जनज्वार विशेष

आज दुनियाभर में पहली बार मनाया जा रहा है विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस

Prema Negi
7 Jun 2019 2:24 PM GMT
आज दुनियाभर में पहली बार मनाया जा रहा है विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस
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NRAI की फूड सर्विसेज रिपोर्ट 2019 के मुताबिक भारत में 24.9 लाख फूड बिजनेस ऑपरेटर्स हैं। इसमें बड़े रेस्टोरेंट से लेकर छोटे ढाबे सभी शामिल हैं, मगर इनमें से केवल 4.67 लाख के पास ही सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का लाइसेंस है...

अंकित कुमार

जनज्वार। लोगों को भोजन और खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक पहलकदमी ली गई है। इसी के तहत दिसंबर 2018 में अपनाया गया पहला विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस आज 7 जून 2019 को "खाद्य सुरक्षा, सभी का व्यवसाय" थीम के तहत मनाया जा रहा है।

भोजन सभी का बहुत ही आवश्यक और मौलिक अधिकार है। कहावत भी है, 'जैसा अन्न वैसा मन।' मगर लगता है ये कहावत सिर्फ कहावत ही रह गयी है। भोजन का सीधा सम्बन्ध हमारी सेहत से है, जितना भोजन पौष्टिक होगा हमारी सेहत भी उतनी ही दुरुस्त होगी।

अभी हम भोजन कर रहे हैं वह बहुत ही ज्यादा दूषित हैं। हमारे देश भारत में हर साल लगभग 23 मिलियन से अधिक लोग दूषित खाना खाने से बीमार पड़ रहे हैं। यह बात तमाम आंकड़ों में सामने आयी है।

हम लोग जो भोजन होटल, ढाबा और सड़क किनारे पर करते हैं, ज्यादातर में विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। दूषित भोजन की वजह से सबसे ज्यादा अतिसार यानी पेचिस या दस्त की बीमारी होती है।

दूषित खाने के कारणों में नमक, तेल और चीनी की अतिरिक्त मात्रा का बढ़ना है। शारीरिक श्रम का अभाव, आरामदायक दिनचर्या से भी शरीर में बड़े पैमाने पर विषैले तत्व एकत्र हो जाते हैं, जो कि अनेक गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं। आजकल मार्केट से पैकेटबंद फ़ूड, जंक फ़ूड, फ़ास्ट फ़ूड खरीदते हैं, उनसे भूख तो तुरंत मिट जाती हैं लेकिन जंक फूड और फास्ट फूड में ट्रांसफैट, शुगर, सोडियम और लेड जैसे खतरनाक रसायनों का प्रयोग कर उसे टेस्टी तो बनाया जाता है, लेकिन वह स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक नहीं रह जाता।

पिछले माह मई 2019 में NRAI (नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने एक फूड सर्विसेज रिपोर्ट 2019 जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में 24.9 लाख फूड बिजनेस ऑपरेटर्स हैं। यानी इसमें बड़े रेस्टोरेंट से लेकर छोटे ढाबे सभी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसमें से केवल 4.67 लाख के पास ही सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) का लाइसेंस है।

इस रिपोर्ट में एफएसएसएआई के हवाले से कहा गया है कि राज्यों के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की लापरवाही के कारण फूड कारोबारियों को लाइसेंस नहीं मिल पा रहे हैं, इस कारण लोग इन रेस्टोरेंट्स और ढाबों पर मिल रहे दूषित भोजन को खाने के लिए मजबूर हैं।

जिस तरह से भोजन का उत्पादन, भंडारण और उपभोग किया जाता है, वह हमारे भोजन की सुरक्षा को सीधे-सीधे प्रभावित करता है। वैश्विक खाद्य मानकों का अनुपालन, आपातकालीन तैयारियों और प्रतिक्रिया सहित प्रभावी विनियामक खाद्य नियंत्रण प्रणाली स्थापित करना, साफ पानी तक पहुंच प्रदान करना, अच्छी कृषि प्रथाओं (स्थलीय, जलीय, पशुधन, बागवानी) को लागू करना, खाद्य व्यापार के लिए खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों के उपयोग को मजबूत करने से खाद्य सुरक्षा को बढ़ाया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक स्वस्थ भोजन के विकल्प बनाने के लिए उपभोक्ताओं की क्षमता और निर्माण क्षमता कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन, वैज्ञानिक, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में लगभग 24000 लोग प्रतिदिन भूख से मरते हैं और इस संख्या का एक तिहाई हिस्सा भारत का माना जाता है। दूसरी तरफ आंकड़े ही बताते हैं कि हर साल प्रसुरक्षित भंडारण के अभाव में गेहूं सड़ने से करीब 450 करोड़ रूपए का नुकसान होता है।

खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के उपाय

सुरक्षित व सेहतमंद आहार का सेवन करें।

चमकीले और रंगीन खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।

अखबार एवं पॉलीथीन का प्रयोग खाद्य पदार्थों को रखने के लिए न करें।

कटे-सड़े-गले फल एवं सब्जियों का सेवन न करें।

ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें कि घर का बना खाना ही खायें। घर का बना खाना ही पौष्टिक, स्वादिष्ट और सेहतमंद होता है।

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