई कि भाजपा सरकार दलितों के शोषण के लिए जो कानून बनाने जा रही है उसे वापस ले। एससी/एसटी एक्ट को पहले की तरह लागू करे। इसमें मारुति कर्मियों ने अपनी एक दिन की छुटी भरकर प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सुप्रीम कोर्ट के वकील कुमार हर्ष का कहना है कि दलितों के इस स्वतः स्फूर्त आंदोलन की राष्ट्रीय ताकत को देख कॉरपोरेट मीडिया अकबका गयी है। उसे सिर्फ अराजकता दिख रही है। पर संघर्ष में शामिल करोड़ों लोग जानते हैं कि इस संघर्ष के पहिया को थमने नहीं देना है जबतक सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को वापस नहीं लेता।

सभी आंदोलनकारियों द्वारा आंदोलन को शांतिपूर्वक व उत्साही तौर पर बूढ़े, महिला समस्त वकील कम्युनिटी द्वारा बिना किसी सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के सरकार को यह दिखा दिया है कि दलित एकता व उनके संविधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए किसी भी आंदोलन के लिए तैयार हैं।

इस सबके बीच एससी / एसटी एक्ट मामले में पुनर्विचार वाली सरकार की तरफ से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि आज दलितों द्वारा देशभर में इतने बड़े बंद आयोजित करने के बाद आज केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उसके द्वारा पूर्व में दिए गए एससी/एसटी फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए याचिका दाखिल की गई थी।

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