Top
शिक्षा

JNU में ABVP पर मारपीट का फिर लगा आरोप, छात्रा का तोड़ा पैर

Prema Negi
5 Jan 2020 7:00 AM GMT
JNU में ABVP पर मारपीट का फिर लगा आरोप, छात्रा का तोड़ा पैर

जेएनयू छात्रसंघ महासचिव सतीश कुमार यादव ने कहा, एबीवीपी के लोग विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ मिलकर फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन में शामिल छात्रों को अपना टारगेट बना रहे हैं। जेएनयू प्रशासन ने आंदोलनरत छात्रों पर हमला करने के लिए नकाबपोश सुरक्षा गार्डों का इस्तेमाल किया था...

जनज्वार, दिल्ली। फीसवृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन के बाद से जेएनयू चर्चा में है। जेएनयू छात्रसंघ फीस में आंशिक कमी किये जाने से असंतुष्ट था और आंदोलन जारी था। जेएनयू कल 4 जनवरी को एकाएक तब चर्चा में आ गया, जब जेएनयू छात्रसंघ महासचिव ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने प्रशासन के इशारे पर एबीवीपी के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और सरेआम छात्रसंघ अध्यक्ष को न सिर्फ थप्पड़ जड़ा, बल्कि उनके हाथ में भी चोट आई है।

बीवीपी के लोगों द्वारा किये गये हमले और गार्ड द्वारा उन्हें सरेआम थप्पड़ जड़े जाने पर जेएनयू छात्रसंघ महासचिव सतीश चंद्र यादव ने जनज्वार को बताया, जेएनयू में जब से आंदोलन चल रहा है तब से एबीवीपी कैंपस में प्रशासन से मिलीभगत से माहौल बिगाड़ने के काम कर रही है। एबीवीपी से जुड़े 15—20 लड़के कल 4 जनवरी को घूम—घूमकर कैंपस में लड़ाई का माहौल बना रहे थे और उसके बाद उन्होंने नकाब पहनकर वहां मारपीट की, जिसमें हमारे कई साथी बुरी तरह से जख्मी हुए हैं। खासतौर पर उन्होंने छात्राओं को निशाना बनाया।

स मामले पर जेएनयूएसयू के जनरल सेक्रेटरी सतीश जिनके साथ एवीबीपी के लोगों ने मारपीट भी की ने जनज्वार से बातचीत में कहा, जब से यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर आंदोलन चल रहा है, तभी से जेएनयू प्रशासन का साथ देना एवीबीपी का काम रहा है। हमारा आंदोलन काफी प्रगति में है, जिसके चलते एवीबीपी के लोगों को दिक्कत हो रही है। प्रशासन के लोगों ने एवीबीपी के माध्यम से हमारे आंदोलनरत छात्रों के ऊपर हमला इसलिए करवाया, ताकि ये पता चल जाए कि छात्रों के अंदर ही फूट है।'

तीश आगे कहते हैं, 'कल 4 जनवरी को एवीबीपी के 15-20 लोग प्रशासनिक एरिया में घूम घूमकर छात्रों के साथ मारपीट कर रहे थे। जब मैं बीच-बचाव के लिए गया तो उन लोगों ने मेरे साथ भी मारपीट कर दी। इसके अलावा एवीबीपी के लोगों ने मारपीट के दौरान काफी भद्दी बातें भी कीं। इस दौरान कई छात्रों के हाथों को मरोड़ कर उनके हाथों को तोड़ दिया गया, महिला साथियों के ऊपर भी हमला करा गया है, जिसमें एक लड़की के पैर को तोड़ दिया गया।'

कौल सतीश एबीवीपी के लोगों ने एक लड़की के प्राइवेट पार्ट में भी मारा है। अपेक्षा नाम की लड़की का इन लोगों ने हाथ तोड़ दिया और कविता नाम की लड़की का पैर तोड़ दिया। सतीश कहते हैं कि एवीबीपी के लोग एकदम से आए और आसपास रखे गमले या डंडा जो मिला, उससे इन्होंने हमें मारना शुरू कर दिया है।

जेएनयू छात्र आंदोलन से जुड़े छात्र कहते हैं कि लोकतंत्र में लोग कई विचार रखते हैं, अगर इन लोगों को आंदोलन से कुछ परेशानी थी तो हम लोगों से बातचीत कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इन लोगों ने हमारे साथ सीधा मारपीट शुरू कर दी। इनको लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है। ये लोग सिर्फ माहौल खराब करने के लिए आए थे। कल के हालात ऐसे हो गए थे कि कैंपस में मॉब लिचिंग जैसा माहौल शुरू होने लगा था।

