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Ankita Bhandari हत्याकांड से दहला पूरा देश, BJP नेता के लाडले के रिजॉर्ट में तोड़फोड़, आरोपियों की पुलिस कस्टडी में पिटाई

Janjwar Desk
23 Sep 2022 4:49 PM GMT
Ankita Murder Case : हैवानों ने पिता का सहारा बनने से पहले अंकिता को हमेशा के लिए कर दिया उनसे दूर
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Ankita Murder Case : हैवानों ने पिता का सहारा बनने से पहले अंकिता को हमेशा के लिए कर दिया उनसे दूर

Ankita Bhandari missing and murder case : नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तराखण्ड की अंकिता भंडारी हत्याकांड के खिलाफ आवाज की बुलंद, उत्तराखंड में गुस्साए लोगों ने पुलिस कस्टडी में हत्यारोपियों के साथ मारपीट के साथ ही आरोपी के रिजॉर्ट पर भी पथराव कर दिया है...

Ankita Bhandari missing and murder case : भाजपा नेता के पुत्र द्वारा अपने रिजॉर्ट में कार्यरत युवती द्वारा वेश्यावृत्ति से इंकार के बाद की गई युवती की निर्मम हत्या से पूरे उत्तराखंड में उबाल आया हुआ है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के बयान के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगा है। उत्तराखंड में गुस्साए लोगों ने पुलिस कस्टडी में हत्यारोपियों के साथ मारपीट के साथ ही आरोपी के रिजॉर्ट पर भी पथराव कर दिया है।

उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर जस्टिस फॉर अंकिता ट्रेंडिंग के साथ ही कई शहरों में घटना के विरोध में कैंडल मार्च का आयोजन किया जा रहा है। राज्य के जनसंगठनों की ओर से पनुवाद्योखन के जगदीश हत्याकांड के साथ ही अंकिता हत्याकांड को जोड़कर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट होने लगी है। दूसरी तरफ राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राजस्व पुलिस से हटाकर रेगुलर पुलिस को दिए जाने की मांग भी मुखर हो रही है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता विनोद आर्य के पुत्र पुल्कित आर्य द्वारा अपने रिजॉर्ट में कार्यरत युवती अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या के विरोध में पूरे उत्तराखंड में लोगों का गुस्सा अपने चरम पर है। लक्ष्मण झूला पुलिस स्टेशन के बाहर कोडिया गंगा भोगपुर में सैंकड़ों की संख्या में मौजूद गुस्साए भीड़ ने पुलिस अभिरक्षा में तीनों हत्यारोपियों को कोटद्वार कोर्ट ले जाए जाने के दौरान पकड़कर नंगा करते हुए चप्पलों से जमकर पीटा।

पुलिस ने बमुश्किल ग्रामीणों के चंगुल से इन्हें बचाते हुए अधनंगी हालत में गाड़ी में छिपाकर इनकी जन बचाई। गुस्साए लोगों के गुस्से का आलम यह था कि वह हत्यारोपियों को मौके पर ही मारने के लिए अपने हवाले करने की मांग कर रहे थे। बाद में कुछ लोगों ने आरोपी पुल्कित के रिजॉर्ट पर पथराव करके भी अपना गुस्सा उतारा। इस पथराव में रिजॉर्ट के कुछ शीशे टूटने के अलावा और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

हत्याकांड के विरोध में आई पूरी कांग्रेस

अंकिता हत्याकांड के बाद उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक की पूरी कांग्रेस इस घटना को लेकर मुखर हो गई है। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के साथ घटी घटना दिल दहलाने वाली है। तमाम लड़कियां अपने सपनों को पूरा करने के लिए घरों से बाहर निकलती हैं। वैसे ही अंकिता भंडारी भी काम करने गई थीं, जिसको खौफनाक तरीके से मार दिया गया। लड़कियों के खिलाफ ऐसे जघन्य अपराध उनके हौसलों पर भी हमला करते हैं। मैं सोच सकती हूं कि इस लड़की के मां-बाप पर क्या गुजर रही होगी। नौकरी/काम करने वाली लड़कियों को सुरक्षा देना और नौकरी की जगहों को सुरक्षित बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकारों को महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी ही होगी। त्वरित कार्रवाई और सख्त सजा व महिला सुरक्षा के उचित प्रावधानों से ही इस समस्या का हल निकलेगा।

