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संस्कृति

आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा अभिनेता है

Janjwar Team
18 Aug 2017 10:12 AM GMT
आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा अभिनेता है
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तैश पोठवारी की कविता 'एक आत्मकामी तानाशाह'

एक आत्मकामी तानाशाह जब राजा बनेगा
एक गुलाम मानसिकता की बीमार ग्रंथी तुम्हारे मस्तिष्क में प्रत्यारोपित कर दी जाएगी
मजहबी उन्माद और बाजारू राष्ट्रवाद का रक्तिम शोर जब तुम्हारे सोचने समझने की भाषा को शब्दहीन कर देगा
बेवजह की उतेजना और मजहबी श्रेष्ठताबोद्ध के स्राव से संक्रमित तुम्हारा मस्तिष्क
हरदम उसकी तस्वीर को देखकर तुम्हें ताली पीटने के लिए कहेगा
मनोविज्ञान की नवीनतम खोज है
जन सम्मोहन के लिए नीले झूठ की अवधारणा का प्रयोग
नीला झूठ मतलब ऐसा झूठ जो जनता बरसों से सुनना चाहती हो
और वो भी एक ख़ास अंदाज में बार—बार बोला जाए
थोड़े समय बाद जनता जान जाती है ये झूठ है
पर वो झूठ बोलने वाले और उसके झूठ को पसंद करने लगती है
और इसके दुनिया में सफल प्रयोग बताते हैं
जब तानाशाह के करीबी जाहिल मूर्ख गुंडे
समाज में चारों और फ़ैल जाते हैं
सभ्य आदमी या तो चुप हो जाता है या उनकी भाषा बोलने के लिए मजबूर हो जाता है

आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा संवाद लेखक है
आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा अभिनेता है
आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा नाटकबाज है
आत्मकामी तानाशाह सदी का सबसे बड़ा जोकर है
आत्मकामी तानाशाह सबसे पहले अपने दल में लोकतंत्र को खत्म करता है
अपने गुरु को ठिकाने लगा
उसे वृद्धाश्रम में सूने मार्ग के दर्शक में बदल देता है
आत्मकामी तानाशाह को कैमरा बहुत पसंद है
और वो चलते हुए अपने दल के बाकी नेताओं से कम से कम दस हाथ की दूरी रखता है
ताकि चलते हुए बस वही देवतातुल्य लगे
आत्मकामी तानाशाह की सबसे बड़ी ताक़त है उसका गजब का प्रचारतंत्र
जो रोज उसकी महानता के झूठे किस्से टीवी अखबारों में दिखाएगा
उसके राज में मीडिया देश की बौद्धिकता को सत्ता की मानसिक गुलामी में बदलने का कारखाना बन जाता है
जो जनता के असली मुद्दों को मजहबी नफरत की चादर से ढक देता है
इस प्रचार तंत्र के असर से तुम्हारी संवेदनाएं बिलकुल मर जाएंगी
भीड़ में अपने सामने चुपचाप मरते मुसलमान को देख
मुरझाई मरी—सी आत्मा के साथ तुम रास्ता बदल लोगे
पर चुप रहोगे

राजा काला धन के पहाड़ पर बैठे देश के बड़े पूंजीपतियों का जिगरी दोस्त होगा
राजा जनता की खून पसीने की लाखों करोड़ रुप्ए की कमाई दबाए बैठे
चोर व्यापारिक घरानों के नाम तक बताने से मना कर देगा
पर हर बात में जिक्र गरीब का करेगा
तुम्हेंं कोई रोता हुआ चेहरा नजर नहीं आएगा
तुम्हें मरता किसान, बंधुआ मजदूर
छंटनी की तलवार के नीचे काम करते सहमे हुए मेरे युवा दोस्त
और युवा बेरोजगार नजर नहीं आएगा
राजसत्ता की बद्तमीज नस्लें सरेराह किसी लड़की की आबरू पर हाथ डालेंगी
और राजा की लंपट सेना उसे ही चरित्रहीन घोषित करेंगी
तुम चुप रहोगे क्योंकि सब चुप हैं
तुम्हेंं कुछ नजर नहीं आएगा
तुम भूल जाओगे लोकतंत्र में नागरिक का काम बस मनपसंद पार्टी को वोट डालना नहीं होता
बल्कि सरकार बनने के बाद उसी पार्टी का गिरेबान पकड़कर उससे काम लेना भी होता है
अपने सवाल पूछने होते हैं
हर सवाल का वाजिब जवाब माँगना होता है
तुम भूल जाओगे
सरकार का काम मुनाफे के बाजार में
मेहनत को आधी कीमत पर बेचना नहीं होता है
कालाबजारियों के मुनाफे के लिए बढ़ी कीमतों को रोकना भी होता है
तुम भूल जाओगे
दिल्ली के तख़्त जनता की एक दहाड़ से कैसे हिलते हैं
एक नागरिक के रूप में सत्ता के आगे संघर्ष करने की महान विरासत
जन आंदोलन से अपने हक़ हासिल करने की महान परम्परा और स्वर्णिम इतिहास
तुम सब कुछ भूल जाओगे
तुम दिन ब दिन मुश्किल होते जा रहे जीवन में ऊब को दूर करने के लिए
रोज बेगारी में राजा के दर पे नगाड़ा बजाओगे
यही तुम्हारा रोज का मनोरंजन होगा

