Top
संस्कृति

दार्जिलिंग कहाँ पर है?

Janjwar Team
1 July 2017 5:27 PM GMT
दार्जिलिंग कहाँ पर है?
x

पश्चिम बंगाल से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग के समर्थन में लिखी गयी यह कविता जनज्वार को अपने पाठक जर्नादन थापा के जरिए प्राप्त हुई है। रवि रोदन की लिखी यह कविता बहुत स्पष्ट और लोकप्रिय है, जो दार्जिलिंग होने का दंश बताती है।

रवि रोदन की कविता
दार्जिलिंग कहाँ पर है

वर्षों से जहाँ
सुबह-सुबह
माँ टोकरी लिए
बागान जाती है
आँखों में सपने संजोए
दार्जिलिंग वही पर है।

युद्ध जीतकर भी
सदियों से हारे हुए लोग
जहाँ पर रहते हैं
दार्जिलिंग वही पर है।

घर के आँगन पर
खड़े होकर अपने ही लोग
जिसे विदेसी कहते हैं
दार्जिलिंग वहीं पर है।

छल-कपट
क्रोध लाभ
संत्रास विषाद तले
दबे हुए लोग जहाँ हैं
दार्जिलिंग वहीं पर है।

नींद से जगते ही
जहाँ सपने बिखरते हैं
दार्जिलिंग वहीं पर हैं।

मीर जाफर की कठपुतली बनकर
जहाँ लोग
इशारों पर नाचते हैं
महाशय!
दार्जिलिंग वहीं पर है।

Next Story

विविध

Share it