जेएनयू महासचिव सतीश की मानें तो छात्रों के साथ मारपीट करने में कई टीचर भी शामिल थे। सतीश का कहना है कि इनमें एसआईएस के डीन और उर्दू अरबी के एक प्रोफेसर ने भी छात्रों के साथ मारपीट की, ये लोग आरआरएस से जुड़े हुए हैं। कल जब ये लोग हमारे साथ जब मारपीट कर रहे थे तो कह रहे थे, हम एवीबीपी के लोग हैं मारेंगे, तुम कुछ नहीं कर पाओगे। मारपीट करने वालों में कुछ ऑफिस स्टाफ के भी शामिल होने की बात भी जेएनएसयू के छात्र कह रहे हैं।

तीश कहते हैं, एबीवीपी के जिन लोगों ने हमारे साथ मारपीट की है, उनमें बृजेश कुमार जो जेएनयू में एवीबीपी का अध्यक्ष है, भी शामिल है। इसके अलावा सीएम चौरसिया और रवि राज ने मारपीट की है, मगर इन पर प्रशासन ने किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की है।

पनी फेसबुक वॉल पर भी सतीश ने लिखा है, 'इतिहास कभी भी गद्दारों को नहीं माफ़ नहीं करता। ब्रिटिशराज में जो ग़द्दारी आरएसएस ने भारतवासियों के साथ किया था, आज वही ग़द्दारी ABVP ने JNU आंदोलन के साथ करने की कोशिश किया। Fees Hike के खिलाफ़ छात्रों का आंदोलन पिछले 67 दिन से शांति से सफलतापूर्वक चल रहा था, लेकिन आंदोलन की यह सफलता JNU Admin और ABVP को देखा नहीं गया इसीलिए इन लोगों ने इस आंदोलन को तोड़ने के लिए हिंसा का सहारा लिया। आज ये गुंडे पूरे दिन आंदोलनरत साथियों के साथ मार-पीट करते रहे। बहुत सारे साथियों को काफी चोट आई है जिसमें महिला साथियों की संख्या ज्यादा है। एक बात इन ग़द्दारों को बता देना बहुत जरूरी है कि "तुम छात्रों पर हमला करके इन्हें घायल तो कर सकते हो, लेकिन हमारे मज़बूत और नेक इरादों को टस से मस नहीं कर सकते। क्योंकि यही आजमाइश तुम्हारे पूर्वजों ने भी किया था और वो नाकाम रहे। उसी प्रकार तुम भी आज नाकाम ही रहोगे।"

हीं इस मसले पर जेएनयू प्रशासन ने छात्रों पर कैंपस में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शुल्क बढ़ाए जाने के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सर्वर रूम में तोड़फोड़ की है। साथ ही तकनीकी स्टाफ को डराने-धमकाने का काम किया है। इससे सेमेस्टर के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया बाधित हुई।

गौरतलब है कि जेएनयू छात्रसंघ ने छात्रावास शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का आह्वान किया था। सेमेस्टर के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया पांच जनवरी को समाप्त होनी है। जेएनयू के छात्र होस्टल फीस में हुई वृद्धि को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं, जिसको लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच कई बार झड़पें हुईं और यह राष्ट्रीय मुद्दा बना।

जेएनयू एक्जिक्यूटिव कमिटी की मीटिंग के बाद छात्रों की हॉस्टल फीस में आंशिक तौर पर कमी करने की घोषणा की गयी थी, जिसे शासन-प्रशासन ने मीडिया में बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित किया था। मगर ये कमी सिर्फ आर्थिक तौर पर कमज़ोर छात्रों के लिए ही है और वो भी बहुत मामूली।

जेएनयू छात्रसंघ फीस में मामूली कमी से संतुष्ट नहीं था, इसलिए छात्रों ने अपना संघर्ष जारी रखने का आह्वान करते हुए धरना-प्रदर्शन बंद नहीं किया था।

हीं जेएनयू छात्रसंघ द्वारा एबीवीपी पर प्रशासन के साथ मिलकर हमले के आरोप लगाने पर एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सिद्धार्थ यादव कहते हैं, 'लेफ्ट यूनिटी छात्र आंदोलन के नाम पर झूठा एजेंडा चला रही है।'

हीं एबीवीपी के जेएनयू इकाई के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार कहते हैं, 'इस तरह की तानाशाही और छात्र विरोधी रवैया बदलने की जरूरत है। जेएनयूएसयू छात्र आंदोलन की दिशा को पूरी तरह से भटका चुका है।'

Next Story

विविध

Share it