राजा की लंपट सेना को जनता के बीच अपने असली रूप में जाने में शर्म आएगी
इसलिए वो अपने सारे पाप धर्म और संस्कृति को बचाने की आड़ में करेंगे
वे धर्म की रक्षा के नाम पर बेगुनाह लोगों के लहू से भगवान के चेहरे को बदरंग कर देंगे
तुम चुप रहोगे
और संस्कृति बचाने के नाम पर देश की महान गंगा जमुनी तहजीब को फिकरापरस्ती के गंदे नाले में बदल देंगे
तुम चुप रहोगे

पर आत्मकामी तानाशाह जनता से डरता भी बहुत है
और उससे ज्यादा डरता है सोचने वाले लोगों से
जो उसका ये जादुई तिलिस्म तोड़ जनता को उनकी विलुप्त चेतना वापिस ला सकते हैं

आत्मकामी तानाशाह सम्मोहन के काले जादू भरे शब्दों का प्रयोग करेगा
और सत्ता के लिए खतरनाक होती जा रही बेरोजगारों की भीड़
अपने सिर किसी अदृश्य ताज को पर अनुभव कर
राजा के लिए हर बात पे मुफ्त में मरने मारने पर उतारू हो जाएगी
किसी धर्म विशेष के लोग अब डर गए हैं
और जब तक राजा रहेगा वे डर के रहेंगे
वे सबकुछ भूलकर बस इस दैवीय प्रेरणा को आत्मसात कर लेंगे
वे हर बात पे पूछेंगे तुम राजा के समर्थन में हो या विरोध में?
एक नागरिक के रूप में तुम्हारी राजनहतिक स्वतंत्रता
एक अनिवार्य हाँ की गुलाम बन के रह जाएगी
तुम्हारा पूरा अस्तित्व और पहचान
बस इस मजहबी भीड़ के मूक दर्शक में बदल जाएगी
राजा को हाँ चाहिए
लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों,महिलाओं बुद्धिजीवियों, फिल्मकारों
उसे हर कीमत पर सबकी हाँ चाहिए
आत्मकामी राजा देश को सबसे मजबूत राष्ट्र बनाने का सपना दिखाकर सत्ता में आएगा
पर उसके राज में देश की सीमाएं सबसे असुरक्षित होंगी
महंगाई, छंटनी और बेरोजगारी से पहले से डरी जनता को
राजा युद्ध का भय दिखाकर और डराएगा
और उनके डर से अपने कम हो रहे जनसमर्थन को बढ़ाएगा
उसके राज में सोती हुई जनता को जगाना देशद्रोह होगा
सच को सच, झूठ को झूठ कहना देशद्रोह होगा
सही को सही गलत को गलत कहना देशद्रोह होगा
पढ़ते हुए विश्वविद्यालयों में छात्रों का सरकार से सवाल करना देशद्रोह होगा
पढ़—लिखकर नौकरी मांगना देशद्रोह होगा
कविता लिखना देशद्रोह होगा, फिल्म बनाना देशद्रोह होगा
इतिहास,अर्थशास्त्र के ऊपर भाषण देना देशद्रोह होगा
सत्ता के खिलाफ खबर दिखाना देशद्रोह होगा
देशभक्ति की परिभाषा बस राजा की जय जयकार और मुसलमानों से नफरत तक सीमित हो जाएगी
सहमति में झुकी हुई गर्दन के अलावा सब कुछ देशद्रोह होगा

लोकतंत्र की इस सबसे बड़ी चुप्पी में
राजनीति का ये बेशर्म मुहावरा बेकार में खोजता रहेगा
अपने गुम हो गए अर्थों को
ओ सभ्य लोगो! देखो एक आत्मकामी तानाशाह ने तुम्हेंं चुप रहकर जलालत सहना सिखा दिया है

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