नेता प्रतिपक्ष बोले, भाजपा के दरिंदों से बेटी बचाओ

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अंकिता हत्याकांड को राज्य की कानून व्यवस्था की पोल खोलने वाला बताते हुए कहा कि इस जघन्य हत्याकांड ने भाजपा सरकार के "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" जुमले की हकीकत भी सामने ला दी है। उत्तराखण्ड की मासूम बेटी के नृशंस हत्याकांड में भाजपा पदाधिकारियों के परिजन की मुख्य अभियुक्त के रूप में गिरफ्तारी के बाद अब इस नारे को "भाजपा के दरिंदों से बेटी बचाओ" कर देना चाहिए।

अंकिता की लाश अभी नहीं हो पायी है बरामद, अपराधी कबूल कर चुके हैं जान से मार डालने का जुर्म

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह प्रदेश के लिए अफ़सोस जनक स्थिति है कि मृत लड़की का अभागा पिता चार दिन तक अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने के लिए घूमता रहा लेकिन उसकी रिपोर्ट नही लिखी गयी। रिपोर्ट लिखने में ना-नुकुर के पीछे निश्चित ही सत्ता पक्ष भाजपा का दबाव होगा, जिसकी जांच होनी चाहिए। चार दिन बाद भी गुमशुदा लड़की के पिता की बजाए लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट उसी के हत्यारे से लिखवाना इस बात को साबित कर रहा है कि सरकार ने अंतिम समय तक इस मामले के आरोपी को बचाने और मामले को कमजोर करने की हर तकनीकी कोशिश की है। इतना ही नहीं इनकी गिरफ्तारी के बाद भी रेगुलर पुलिस ने दो अलग प्रेस नोट जारी कर भ्रांति पैदा करने की कोशिश की है। इसका एक ही निष्कर्ष है कि भाजपा सरकार हर तरह से अपराधियों को मदद कर रही है। पिता के अलावा पुलकित का बड़ा भाई अंकित आर्य भी ओबीसी आयोग में पदाधिकारी बताया जा रहा है।

हर अपराध से क्यों जुड़ता है भाजपा का नाम

कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह रावत ने उत्तराखंड की बेटी के साथ हुई दरिंदगी को भाजपा सरकार की क़ानून व्यवस्था के साथ साथ भाजपा से जुड़े हुए नेताओ की पोल खोलने वाला बताते हुए सवाल उठाया है कि पिछले पांच साल से लेकर अभी तक जितने भी अपराध हुए है उनमें कही न कही भाजपा और संघ से जुड़े हुए लोगों लोगों का ही नाम क्यों आया है ? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ से जुड़े हुए लोगों के लिए उत्तराखंड अब पूरी तरह से एक चारागाह में तब्दील कर दिया गया है। उत्तराखंड जैसा शांत प्रदेश भाजपा राज में अब अपराध की शरणगाह में तब्दील होता जा रहा है जिसे इस सरकार का पूरा संरक्षण है। पांच दिन बाद मुख्य आरोपी की गिरफ़्तारी पुलिस और सरकार की कार्यप्रणाली को बताती है कि वह उत्तराखंड के लोगों को सुरक्षा देने के लिए कितनी गम्भीर है। रावत ने इस प्रकरण को जनभावनाओं के अनुसार फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर तुरंत न्याय दिया जाय जो प्रदेश के लोगों की उत्तराखंड की बेटी को न्याय की मांग की है।

