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नाबालिग नौकरानी के उत्पीड़न में महिला सिविल जज निलंबित

Janjwar Team
1 Feb 2018 11:20 AM GMT
नाबालिग नौकरानी के उत्पीड़न में महिला सिविल जज निलंबित
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पहले भी घरेलू नौकर के साथ मारपीट के लिए चर्चा में आ चुकी हैं महिला जज दीपाली शर्मा...

जनज्वार, हरिद्वार। न्याय की कुर्सी पर बैठे लोग ही जब उत्पीड़न और अन्याय की घटनाओं में संलिप्त पाए जाएं तो आम इंसान का भरोसा आखिर किस पर रह जाएगा। बाकी सबसे तो जनता पहले से ही नाउम्मीद हो चुकी है अब जो थोड़ा—बहुत भरोसा न्याय पर बचा था वह भी डिगने लगा है।

हालिया घटना एक महिला सिविल जज से जुड़ी है, जिनके घर से एक नाबालिग बच्ची को मुक्त कराया गया है, जिसका घोर उत्पीड़न हो रहा था। बच्ची के शरीर और चेहरे पर मौजूद चोट और घावों के निशान उत्पीड़न की कहानी खुद बयां कर देते हैं। हालांकि इस मामले में संलिप्तता की पुष्टि होने के बाद नैनीताल उच्च न्यायालय ने संबंधित सिविल जज दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया है।

घटनाक्रम के मुताबिक एक शिकायत मिली थी कि महिला सिविल जज दीपाली शर्मा एक घरेलू नौकरानी के बतौर उनके घर में काम करने वाली बच्ची का बुरी तरह उत्पीड़न कर रही हैं और उन्होंने उसे बंधक बनाकर घर में रखा हुआ है। शिकायत के आधार पर जिला जज ने पुलिस और बाल कल्याण परिषद के पदाधिकारियों को साथ लेकर उस बच्ची को चोटिल अवस्था में उनके घर से मुक्त कराया।

इतना ही नहीं जिला जज ने अपनी आंखों के सामने नाबालिग लड़की का मेडिकल कराया, जिसमें उसके उत्पीड़न के कई निशान नजर आए। नाबालिग बच्ची के शरीर पर 20 चोटों के निशान थे, जिसमें सिर में भी गहरी चोट थी। मेडिकल कराने के बाद हरिद्वार के बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेज दिया गया है।

वहीं हरिद्वार के जिला जज राजेंद्र सिंह की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने सिविल जज के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। दीपाली शर्मा को फिलहाल जिला एवं सत्र न्यायाधीश टिहरी के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। हालांकि दीपाली शर्मा का कहना है कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है, मैंने बच्ची का किसी भी तरह से उत्पीड़न नहीं किया है।

वहीं नाबालिग के पिता के बतौर सामने आए शख्स ने कहा है कि जज महोदया ने मेरी बच्ची का किसी भी तरह से उत्पीड़न नहीं किया है। अगर बच्ची का उत्पीड़न नहीं किया गया है तो जो चोटों के निशान उसके शरीर पर मौजूद हैं वो कहां से आए। वो भी एक दो नहीं पूरे 20 जगह शरीर में घाव हैं।

पुलिस को दिये बयान में 13 साल की नाबालिग लड़की ने बताया कि उससे घर का काम कराया जाता था और बदले में खाना भी नहीं दिया जाता था। उसके साथ डंडे से मारपीट की जाती थी। इस बात की पुष्टि डॉक्टर ने भी अपनी रिपोर्ट में की है कि बच्ची के शरीर में जो घाव के निशान हैं लगता है वो किसी धातु या डंडे के तेज वार करने से हुए होंगे।

दीपाली शर्मा घरेलू नौकरों के उत्पीड़न को लेकर पहले भी चर्चा में आ चुकी हैं। सहारनपुर में तैनाती के दौरान भी उन पर उनके दलित नौकर ने उत्पीड़न का आरोप लगाया था। नौकर को उन्होंने सरेआम थप्पड़ जड़ा था, जिससे उनकी काफी छीछालेदर हुई थी।

एसएसपी कृष्ण कुमार वीके का इस घटना पर कहना है कि हाइकोर्ट को हरिद्वार में तैनात सिविल जज दीपाली शर्मा के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वह एक नाबालिग किशोरी का उत्पीड़न कर रही हैं। कहा गया था कि वह बच्ची के साथ मारपीट करती हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने जिला जज हरिद्वार की जांच का निर्देश दिया था, जिस पर जिला जज राजेन्द्र सिंह चौहान, एडीजे अमनिंदर सिंह, एसएसपी कृष्ण कुमार वीके, एएसपी रचिता जुयाल और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम 29 जनवरी को रोशनाबाद स्थित जजेज कालोनी में सिविल जज दीपाली शर्मा के घर पहुंची और वहां से 13 साल की घायल बच्ची को मुक्त कराया।

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