पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान बोले, हमने स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, शॉपिंग सेंटर, मॉल वगैरह बंद कर दिए हैं, अब यह देश के नागरिकों पर है कि वे खुद अपने आपको लॉकडाउन कर दें, खुद को आइसोलेशन में कर लें…

पाकिस्तान में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर पीयूष पंत की टिप्पणी

जनज्वार। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि उनकी सरकार कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने में असफल रही है। 24 मार्च को पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा-“हम इतना खराब भी नहीं कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि देश को कोरोनावायरस से ज़्यादा बड़ा खतरा इससे पैदा हुयी घबराहट से है। देशव्यापी लॉकडाउन घोषित करने के सवाल पर इमरान ने फिर वही दोहराया कि इसका गरीबों पर बुरा असर पड़ेगा।

लेकिन सच तो ये है कि पाकिस्तान में भी कोरोनावायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के अखबार डॉन में छपी खबर के अनुसार वहां यह आंकड़ा 903 तक पहुँच गया है। यानी कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा पाकिस्तान में भारत से ज्यादा है। पाकिस्तान में अब तक 7 लोगों की मृत्यु भी कोरोना से होने की खबर है।

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पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा संक्रमित 394 केस सिंध प्रान्त में पाए गए हैं। इसके बाद पंजाब प्रान्त का नंबर है, जहाँ कोरोनावायरस से पीड़ित लोगों की संख्या 365 पहुँच चुकी है। बलोचिस्तान में 110 मामले सामने आये हैं तो खैबर पख्तूनख्वा में 38 लोग संक्रमित पाए गए। पंजाब प्रान्त में भी शेखुपुरा के एक 57 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी है। इस व्यक्ति का मेयो हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था और वो हाल-फिलहाल देश से बाहर नहीं गया था।

कोरोनावायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण के चलते आखिरकार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को सेना की मदद लेनी पड़ रही है। आंतरिक मंत्रालय ने 23 मार्च को अधिसूचना जारी कर सेना उतारने की घोषणा कर दी गयी। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 और सीआरपीसी की धारा 131 (ए) के तहत लिया गया।

पंजाब और सिंध में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग को लागू कराने के लिए सेना को उतार दिया गया है। वैसे बिगड़ते हालात देखते हुए यह मांग पकिस्तान के सभी प्रांतों और क्षेत्रों से आ रही थी। बाकी प्रांतों में भी सेना की मदद लेने के साथ-साथ इस्लामाबाद, पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान में भी सेना बुलाई गयी है।

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बसे पहले सिंध की सरकार ने 22 मार्च को आधी रात से सिंध प्रान्त में लॉकडाउन की घोषणा की थी। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के अधिकारियों ने 15 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की।

सिंध में हाल में जो टेस्ट हुए हैं और जो केस पॉज़िटिव पाए गए हैं, उनमें ज़्यादातर मामले क्रॉस-ट्रैवल बॉर्डर के हैं। यहां ज़्यादातर लोग ईरान से लौटे हैं। वहीं 80 से अधिक मामले लोकल-ट्रांसमिशन के पाए गए हैं, यानी किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से जो हाल ही में विदेश से लौटा हो। यहां गौर करने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री इमरान खान देशव्यापी लॉकडाउन के पक्ष में नहीं थे।

कोरोना वायरस की समस्या पर राष्ट्र के नाम अपने दूसरे संबोधन में इमरान ने कहा था, “अगर हमारे (पाकिस्तान के) हालात इटली और चीन जैसे होते तो मैं पूरा पाकिस्तान लॉकडाउन कर देता। बहस चल रही है कि पूरे मुल्क को लॉकडाउन कर देना चाहिए। मैं आपको इसका मतलब बताता हूं। लॉकडाउन-कर्फ्यू का मतलब सभी नागरिकों को उनके घरों में बंद कर देना है। अगर आज पूरा लॉकडाउन मैं कर दूं तो दिहाड़ी कमाने वाले मजदूर घरों में बंद हो जाएंगे। 25 फीसदी गरीब लोगों का क्या होगा। क्या हमारे पास इतने संसाधन हैं कि हम दिहाड़ी वाले सभी लोगों के घरों तक राशन पहुंचा सकें? देश ऐसा कर पाने की स्थिति में नहीं है।”

