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जनज्वार विशेष

मई दिवस का झंडा क्या लहराएंगे मजदूर, जब दिल्ली में ही 100 रुपए पर खटते हैं लाखों

Prema Negi
1 May 2019 1:31 AM GMT
मई दिवस का झंडा क्या लहराएंगे मजदूर, जब दिल्ली में ही 100 रुपए पर खटते हैं लाखों

निजी स्कूलों में कर्मचारी 2500-3000 पर काम करने को विवश हैं। फैक्ट्री, ऑफिस, दिल्ली मेट्रो और अन्य जगहों पर भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है....

देवेन्द्र भारती, सामाजिक कार्यकर्ता

किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है। मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती।

लेकिन आज देश की राजधानी दिल्ली में ही बड़े स्तर पर मजदूरों के साथ अन्याय और उनका शोषण हो रहा है। देश के राजधानी दिल्ली में मजदूरों की मजदूरी के बारे में बात की जाए तो दिल्ली सरकार के तय मानक अकुशल 14000, अर्धकुशल 15400, कुशल 16962 रुपया प्रत्येक माह 8 घंटे का है, लेकिन इससे बहुत कम मजदूरी पर मजदूरों से काम कराया जाता है।

जब दिल्ली के इलाके का अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि कुछ छोटे निजी स्कूलों में कर्मचारी 2500-3000 पर काम करने को विवश हैं। फैक्ट्री, ऑफिस, दिल्ली मेट्रो और अन्य जगहों पर भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। नांगलोई, मंगोलपुरी, किराड़ी, सुल्तानपुरी क्षेत्र में 3000-5000 रुपया में काम करने वाले की संख्या लाखों में है। कमोबेश यही हालात दिल्ली और एन सी आर में हर जगह की है मायापुरी, नारायण, बवाना, नरेला, ओखला जैसे औद्योगिक क्षेत्र में भी 4500-6500 पर काम करने का औसतन आंकड़ा मिला है, जबकि यह न्यूनतम वेतन से काफी कम है।

दिल्ली श्रम विभाग से एक आरटीआई में कुछ प्रश्न पूछा गया उससे भी यही पता चलता है कि सरकार का रुख इस तरह के मामले में पूरी तरह से ढुलमुल है। दिल्ली मेट्रो में बड़े स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम देखने को मिला। आरटीआई के जरिये यह जानकारी मिली कि दिल्ली मेट्रो में काम करने के लिए कुछ दिन पहले 12 कंपनियों से हर दिन 150 कर्मचारी लिए जाते हैं, लेकिन यह कंपनियां अपने कर्मचारी को तय न्यूनतम वेतन नहीं देती हैं।

एनडीएमसी क्षेत्र में 225 शौचालय हैं जिनके रखरखाव की जिम्मेवारी क्रमशः supreme advertisement pvt ltd -175, fumes international -06, pee /aar builders -02, sulabh international -07, R K jain & hospitality pvt ltd - 35 के पास है और एनडीएमसी इसके लिए 500 रुपया प्रत्येक कर्मचारी प्रत्येक दिन के हिसाब से देती है, लेकिन वास्तविकता में एनडीएमसी के इन शौचालय में कर्मचारियों को प्रतिमाह 6000-7000 के हिसाब से प्रत्येक महीने 12 घंटे का वेतन दिया जा रहा है।

दिल्ली के अस्पताल में गार्डों की बहाली में भी इसी तरह की धांधली है। गॉर्ड से काम 12 घंटे करवाया जाता है और उन्हें 9,000-10,000 रुपया वेतन मिलता है। अस्पताल और गार्डों की बहाली के लिए अनुबंध करने में भी व्यापक पैमाने पर घालमेल देखने को मिला है, जबकि निजी व्यावसायिक जगहों पर गार्डों की हालत और ज्यादा दयनीय है वहां पर गार्डो को 5500-6500 रुपये 12 घंटे का दिया जा रहा है।

श्रमिक कानून में है खामियां

कोई कर्मचारी कारखानों के मालिक की शिकायत जब श्रम विभाग में करता है तो कारखाने व अन्य जगहों से जबाब आता है कि यह हमारे यहां काम नहीं करता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को साबित करना पड़ता है कि वह वहां काम करता था। चूंकि उसके पास कोई सबूत नहीं होता है जैसे किसी प्रकार का कोई नियुक्ति पत्र, कार्ड, सैलरी स्लिप वगैरह, इन सबके अभाव में दोषी मालिक व कंपनी को सजा नहीं मिल पाती है।

न्यूनतम वेतन कितना है, इसकी जानकारी आम लोगों के पास नहीं है। सरकार द्वारा सिर्फ खानापूर्ति की जाती है और न्यूनतम वेतन को विभाग के वेबसाइट पर डाल दिया जाता है और आम जनता तक कैसे यह न्यूनतम वेतन कितना है, इसका कोई प्रचार प्रसार नहीं किया जाता है। यही नहीं सरकार द्वारा चेक़ या डायरेक्ट खाते में ट्रांसफर को अनिवार्य नहीं बनाया गया है, जिस कारण लोगों का बड़े स्तर पर शोषण होता है।

सरकारी विभाग में निजी कंपनी से अनुबंध भ्रष्टाचार और शोषण का बढ़ावा देती है और सभी जगहों पर बड़े स्तर पर शोषण देखने को मिला है।

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