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सरकार ने माना कोरोना वायरस से संकट में भारतीय उद्योग, निपटने के लिए अब किये जाएंगे उपाय

Nirmal kant
20 Feb 2020 9:21 AM GMT
सरकार ने माना कोरोना वायरस से संकट में भारतीय उद्योग, निपटने के लिए अब किये जाएंगे उपाय
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वित्तमंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार बंदरगाहों और माल की आवाजाही से सम्बंधित चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल जल्दी उपाय करेगी। बंदरगाहों पर माल की मंजूरी में तेजी लायी जाएगी और इसके लिए चौबीसों घंटे कर्मचारी काम पर लगाए जायेंगे..

जनज्वार। आखिर केंद्र सरकार को मानना ही पड़ा कि चीन में कोरोना वायरस महामारी के चलते भारतीय उद्योग संकट में घिर गया है। इस संकट से निपटने के उपाय तलाशने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को मंगलवार 18 फरवरी को विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलानी पडी।

स बैठक में फार्मा, स्वास्थ्य और सर्जिकल उपकरण, रसायन, पेण्ट एवं उर्वरक, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी हार्डवेयर, वाहन, दूरसंचार, मोबाईल उपकरण विनिर्माता और स्टील अदि क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। दरअसल बैठक बुलाना इसलिए ज़रूरी हो गया क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से चीन से कच्चे माल की आवक लगातार प्रभावित हो रही है। इसका सबसे ज़्यादा असर फार्मा, रसायन और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

बैठक में व्यापारियों की चिंता दूर करने के मक़सद से वित्तमंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार बंदरगाहों और माल की आवाजाही से सम्बंधित चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल जल्दी उपाय करेगी। बंदरगाहों पर माल की मंजूरी में तेजी लायी जाएगी और इसके लिए चौबीसों घंटे कर्मचारी काम पर लगाए जायेंगे।

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सूत्रों की मानें तो कुछ क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने चीन से कच्चा माल नहीं आने या बंदरगाहों पर उसके फंसे रहने की शिकायत की। उनका कहना था कि माल की खेप बंदरगाहों पर अटकी हुई है क्योंकि चीन के अधिकारी समुचित कागजात उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। चीन में अधिकांश अधिकारी कोरोना वायरस से जूझने में लगे हैं।

खाद्य पदार्थ क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपनी बात कहते हुए बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया और चीन उनके माल का बड़ा खरीदार है लेकिन वहां निर्यात में आ रही दिक्कतों के चलते उनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं। वहीं फार्मा और रसायन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपना रोना रोते हुए कहा कि कच्चे माल की किल्लत की वजह से उनका धंधा चौपट हो रहा है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बारे में वे प्रधानमंत्री कार्यालय में बात करेंगी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के तमाम विभागों के सचिव अलग-अलग क्षेत्रों का जायजा लेंगे और संबंधित मंत्रालयों के सचिवों के साथ बात कर उन्हें उस उद्योग के हिसाब से समाधान सुझाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कोरोना वायरस का प्रकोप फैलने से पैदा हुई अनचाही स्थिति से निपटने के लिए तात्कालिक एवं मध्यावधि उपायों का ब्लूप्रिंट लेकर आएगी।

बैठक के बाद मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को बताया कि कोरोना वायरस से उत्त्पन्न हुई स्थिति से निपटने के लिए सरकार विभिन्न उपायों पर विचार कर रही है। इसमें एसएमई (Small And Medium-Sized Enterprises) क्षेत्र को कर्ज में राहत देने के उपाय भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तमाम क्षेत्रों की कंपनियां चीन के अपने आपूर्तिकर्ताओं और साझेदारों के मामले में 'फोर्स मेज्योर' प्रावधान का उल्लेख करेंगी। आमतौर पर अनुबंधों में इस तरह का प्रावधान रखा जाता है। यह प्रावधान किसी भी प्राकृतिक आपदा या अवांछनीय स्थिति पैदा होने पर संबंधित पक्षों को सभी तरह के दायित्वों से मुक्त कर देता है।

गौरतलब है कि सरकार ऐसे बुनियादी औषधि उत्पादों और कच्चे माल को हवाई मार्ग से लाने के बारे में सोच सकती है जिन पर सीमा शुल्क कम है या एकदम नहीं लगेगा। सच तो यह है कि भारत सक्रिय दवा सामग्रियों के लिए चीन से होने वाले आयात पर बुरी तरह निर्भर है।

नीति आयोग ने बुधवार 19 फरवरी को औषधि क्षेत्र की कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक की। यह बैठक चीन में फैले कोरोना वायरस के कारण दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख रसायन की आपूर्ति में बाधा के प्रभाव पर चर्चा के लिये बुलायी गयी थी।

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सूत्रों के अनुसार प्रमुख रसायन (एपीआई) के घरेलू स्तर पर बनाने को तेज़ी देने और चीन से आयात पर निर्भरता में कमी लाने के इरादे से बैठक में कई उपायों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत ने की। इसमें औषधि विभाग के सचिव पी डी वघेला और बायोकॉन की चेयरपर्सन तथा प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ समेत अन्य लोग मौजूद थे।

ता दें कि चीन में कोरोनावायरस के रोज सामने आने वाले नए मामलों की तादाद जहां 5,000 से घटकर 2,000 रह गई है, वहीं अब तक इस बीमारी से 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है तथा 75,000 संक्रमित हो चुके हैं। चीन के बाहर इसका विस्तार सीमित है हालांकि मीडिया में ऐसी डराने वाली खबरें आती रही हैं कि वैश्विक आबादी का दो तिहाई हिस्सा इसकी चपेट में आ सकता है। अगले 7 से 10 दिन में 10 करोड़ से अधिक चीनी कर्मचारी दोबारा काम पर लौटेंगे।

कोरोना वायरस की यह बीमारी वुहान प्रांत के हुबेई शहर से शुरु हुई है। वुहान में चीन के वाहन उत्पादन का 9 फीसदी तथा बड़ी तादाद में कलपुर्जों का उत्पादन होता है। वैश्विक वाहन आपूर्ति शृंखला हुबेई की बंदी से सबसे अधिक प्रभावित हुई है। चीन के संपत्ति बाजार पर भी इसका बहुत बुरा असर होगा।

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