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने लोगों से सहयोग देने की अपील करते हुए कहा था, “हमने स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, शॉपिंग सेंटर, मॉल वगैरह बंद कर दिए हैं। अब यह देश के नागरिकों पर है कि वे खुद अपने आपको लॉकडाउन कर दें, खुद को आइसोलेशन में कर लें।”

न्होंने लोगों से कहा, “अपनी जिम्मेदारी निभाएं। अगर बीमारी के लक्षण दिखें तो खुद को अलग-थलग कर लें। अफरातफरी और घबराहट इस वायरस से अधिक नुकसान पहुंचा सकती है।” पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने देश की जनता से कहा, “मुझमें विश्वास रखें। मैं अपनी टीम के साथ पूरी तरह से हालात पर निगाह रखे हुए हूं।”

हालांकि खुद इमरान खान ये दावा कर चुके हैं कि पाक में जिस प्रकार की गर्मी पड़ती है वैसे में कोरोना बेअसर हो जाएगा। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि अगर केस बढ़े तो हम इसे रोक पाने में सक्षम नहीं हैं और संक्रमित हो रहे लोगों की लगातार बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि पाकिस्तान सरकार सक्षम नहीं है और साथ ही साथ उसकी तैयारी भी अधूरी है।

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ही कारण है कि कोरोनावायरस के सबसे ज़्यादा शिकार स्वास्थ्य कर्मी हो रहे हैं। मरीजों का इलाज करते-करते ये लोग कब खुद इस संक्रमण का शिकार हो जाते हैं, इन्हें पता ही नहीं चलता है। अभी 22 तारीख को पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्टिस्तान प्रांत में 20 साल के एक युवा डॉक्टर ओसामा रियाज़ मरीज़ों की स्क्रीनिंग करते-करते इस संक्रमण से प्रभावित हो खुद ही चल बसे। प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता फैजुल्लाह फ़िराक ने बताया कि युवा डॉक्टर ओसामा रियाज़ ईरान और अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे थे। इसी दौरान इस वायरस से संक्रमित हो गए।

बीते डेढ़ साल से वे डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रहे थे। उन्हें देश के नायक के खिताब से नवाजने का फैसला किया गया है, लेकिन यह घटना साफ़ कर देती है कि पाकिस्तान सरकार के इंतज़ामात पुख्ता नहीं हैं।

वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि निसंदेह सरकार की व्यवस्था आधी-अधूरी सी है, लेकिन साथ ही लोगों में जागरूकता का अभाव भी है। उनका मानना है कि पैसे की कमी के चलते इस संक्रमण को रोकने के उपाय करने में सरकार सक्षम नहीं है। क्वैरेन्टाइन सुविधाओं और टेस्टिंग लैब की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

राची के इण्डस हॉस्पिटल में संक्रामक रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर नसीम सलाहुद्दीन कहती हैं, “अब हम चाहे कुछ भी कर लें एक बहुत बड़ा संक्रमण विस्फोट हो कर ही रहेगा। और इस विस्फोट से निपटने में हम सक्षम नहीं होंगे। कई स्तर पर चीज़ें गड़बड़ाती रहेंगी।”

डॉक्टर नसीम आगे कहती हैं कि देश की सीमाओं को सील करने और क्वैरेन्टाइन सुविधा उपलब्ध कराने सरीखे कदम बहुत पहले उठा लिए जाने चाहिए थे। “मैं सोचती हूँ कि अब बहुत देर हो चुकी है। बिल्ली झोले से बाहर निकल चुकी है।”

Edited By :- Janjwar Team

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