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शिक्षा

योगी सरकार में भी हाईस्कूल-इंटर परीक्षाओं में नकल माफिया का कायम है राज

Prema Negi
21 Feb 2019 10:10 AM GMT
योगी सरकार में भी हाईस्कूल-इंटर परीक्षाओं में नकल माफिया का कायम है राज
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शिक्षक संगठनों ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि शासन—प्रशासन से सेटिंग कर चल रहा नकल माफियाओं का राज

उप-मुख्यमंत्री के निर्देश पर भी जिला विद्यालय निरीक्षक ने नकल माफियाओं के दबाव में 50 प्रतिशत विद्यालय के शिक्षक हटाकर नहीं लगाई 50 प्रतिशत बाहरी कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी

जनज्वार, लखनऊ। योगी सरकार की नकलविहीन परीक्षाओं के दावों के विपरीत राजधानी लखनऊ में छोटे-छोटे कमरों में 40 से लेकर 96 परीक्षार्थियों को बैठाकर धड़ल्ले से नकल कराई जा रही है। शासन—प्रशासन की नाक के नीचे सुनियोजित और मनमाने तरीके से हो रही नकल रुकवाने, कक्ष निरीक्षकों की नियुक्तियां, कक्ष निरीक्षकों के फर्जी परिचयपत्र बनाये जाने तथा परीक्षा केन्द्र निर्धारण नीति को ताक पर रखकर परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण एवं परीक्षार्थियों के आवंटन आदि की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने कमर कस ली है।

सके विरुद्ध कार्रवाई किये जाने को लेकर शिक्षक संघ ने प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि नकल पर येन—केन—प्रकारेण रोक लगे।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री एवं जिला संरक्षक आरपी मिश्र, जिलाध्यक्ष आरके त्रिवेदी, जिलामंत्री अरुण कुमार अवस्थी, कोषाध्यक्ष महेश चन्द्र एवं आय-व्यय निरीक्षक विश्वजीत सिंह ने 20 फरवरी को प्रेस वार्ता आयोजित कर बताया कि छोटे-छोटे कमरों में राम किशोर कान्वेंट इंटर कालेज, जानकीपुरम में 48 से 96 परीक्षार्थी, एएलवाई मैनपुरिया इंटर कालेज, हर्ष नगर के एक कक्ष में 70 तक परीक्षार्थी, अवध एकेडमी इण्टर कालेज, चिनहट में एक कक्ष में 54 तक परीक्षार्थी सहित लगभग 50 प्रतिशत विद्यालयों में एक कमरे में मानक से अधिक संख्या में परीक्षार्थियों को बैठाकर सुनियोजित नकल कराई जा रही है, जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जानकारी होने के बावजूद नजरंदाज किया जा रहा है।

बकौल शिक्षक नेताओं के राम किशोर कॉन्वेंट इंटर कालेज, जानकीपुरम में विद्यालय में छोटे-छोटे कमरों में 54 से लेकर 96 परीक्षार्थी सटाकर बैठाए जाते हें। प्रबन्धक से सेटिंग के कारण जिला विद्यालय निरीक्षक एवं उड़ाका दल खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। इतना ही नहीं विद्यालय के उपरी तल में रहने वाले प्रबन्धक के परीक्षा के दौरान विद्यालय में उपस्थिति की जानकारी होने पर भी जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। शिक्षक नेताओं ने दावा किया कि इसकी पुष्टि सीसीटीवी से की जा सकती है।

शिक्षक नेताओं ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बिना उनकी योग्यता, नियुक्ति आदि की जाँच कराए परिचय पत्र बनवा दिये गये, जिससे अनेक विद्यालयों ने नकल कराने के लिए कोचिंग एवं विद्यालय में एक विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के फर्जी परिचय पत्र बनवा लिए हैं जिनका उपयोग परीक्षाओं में किया जा रहा है। अवध एकेडमी चिनहट सहित अधिकांश वित्तविहीन विद्यालयों में नकल कराने के लिए फर्जी परिचय पत्र के आधार पर कक्ष निरीक्षक ड्यूटी कर रहे हैं।

उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा एवं विभागीय निर्देर्शों के निर्देशानुसार जिला विद्यालय निरीक्षक को अनिवार्य रूप से परीक्षा केन्द्र बनाए गए विद्यालयों के 50 प्रतिशत शिक्षकों को हटाकर केन्द्र में 50 प्रतिशत बाहरी कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति करनी थी, मगर नकल माफियाओं से सांठ-गांठ के चलते जिला विद्यालय निरीक्षक ने परीक्षा केन्द्र के सभी शिक्षकों की ड्यूटी उसी केन्द्र पर लगाई, जिससे अनेक वित्तविहीन विद्यालयों में फर्जी परिचय पत्र के आधार पर शिक्षक अपने विद्यालय में ड्यूटी कर नकल करा रहे हैं।

जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा मानकों के अनुसार भी कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति नहीं की गयी है। बक्शी का तालाब इंटर कालेज में एक हाल सहित 16 कक्षों के लिए लगभग 50 के स्थान पर 76 कक्ष निरीक्षक, कालीचरण इण्टर कालेज में अधिकतम 20 कक्षों की परीक्षा के लिए लगभग 50 के स्थान पर 62 कक्ष निरीक्षक, महिला इंटर कालेज में अधिकतम 19 कक्षों की परीक्षा के लिए लगभग 48 के स्थान पर 58 कक्ष निरीक्षक समेत अनेक विद्यालयों में मानक से अधिक कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं, जबकि अमीनाबाद इण्टर कालेज, जगन्नाथ प्रसाद साहू इण्टर कालेज, गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज आलमबाग, सत्य नारायण तिवारी इण्टर कालेज आदि दर्जनों परीक्षा केन्द्रों में कक्ष निरीक्षकों की बेहद कमी है। अनेक वित्तविहीन विद्यालयों में भी कक्ष निरीक्षकों की कमी है, मगर बाहरी कक्ष निरीक्षकों की मांग न कर अपने विद्यालय के शिक्षकों से ही ड्यूटी करवा रहे हैं।

शिक्षक नेता कहते हैं परीक्षा केन्द्र निर्धारण नीति में प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर न्यूनतम 300 और अधिकतम 1200 परीक्षार्थी आवंटित किये जाने थे, किन्तु जिला विद्यालय निरीक्षक ने इसका भी उल्लंघन किया। बक्शी का तालाब इण्टर कालेज में 1354, सेन्टीनियल इण्टर कालेज में 1321, वीरांगना उदादेवी राजकीय इंटर कालेज में 1265, आरडीकेपी इंटर कॉलेज, माल में 1262, राम भरोसे मैकूलाल इंटर कॉलेज में 1239, एसएसजेडी इंटर कॉलेज, फैजुल्लागंज में 1237 तथा काशीश्वर इण्टर कालेज, मोहनलालगंज में 1204 परीक्षार्थी आवंटित किये गये हैं।

जिला विद्यालय निरीक्षक को ऑनलाइन निर्धारित प्रत्येक परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण कर संशोधन करना था, मगर उनके द्वारा गठित टीमों ने परीक्षा केन्द्रों में उपलब्ध कक्ष, काष्ठोपराण, प्रकाश व्यवस्था, प्रबन्धक/प्रधानाचार्य के आवास आदि के सम्बन्ध में फर्जी रिपोर्ट लगाई, जिससे शासनादेश का उल्लंघन कर केन्द्रों का निर्धारण किया गया।

उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को भेजे गये ज्ञापन में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा परीक्षा केन्द्रों के अंतिम सांधित निर्धारण में शासनादेश का उल्लंघन किये जाने की भी जांच कराये जाने की मांग की गयी है। परीक्षा केन्द्रों की नीति में प्राथमिकता के आधार पर राजकीय एवं सहायता प्राप्त तथा आवश्यक पड़ने पर स्वच्छ छवि के वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाया जाना था, किन्तु नकल माफियाओं से सेटिंग के चलते अनेक वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केन्द्र बनाया गया।

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