1861 के कानून से चल रहा प्रदेश, हाईकोर्ट के आदेश भी नहीं माने

उत्तराखंड के अलावा देश में कहीं भी राजस्व पुलिस न होने का तर्क देते हुए वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद जखमौला का कहना है कि यदि सिविल पुलिस होती तो अंकिता की जान बच सकती थी। राजस्व पुलिस को गैर जरूरी बताते हुए जखमौला ने कहा कि रेगुलर सिविल पुलिस प्रोफेशनल होती है। यदि जांच समय से होती तो हत्यारे पांच दिन तक खुले नहीं घूम रहे होते। राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ पूर्व आईपीएस अफसर ने प्रदेश की पुलिस को मार्डनाइजेशन करने के लिए प्रयास किये गये, लेकिन राजस्व पुलिस की व्यवस्था सरकार को खत्म करनी थी। सरकार अध्यादेश लाकर राजस्व पुलिस की व्यवस्था को समाप्त कर सकती है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अभी जो राजस्व पुलिस की व्यवस्था है वह अंग्रेजों ने 1861 में प्रदेश को दी थी। अंग्रेज पर्वतीय जिलों में अधिक खर्च नहीं करना चाहते थे, इसलिए यह व्यवस्था की थी।

पटवारी, कानूनगो को ही पुलिस का काम सौप दिया। आईपीसी के आरोपियों की गिरफ्तारी व उन्हें जेल भेजने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होती है। आज की तारीख में भी प्रदेश के आधे से अधिक इलाके में यही व्यवस्था लागू है। राजस्व पुलिस को कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरे देश में उत्तराखंड के अलावा कहीं नहीं हैं। उत्तराखंड में राजस्व क्षेत्र के तकरीबन 8 हजार गांव राजस्व पुलिस के पास ही है। जिन्हें रेगुलर पुलिस से जोड़ने के लिए 68 थाने और 104 पुलिस चौकियां स्थापित की जानी है, तो वहीं कुल 58 प्रतिशत क्षेत्र का एक तिहाई आबादी वाला क्षेत्र बिना किसी खर्च के रेगुलर पुलिस से जोड़ा जा सकता है। जिसके सम्बन्ध में भी शासन को प्रस्ताव भेजा था।

इससे पहले 12 जनवरी 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा और आलोक सिंह की खंडपीठ ने राजस्व पुलिस को तफ्तीश व कार्रवाई में असफल बताते हुए पूरे प्रदेश को सिविल पुलिस व्यवस्था के तहत लाने का आदेश दिया था। नैनीताल हाईकोर्ट ने टिहरी जनपद के दहेज हत्या के एक मामले की सुनवाई करते हुए राजस्व पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये और राज्य सरकार को छह महीने के अंदर इस व्यवस्था को खत्म करने के निर्देश दिये। वर्ष 2013 में केदारनाथ व प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में आई आपदा के दौरान भी राजस्व पुलिस की कार्यशैली व क्षमता पर सवाल खड़े हुए थे और सरकार ने क्रमिक रूप से इस व्यवस्था को खत्म करने और उसके स्थान पर सिविल पुलिस का दायरा बढाने की नीति बनाई थी। लेकिन इसके बाद भी पर्वतीय क्षेत्रों में धरातल पर राजस्व पुलिस ही दिखती है।

जनवादी संगठनों में सुगबुगाहट

अंकिता हत्याकांड को लेकर प्रदेश के तमाम जनवादी संगठनों में भी रोष पनपा हुआ है। बच्ची के हत्यारों को कठोर सजा दिलाए जाने के लिए फास्ट ट्रेक कोर्ट की पैरवी करते हुए कई लोग पनुवाद्योखन के जगदीश हत्याकांड के साथ ही अंकिता हत्याकांड के खिलाफ महिलाओं से जुड़े सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं। जोशीमठ के हैलंग में हुई घसियारी महिलाओं के उत्पीड़न और जगदीश हत्याकांड के साथ ही इस मामले को लेकर एक बड़े जनांदोलन को लेकर तमाम संगठनों के प्रतिनिधियों में बातचीत शुरू हो चुकी है। इस जघन्य हत्याकांड की भर्त्सना करते हुए तमाम संगठनों ने इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ प्रतिवाद दर्ज कराए जाने की कोशिश शुरू कर दी है।

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